गृह मंत्री

संसद में गूंजा मुद्दा : गृह मंत्री ने नक्सलवाद पर घेरा तो वित्त मंत्री ने दिवाला कानून संशोधन से निवेशकों का भरोसा जीता

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से आज़ाद कराने के प्रयासों पर चर्चा के दौरान संसद में गूंजा मुद्दा । इस मौके पर शाह ने कहा कि आज बस्तर के इलाके से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। वहां के हर गांव में स्कूल और राशन की दुकानें खोलने का बड़ा अभियान चलाया गया है।

अमित शाह ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए सवाल किया कि जो लोग नक्सलवाद की तरफदारी कर रहे थे, वे बताएं कि 70 के दशक से अब तक इसका समाधान क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद देश के हर गरीब को पक्का घर, गैस चूल्हा, पीने का साफ़ पानी, 5 लाख तक का मुफ्त इलाज और हर महीने 5 किलो अनाज मिला, लेकिन बस्तर के लोग इन सुविधाओं से पीछे क्यों रह गए थे।

शाह ने आगे कहा कि बस्तर के लोग इसलिए पीछे छूटे क्योंकि वहां लाल आतंक का साया था, जिसकी वजह से विकास वहां तक नहीं पहुंच पाया। मोदी सरकार में आज वह साया हट चुका है और बस्तर उन्नति कर रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी हथियार उठाएगा, उसके साथ कड़ाई से निपटा जाएगा। पिछली सरकारों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि 75 साल में से 60 साल आपने राज किया, फिर भी आदिवासी विकास से दूर क्यों रहे? उन्होंने विपक्ष को अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी। शाह ने इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वामपंथी विचारधारा की वजह से ही नक्सलवाद फैला और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी माना था कि आंतरिक सुरक्षा के लिए माओवाद सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन तब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

आईबीसी संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा से मंजूर, कंपनियों के विवाद अब कोर्ट के बाहर भी सुलझ सकेंगे
लोकसभा में सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 को बहुमत से पास कर दिया गया। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इस कानून का मुख्य लक्ष्य मुसीबत में फंसी कंपनियों की समस्याओं को जल्दी सुलझाना है। इस नए कानून के आने के बाद कंपनियों के दिवालिया होने के मामलों का समाधान अदालत के बाहर भी हो सकेगा, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।

वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि यह बिल अगस्त 2025 में सदन में पेश किया गया था और फिर इसे विशेष समिति के पास भेजा गया था। समिति की गहराई से की गई जांच के बाद इसमें 11 अहम बदलाव किए गए हैं। नए नियमों में कर्ज देने वालों को ज्यादा ताकत दी गई है ताकि वे समाधान की प्रक्रिया में अपनी बात रख सकें, जिससे पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

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सीतारमण ने स्पष्ट किया कि अब अपीलीय अदालत में मामला जाने के बाद तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा। इसमें बीमार कंपनियों के मामलों में होने वाली देरी को रोकने के पुख्ता इंतजाम हैं और कर्मचारियों के हितों का खास ख्याल रखा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्मचारियों के बकाये को प्राथमिकता दी जाएगी और उनके हितों से कोई समझौता नहीं होगा। सूक्ष्म और लघु उद्योगों का भी इस बिल में ध्यान रखा गया है।

वित्त मंत्री ने बताया कि 2016 में कानून आने के बाद से ऐसी कंपनियों का प्रदर्शन सुधरा है। बैंकों का डूबा हुआ पैसा वापस मिलने की दर अब 52 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी बताया कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों में जांच एजेंसी ने 1105 केसों की छानबीन की और करीब 64,920 करोड़ की संपत्ति जब्त कर 150 लोगों को गिरफ्तार किया है। आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्ती जारी है और इस कानून में किसी भी कंपनी या क्षेत्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

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