एजेंसी, इस्लामाबाद। PoK Protest Firing : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी भारी जनाक्रोश और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बेहद विवादित और कड़ा बयान दिया है। एक टेलीविज़न साक्षात्कार के दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पीओके में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को वे भारत की भांति ही पाकिस्तान का परम शत्रु मानते हैं। उन्होंने दृढ़तापूर्वक घोषणा की कि ऐसे लोगों या संगठनों के साथ पाकिस्तान सरकार किसी भी प्रकार की कोई वार्ता या समझौता नहीं करेगी। रक्षा मंत्री का यह अत्यंत कठोर वक्तव्य ऐसे समय में सामने आया है, जब बीते दो दिनों के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा बलों की अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 32 प्रदर्शनकारियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
Pakistani Defence Minister Khwaja Asif justifies killing of civilians across Pakistan Occupied Jammu & Kashmir PoJK.
Blames India for the protests. pic.twitter.com/CsNOzwB5Rg
— THE TRADESMAN 📈 (@The_Tradesman1) July 29, 2026
12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग पर भड़की हिंसा
उल्लेखनीय है कि यह पूरा उग्र जनआंदोलन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी पीओके की प्रांतीय विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। मंगलवार के दिन लगभग 5 हजार से अधिक लोगों का विशाल जनसमूह रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहा था, तभी सुरक्षा बलों ने उन पर बल प्रयोग करते हुए सीधी गोलियां चला दीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बलों ने बिना किसी उकसावे के यह हिंसक कार्रवाई की, जबकि सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। इस भीषण घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात कर धारा 144 लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाओं को भी पूरी तरह से ठप कर दिया गया है।
12 आरक्षित सीटों के जरिए इस्लामाबाद के राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप
पीओके विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 45 सीटों पर प्रत्यक्ष निर्वाचन होता है, जिनमें से 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं जो 1947 या उसके उपरांत जम्मू-कश्मीर से जाकर पाकिस्तान के अन्य प्रांतों में बस गए थे। इस बार इन सीटों पर लगभग 6 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और विभिन्न स्थानीय विपक्षी दलों का आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टियां इन 12 सीटों का दुरुपयोग करके स्थानीय सरकार के गठन में अनुचित हस्तक्षेप करती हैं। ये सीटें अक्सर विधानसभा में बहुमत का गणित बदल देती हैं, जिसके कारण स्थानीय निवासियों की वास्तविक जनभावनाओं की उपेक्षा होती है। यही कारण है कि स्थानीय नागरिक इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया को खारिज कर बताया दिखावटी कवायद
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत सरकार ने पीओके में आयोजित हो रही चुनाव प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा इस भूभाग में कराए जा रहे चुनाव मात्र एक दिखावटी कवायद हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इस प्रकार के निष्फल आयोजनों के माध्यम से अपने गैर-कानूनी कब्जे और क्षेत्र में लगातार हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रहा है। इस बीच, क्षेत्र में सुरक्षा बलों की बर्बरता और ख्वाजा आसिफ के भड़काऊ बयान के बाद स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने PoK के प्रदर्शनकारियों के बारे में क्या विवादित टिप्पणी की?
उत्तर: उन्होंने कहा कि वे PoK में विरोध प्रदर्शन कर रहे नागरिकों को ‘भारत जैसा दुश्मन’ मानते हैं और उनसे कोई बातचीत नहीं करेंगे।
प्रश्न: PoK में जारी हिंसा में अब तक कितने प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है?
उत्तर: सुरक्षा बलों की सीधी गोलीबारी में बीते दो दिनों में 32 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 50 से अधिक घायल हैं।
प्रश्न: जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) मुख्य रूप से किस बात का विरोध कर रही है?
उत्तर: JAAC प्रांतीय विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है, जिनके जरिए इस्लामाबाद पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप है।
प्रश्न: PoK में जारी चुनाव प्रक्रिया पर भारत सरकार का क्या आधिकारिक रुख है?
उत्तर: भारतीय विदेश मंत्रालय ने PoK के चुनावों को ‘दिखावटी कवायद’ बताकर खारिज किया है और कहा कि यह अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश है।
प्रश्न: हिंसा के बाद PoK में सुरक्षा की क्या स्थिति है?
उत्तर: पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात कर धारा 144 लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं।
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