एजेंसी, नई दिल्ली। Anti Paper Leak Bill 2026 : संसद के निचले सदन ने बुधवार को लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन विधेयक 2026 को ध्वनिमत के साथ सफलता पूर्वक पारित कर दिया है। यह नया और कठोर कानून प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, प्रश्नपत्र प्रकटन और अनुचित साधनों के प्रयोग पर पहले की तुलना में कई गुना अधिक कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेश किया गया है। इस अति महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पर विस्तृत चर्चा के दौरान सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के सांसदों के बीच काफी तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कई विवादित टिप्पणियों को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसकी वजह से सदन की पूरी कार्यवाही को दो बार कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा था। इसके पश्चात प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से बहस का आधिकारिक जवाब प्रस्तुत किया, जिसके बाद सदन ने इस ऐतिहासिक विधेयक को अपनी पूर्ण स्वीकृति दे दी।
#MonsoonSession2026#LokSabha passes the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026.
The Bill amends the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024, with the objective of further strengthening the legal framework to prevent paper… pic.twitter.com/vKdvn6RWN4
— SansadTV (@sansad_tv) July 29, 2026
10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड
इस नए पारित संशोधन विधेयक के कड़े कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति या गिरोह परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने या किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों का उपयोग करने में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक की सख्त कारावास की सजा सुनाई जाएगी। इसके साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कानून में इस बात का भी विशेष ध्यान रखा गया है कि यदि यह पूरा मामला किसी संगठित गिरोह या बड़े अपराध तंत्र से जुड़ा हुआ पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 वर्ष की सख्त जेल और 10 करोड़ रुपये तक के अत्यधिक कठोर आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा अपराध करने का साहस न कर सके।
2 महीने में जांच पूरी करने और फास्ट ट्रैक अदालत का गठन
नए कानून में मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए समय सीमा पूरी तरह से निर्धारित कर दी गई है। विधेयक के मुख्य प्रावधानों के अनुसार ऐसे किसी भी मामले की पूरी जांच प्रक्रिया को 2 महीने की तय समयावधि के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को विशेष त्वरित अदालतों के गठन का स्पष्ट निर्देश जारी किया जाएगा। इन त्वरित अदालतों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि अदालत में औपचारिक आरोपपत्र दाखिल किए जाने के ठीक 3 महीने के भीतर मुकदमे की पूरी सुनवाई समाप्त कर अंतिम फैसला सुना दिया जाए। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को आश्वस्त करते हुए बताया कि हालिया नीट मामले में भी सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए पूरी जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी थी, जिसमें आरोपपत्र पहले ही पेश किया जा चुका है।
शिक्षा प्रणाली पर नेता प्रतिपक्ष के गंभीर आरोप और भारी हंगामा
विधेयक पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लेते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के संचालन पर बेहद कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि देश की पूरी शिक्षा प्रणाली का बहुत तेजी से निजीकरण किया जा रहा है और एक विशिष्ट विचारधारा वाले संगठन ने इस पूरी व्यवस्था पर अपना अनुचित नियंत्रण स्थापित कर लिया है। अपने वक्तव्य के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए अंधभक्त शब्द का प्रयोग किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और सदन में जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि युवाओं का गुस्सा केवल प्रश्नपत्र लीक होने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे महंगी शिक्षा और लगातार बढ़ती असमानता से भी अत्यंत दुखी हैं।
जंतर मंतर घटनाक्रम पर तीखी नोकझोंक और अध्यक्ष की चेतावनी
चर्चा के दौरान माहौल उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया और सीधे देश के गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग करने की अनुमति शीर्ष स्तर से दी गई थी। इस बयान पर तुरंत संज्ञान लेते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बेहद कड़ा विरोध जताया और राहुल गांधी से इस बात का लिखित प्रमाण प्रस्तुत करने या पूरे देश से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। इस पूरे विवाद और हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बिना किसी ठोस आधार और साक्ष्य के सीधे आरोप लगाना अनुचित है। उन्होंने निर्देश दिया कि मर्यादा के विपरीत कही गई टिप्पणियों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न: एंटी पेपर लीक संशोधन बिल 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों के प्रयोग पर अत्यंत कठोर दंडात्मक कार्रवाई करना है।
प्रश्न: नए कानून में सामान्य और संगठित पेपर लीक अपराधों के लिए क्या सजा तय की गई है?
उत्तर: सामान्य मामलों में 5 से 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना, जबकि संगठित गिरोह होने पर 7 से 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा।
प्रश्न: मामलों की जांच और अदालती सुनवाई के लिए क्या समय सीमा रखी गई है?
उत्तर: मामले की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी और फास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए चार्जशीट के 3 महीने के अंदर सुनवाई समाप्त करनी होगी।
प्रश्न: इस बिल पर चर्चा के दौरान संसद में किस बात को लेकर हंगामा हुआ?
उत्तर: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा शिक्षा व्यवस्था, आरएसएस और गृह मंत्री पर लगाए गए आरोपों पर तीखी बहस और हंगामा हुआ।
प्रश्न: सरकार की ओर से संसद में इस विधेयक पर किसने जवाब पेश किया?
उत्तर: प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का आधिकारिक जवाब दिया और विधेयक पारित हुआ।
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