एजेंसी, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को देश के नागरिकों के जीवन को और अधिक सरल व सुगम बनाने के लिए तेजी से बदलते समय के अनुसार शासन व्यवस्था को लगातार अपडेट करने की जरूरत पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश के प्रशासन का मुख्य आधार ‘नागरिक देवो भव:'(नागरिक प्रथम) का भाव है। सार्वजनिक सेवाओं को आम जनता की जरूरतों के प्रति अधिक कुशल और संवेदनशील बनाने के लिए उनमें बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
Sharing my remarks during the Karmayogi Sadhana Saptah.
https://t.co/8nkQJE1QZQ— Narendra Modi (@narendramodi) April 2, 2026
‘साधना सप्ताह’ कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर एक वीडियो संदेश के जरिए पीएम मोदी ने कहा कि अब शासन को सही मायनों में जनता पर केंद्रित बनाकर उसे एक नई पहचान दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन व्यवस्था को परखने का असली पैमाना यही होना चाहिए कि उससे नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में कितना सुधार आ रहा है। उन्होंने सभी लोकसेवकों से अपील की कि वे हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करें। उन्होंने प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव की बात करते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था में ‘अधिकारी’ होने के अहंकार पर ज्यादा जोर था, लेकिन आज का भारत पूरी तरह से ‘कर्तव्य भावना’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि कोई भी निर्णय लेने से पहले वे यह जरूर सोचें कि उनका कर्तव्य क्या कहता है, इससे उनके काम का असर कई गुना बढ़ जाएगा।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि किसी भी सामान्य नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी दफ्तर ही पूरी सरकार का असली चेहरा होता है। अधिकारियों का व्यवहार और उनकी कार्यशैली ही लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को तय करती है। उन्होंने कहा कि हमें हर स्तर पर इस अटूट विश्वास की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि यही हमारे लोकतंत्र की असली बुनियाद है। भारत की संघीय व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश की प्रगति सभी राज्यों की मिली-जुली सफलता पर टिकी है। उन्होंने ‘पिछड़े’ और ‘बीमारू’ राज्य जैसे पुराने शब्दों को खत्म करने की जरूरत बताई और कहा कि आपसी तालमेल से ही राज्यों के बीच के अंतर को भरा जा सकता है।
पीएम मोदी ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तेज आर्थिक विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और तकनीक के इस्तेमाल को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि आज का भारत नई उम्मीदों और आकांक्षाओं से भरा हुआ है। हर नागरिक के अपने सपने हैं और उन सपनों को पूरा करने में सहयोग देना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोकसेवकों को प्रेरित किया कि वे अपने फैसलों को भविष्य के बड़े संदर्भ में देखें कि कैसे उनका एक छोटा सा कदम लाखों लोगों की जिंदगी बदल सकता है।
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प्रौद्योगिकी और तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार के काम करने के तरीके में तकनीक का बहुत बड़ा समावेश हुआ है। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आने से यह बदलाव और भी तेज होंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही व्यक्ति एक बेहतर प्रशासक साबित होगा जिसे तकनीक और डेटा की गहरी समझ होगी।
बता दें कि ‘साधना सप्ताह’ (राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय योग्यता को मजबूत करना) का आयोजन क्षमता विकास आयोग द्वारा 2 से 8 अप्रैल तक किया जा रहा है। यह सिविल सेवा के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने का एक बहुत बड़ा प्रयास है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से ही हर सरकारी कर्मचारी की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एक समर्पित संस्था की जरूरत थी, जिसे पूरा करने के लिए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत क्षमता विकास आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।


