एजेंसी, नई दिल्ली। NASA Astronaut Anil Menon : भारत और भारतीय मूल के लोगों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र से एक बेहद गौरवशाली और बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन मंगलवार को कजाकिस्तान के ऐतिहासिक बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए सफलतापूर्वक रवाना हो गए हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक मिशन में उनके साथ दो अनुभवी रूसी कॉस्मोनॉट, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी शामिल हैं। यह प्रक्षेपण पूरी दुनिया के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए एक बहुत बड़ी घटना है, जिस पर नासा और रोस्कोस्मोस दोनों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।
Proud to serve the United States Space Force and fly to the International Space Station today in support of NASA and our international partners! pic.twitter.com/R286FUbJ2P
— Anil Menon (@astro_anil) July 14, 2026
रात 11 बजकर 56 मिनट पर सफलतापूर्वक डॉक हुआ अंतरिक्ष यान
अंतरिक्ष विज्ञान के तय मानकों के अनुसार यह प्रक्षेपण भारतीय समयानुसार रात 8 बजकर 17 मिनट पर संपन्न हुआ। कजाकिस्तान की धरती से रॉकेट के उड़ान भरने के बाद अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी के दो चक्कर सफलतापूर्वक पूरे किए। इसके बाद रात 11 बजकर 56 मिनट पर सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमैटिक) प्रणाली के जरिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के प्रिचाल मॉड्यूल से सुरक्षित रूप से जुड़ गया। जहां एक तरफ यह अनिल मेनन के जीवन की सबसे पहली अंतरिक्ष यात्रा है, वहीं दूसरी तरफ उनके साथी रूसी अंतरिक्ष यात्रियों का यह दूसरा बड़ा अंतरिक्ष मिशन है।
कजाकिस्तान में मौजूद था नासा प्रमुख और अनिल मेनन का परिवार
इस ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाले पल का गवाह बनने के लिए अनिल मेनन का पूरा परिवार कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित था। उनकी अंतरिक्ष यात्री पत्नी अन्ना विल्हेम और अन्य परिजनों के साथ नासा के प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन भी वहां मौजूद रहे, जिन्होंने हरी झंडी दिखाकर अंतरिक्ष यात्रियों का हौसला बढ़ाया। अंतरिक्ष यान के सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित होने और स्पेस स्टेशन से जुड़ने के बाद परिवार और नासा कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ गई।
अंतरिक्ष स्टेशन पर पहले से मौजूद वैज्ञानिकों के साथ मिलकर करेंगे काम
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने के बाद अनिल मेनन, प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना का वहां पहले से मौजूद वैज्ञानिकों के दल ने गर्मजोशी से स्वागत किया। अब यह नई तिकड़ी वहां पहले से तैनात नासा के अंतरिक्ष यात्रियों जेसिका मीर, जैक हैथवे और क्रिस विलियम्स, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की सोफी एडेनोट तथा रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्रियों सर्गेई कुद-स्वेर्चकोव, सर्गेई मिकाएव और आंद्रेई फेद्यायेव के साथ मिलकर काम करेगी। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग सुदूर अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम साबित होगा।
8 महीने लंबे इस वैज्ञानिक मिशन का मुख्य उद्देश्य
लगभग 8 महीने लंबे इस चुनौतीपूर्ण मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष की शून्य गुरुत्वाकर्षण (जीरो ग्रेविटी) स्थिति में विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक अनुसंधान करना है। इसके साथ ही वैज्ञानिक वहां नई तकनीकों और प्रणालियों का व्यावहारिक परीक्षण भी करेंगे। इस मिशन के माध्यम से प्राप्त होने वाले परिणाम भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों जैसे कि मंगल और चंद्रमा मिशन को और अधिक सुरक्षित बनाएंगे। साथ ही ऐसी तकनीकों का विकास किया जाएगा जिससे पृथ्वी पर मानव जीवन को और अधिक सुगम और स्वास्थ्यप्रद बनाया जा सके। इन तीनों अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी अप्रैल 2027 में तय की गई है।
भारतीय स्कूली बच्चों की पेंटिंग्स भी अंतरिक्ष की सैर पर रवाना
इस मिशन से भारत का एक और अनोखा और बेहद प्यारा कनेक्शन जुड़ा है। रूस की अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहयोग एजेंसी की प्रमुख येलेना रेमिज़ोवा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष सोयूज रॉकेट के साथ भारतीय स्कूली बच्चों द्वारा बनाई गई सुंदर चित्रकृतियां (पेंटिंग्स) भी अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं। यह पहल न केवल भारत और रूस के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है, बल्कि भारत के लाखों स्कूली बच्चों को भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान को अपने करियर के रूप में चुनने के लिए प्रेरित करने का एक बेहतरीन और प्रतीकात्मक कदम भी है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं भारतीय मूल के अनिल मेनन
अनिल मेनन का व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में एक यूक्रेनी और भारतीय मूल के प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। वे केवल एक अंतरिक्ष यात्री ही नहीं हैं, बल्कि पेशेवर रूप से एक बेहद कुशल इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन (डॉक्टर) भी हैं। इसके अलावा वे अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के सम्मानजनक पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अमेरिकी वायुसेना में रहने के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम’ के तहत युद्धग्रस्त देश अफगानिस्तान में अग्रिम मोर्चे पर अपनी सेवाएं प्रदान की थीं।
एवरेस्ट के पर्वतारोहियों की जान बचाने से लेकर भारत में पोलियो उन्मूलन तक का सफर
अनिल मेनन का भारत और मानव सेवा से बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध ‘हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन’ के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहियों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान की थी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एक रोटरी एम्बेसडोरियल स्कॉलर के रूप में भारत में 1 पूरा वर्ष बिताया था। भारत प्रवास के दौरान उन्होंने देश के ग्रामीण इलाकों में पोलियो टीकाकरण अभियानों का बहुत बारीकी से अध्ययन किया था और इस जनहित कार्य में अपना सक्रिय सहयोग भी दिया था।
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