एजेंसी, भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देशानुसार, मार्च महीने के लिए मंत्रियों की जनसुनवाई का नया समय-पत्रक (रोस्टर) जारी कर दिया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत शनिवार, रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर प्रत्येक कार्यदिवस पर एक मंत्री प्रदेश भाजपा कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। मार्च के पूरे महीने में कुल सत्रह दिन मंत्री जनता और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निराकरण करेंगे।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा कल सुनेंगे समस्याएं
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कल यानी दो मार्च को मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा प्रदेश भाजपा कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वे दोपहर एक बजे से तीन बजे तक आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी शिकायतों और सुझावों पर चर्चा करेंगे।
ये भी पढ़े : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का दिल्ली दौरा : अमित शाह से महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा
पांच मंत्रियों को इस माह नहीं मिली जिम्मेदारी
मार्च महीने की इस सूची में एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि मंत्रिमंडल के पांच सदस्यों की इस बार एक भी दिन ड्यूटी नहीं लगाई गई है। इनमें लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह, सहकारिता एवं खेल मंत्री विश्वास सारंग, पशुपालन मंत्री लखन पटेल, नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हैं। ये पांचों मंत्री इस महीने भाजपा कार्यालय की जनसुनवाई व्यवस्था में मौजूद नहीं रहेंगे।
समस्याओं के समाधान के लिए पुख्ता व्यवस्था
भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने इस व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी अध्यक्ष द्वारा शुरू की गई यह पहल निरंतर जारी है। प्रत्येक मंत्री का कार्यालय में बैठने का दिन पहले से ही निश्चित किया गया है। यदि किसी निर्धारित दिन पर कोई त्यौहार या सार्वजनिक अवकाश पड़ता है, तो संबंधित मंत्री की ड्यूटी अगले तय दिन पर लगा दी जाती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अनिवार्य कारणवश कोई मंत्री अपने तय समय पर उपस्थित नहीं हो पाते, तो उनकी जगह उन मंत्रियों को आमंत्रित किया जाता है जो पूर्व में अवकाश के कारण नहीं आ सके थे। कार्यकर्ताओं और नागरिकों की सुविधा के लिए पार्टी ने यह प्रबंधन भी किया है कि यदि किसी विशिष्ट विभाग का काम हो और मंत्री उपलब्ध न हों, तो संबंधित व्यक्ति को सीधे विभागीय अधिकारियों के पास भेजा जाता है ताकि समस्या का तत्काल समाधान हो सके।


