समृद्ध मध्य प्रदेश केवल सपना नहीं, अन्य राज्यों के लिए आदर्श “मोहन राज”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खंडवा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के मंच से प्रदेश के किसानों के लिए की गई घोषणाएं केवल सरकारी योजनाओं का विस्तार मात्र नहीं हैं, बल्कि यह मध्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था को एक नए युग में प्रवेश कराने का दूरदर्शी संकल्प है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की धड़कन किसान हैं। जब एक राज्य का नेतृत्व किसान के पसीने की कीमत समझता है और उसके स्वाभिमान को शीर्ष पर रखता है, तो विकास की किरणें धरातल पर वास्तविक उजाला फैलाने लगती हैं। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82.70 लाख से अधिक किसान परिवारों के खातों में सिंगल क्लिक के जरिए 3308 करोड़ रुपए की विशाल राशि का अंतरण इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सरकार अपनी प्राथमिकताओं को लेकर पूरी तरह स्पष्ट और प्रतिबद्ध है। प्रति किसान चार हजार रुपए की यह सम्मान निधि केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह उन अन्नदाताओं के प्रति राज्य का आभार है, जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करके देश का पेट भरते हैं। खंडवा की उपजाऊ काली मिट्टी और वहां के परिश्रमी किसानों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने जिस तरह से स्थानीय नवाचारों को पूरे प्रदेश और देश के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया, उससे प्रदेश के हर किसान में अपनी माटी और अपने पेशे के प्रति एक नया गर्वबोध जागृत हुआ है।
बलराम कृषि महोत्सव को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम की सीमा में न बांधकर इसे वैज्ञानिक खेती और किसानों के समृद्ध भविष्य का अभियान घोषित करना एक बहुत बड़ा वैचारिक परिवर्तन है। पारंपरिक खेती के तरीकों से आगे बढ़कर जब किसान आधुनिक तकनीक, मिट्टी परीक्षण, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा फसल विविधीकरण को अपनाएगा, तब वास्तव में खेती लाभ का धंधा बनेगी। मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा प्रदेश की अर्थनीति में कृषि को केंद्र में रखने की स्पष्ट रणनीति को दर्शाती है। इसका अंतिम लक्ष्य किसानों की आय को बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार लाना है। जब किसान आर्थिक रूप से सशक्त होता है, तो उसका सीधा असर स्थानीय बाज़ारों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राज्य की समग्र जीडीपी पर पड़ता है। कृषि क्षेत्र में तकनीकी और वैज्ञानिक पद्धतियों के समावेश से न केवल उपज की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार साबित होगी।
किसानों के जीवन में व्यावहारिक बदलाव लाने की दिशा में सिंचाई की सुविधाओं और बिजली आपूर्ति का सबसे बड़ा योगदान होता है। मुख्यमंत्री का यह ऐलान कि इस वर्षाकाल के बाद किसानों को रात के साथ-साथ दिन के समय भी सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, एक क्रांतिकारी कदम है। अक्सर देखा गया है कि रात में सिंचाई करने से किसानों को भारी परेशानियों और जोखिमों का सामना करना पड़ता था। दिन में बिजली मिलने से न केवल उनका जीवन सुगम होगा, बल्कि वे अधिक कुशलता से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। इसके साथ ही, पिछले ढाई वर्षों में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाना सरकार की इच्छाशक्ति और कार्यकुशलता को साबित करता है। पानी और बिजली का यह अद्भुत समन्वय प्रदेश के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। केवल फसलों तक सीमित न रहकर दुग्ध उत्पादन को वर्तमान नौ प्रतिशत से बढ़ाकर बीस प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधता लाने का एक बेहद सराहनीय प्रयास है। पशुपालन और दुग्ध उत्पादन हमेशा से भारतीय कृषि के मजबूत स्तंभ रहे हैं, और इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने से किसानों को अतिरिक्त और नियमित आय का साधन मिलेगा।
विकास की यह लहर केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में भी समान रूप से बह रही है। खंडवा के लिए नई पुलिस बटालियन की स्थापना और मूंदी से खंडवा तक नई सड़क के निर्माण की घोषणा से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार होगा। विशेष रूप से 15 सितंबर से पहले टेंडर जारी करने की समयबद्ध प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि सरकार योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर लाने के लिए कितनी गंभीर है। इसके अलावा, अगले महीने से प्रदेश में फिर से सरकारी रोडवेज बस सेवा शुरू करने का निर्णय आम नागरिकों, गरीबों और विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आएगा। सुलभ और किफायती सार्वजनिक परिवहन किसी भी राज्य की प्रगति की जीवनरेखा होता है।
शिक्षा और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी प्रदेश एक नई पहचान बना रहा है। सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना का निर्णय नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक धरोहर और संस्कारों से जोड़ने का एक अनुठा प्रयास है। पहले चरण के 275 विद्यालयों में से 136 का निर्माण पूर्ण होना और दूसरे चरण में 200 नए विद्यालयों की स्वीकृति यह दर्शाती है कि प्रदेश का शैक्षणिक ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, ओंकारेश्वर धाम में करीब तीन हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य यह सिद्ध करते हैं कि सरकार हमारी आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार और व्यापार के अनगिनत नए अवसर भी पैदा होंगे।
लाड़ली बहना योजना, एयर एंबुलेंस सेवा, गरीब कल्याण योजनाएं और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कदम मध्य प्रदेश को एक सच्चे कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करते हैं। जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचता है, तभी एक सशक्त और समावेशी समाज का निर्माण होता है। समान नागरिक संहिता, महिला सशक्तिकरण और हर घर तिरंगा अभियान जैसे दूरगामी विषयों का उल्लेख कर मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और सर्वांगीण विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
संक्षेप में कहा जाए तो, बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से जो संदेश दिया गया है, वह एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील मध्य प्रदेश की नींव रखने वाला है। किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने से लेकर सुदृढ़ यातायात, बेहतर शिक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर लिए गए ये निर्णय प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सामर्थ्य रखते हैं। जब सरकार की नीतियां जन-केंद्रित होती हैं और क्रियान्वयन में पारदर्शिता होती है, तो समृद्धि केवल एक सपना नहीं रह जाती, बल्कि एक जीवंत वास्तविकता बन जाती है। मध्य प्रदेश आज जिस दिशा में कदम बढ़ा रहा है, वह निस्संदेह अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
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