पुलिस की नई भर्ती

मध्यप्रदेश में सुरक्षित कल की सशक्त नींव बनेगी पुलिस की नई भर्ती

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मध्यप्रदेश में सुरक्षित कल की सशक्त नींव बनेगी पुलिस की नई भर्ती

​सुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की असली पहचान केवल घोषणाओं या संकल्पों से नहीं, बल्कि उनके धरातल पर समयबद्ध और त्वरित क्रियान्वयन से होती है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस सिद्धांत को चरितार्थ करते हुए एक बार फिर यह साबित किया है कि नेतृत्व जब जनहित और प्रशासनिक दक्षता के प्रति संवेदनशील होता है, तो नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि परिणाम बनकर सामने आती हैं। हाल ही में पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों और उसके तत्काल बाद गृह विभाग द्वारा उठाए गए ऐतिहासिक कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में सुशासन, सुरक्षा और युवाओं के रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह कार्यशैली ‘जो कहा, सो किया’ के उस प्रशासनिक मॉडल को रेखांकित करती है, जिसकी अपेक्षा एक कल्याणकारी और पारदर्शी राज्य से की जाती है।
​कानून-व्यवस्था किसी भी प्रगतिशील राज्य की रीढ़ होती है। जब तक आंतरिक सुरक्षा तंत्र मजबूत, साधन-संपन्न और जनबल से परिपूर्ण नहीं होगा, तब तक विकास की गति को अपेक्षित दिशा नहीं दी जा सकती। इसी दूरदर्शी सोच के तहत मुख्यमंत्री ने पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस विभाग में वर्षों से लंबित या नवसृजित रिक्त पदों की पूर्ति में किसी भी प्रकार का विलंब न किया जाए। यह केवल एक प्रशासनिक निर्देश भर नहीं था, बल्कि राज्य के पुलिस तंत्र को सशक्त बनाने और युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने की एक संजीदा पहल थी। इस निर्देश के मात्र तीन दिनों के भीतर गृह विभाग द्वारा विभिन्न श्रेणियों के 9 हजार 662 पदों पर स्वीकृति के शासकीय आदेश जारी होना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य का शीर्ष नेतृत्व जो संकल्प लेता है, उसे पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ समयसीमा के भीतर पूरा भी करता है।

​प्रशासनिक दक्षता और कर्मचारियों के मनोबल का सीधा संबंध पदोन्नति और उनके करियर विकास से होता है। लम्बे समय तक पदोन्नति के अभाव में कर्मचारियों के भीतर निराशा की भावना पनपने लगती है, जिसका असर उनके कार्य-प्रदर्शन पर पड़ता है। इस संवेदनशील पहलू को समझते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में चलाए गए विशेष पदोन्नति अभियान के तहत हाल ही में राज्य पुलिस के लगभग 25 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया। इतनी विशाल संख्या में एक साथ पदोन्नति देना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने समूचे पुलिस बल में एक नई ऊर्जा, उत्साह और समर्पण का संचार किया है। पदोन्नत अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरों की खुशी केवल व्यक्तिगत सफलता की प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि राज्य सरकार अपने निष्ठावान कर्मियों के योगदान को स्वीकारती है और उसका उचित सम्मान करती है।
​इस सफलता पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने जिस दूरदर्शिता का परिचय दिया है, वह उनके सतत सुधारवादी दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पदोन्नति की यह प्रक्रिया रुकी नहीं रहेगी, बल्कि आगामी महीनों में भी निरंतर जारी रहेगी। इतना ही नहीं, जो अधिकारी और कर्मचारी किसी कारणवश अब तक पदोन्नति से वंचित रह गए हैं, उन्हें चक्रीय क्रम में पदोन्नत करने के आदेश सितंबर माह में ही जारी करने की घोषणा कर मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया है कि विभाग के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अवसर पहुंचे। यह निर्णय पुलिस बल के भीतर पारदर्शी और न्यायसंगत कार्यसंस्कृति को स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
​गृह विभाग द्वारा स्वीकृत किए गए 9 हजार 662 पदों का विवरण राज्य में पुलिसिंग के विविध और आधुनिक स्वरूप को सुदृढ़ करने वाला है। भर्ती प्रक्रिया के तहत हर उस वर्ग और विशेषज्ञता का ध्यान रखा गया है जो एक आधुनिक और मुस्तैद पुलिस व्यवस्था के लिए अनिवार्य है। तृतीय श्रेणी के अराजपत्रित सूबेदार (अ) शीघ्रलेखक के 135 पद और सहायक उपनिरीक्षक (अ) के 520 पदों सहित कुल 655 पदों पर सीधी भर्ती के आदेश जारी किए गए हैं। यह प्रशासकीय तंत्र को लिपिकीय और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और तीव्र बनाएगा। इसी प्रकार, अपराधों की वैज्ञानिक जांच, तकनीकी साक्ष्य जुटाने और आधुनिक अपराध तंत्र से निपटने के लिए विशेषज्ञता आधारित पदों पर भर्ती को भी मंजूरी दी गई है। इसमें अराजपत्रित सूबेदार के 81 पद, जिला पुलिस बल के उपनिरीक्षक के 312 पद, विशेष सशस्त्र बल (विसबल) के उपनिरीक्षक के 69 पद, क्यूडी शाखा के 4 पद, अंगुल चिन्ह (फिंगरप्रिंट) विशेषज्ञ उपनिरीक्षक के 22 पद, आयुध शाखा के 10 पद और फोटो शाखा के 9 पद शामिल हैं। कुल 507 पदों पर होने वाली यह भर्ती पुलिस की अन्वेषण क्षमता को वैज्ञानिक दिशा प्रदान करेगी।
​जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आरक्षक (जीडी) होते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सर्वाधिक 7 हजार 500 आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों को प्रशासनिक मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, पुलिस बेड़े की गतिशीलता और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाने के लिए 1,000 आरक्षक (चालक) के पदों को भी स्वीकृत किया गया है। भर्ती के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार न केवल कागजी ढांचा तैयार कर रही है, बल्कि पुलिस विभाग की वास्तविक और व्यावहारिक जरूरतों को समझकर उन्हें धरातल पर पूरा कर रही है। यह 9,662 पदों की स्वीकृति तो एक शुरुआत भर है; मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पुलिस बल में कुल 18 हजार पदों को भरने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके शेष आदेश भी शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।
​यदि बीते वर्षों और वर्तमान निर्णयों को मिलाकर देखें, तो सरकार की मंशा और दिशा पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है। गत वर्ष स्वीकृत किए गए 8,500 पदों और इस वर्ष दी गई विशाल स्वीकृतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस का कायाकल्प करने का महाअभियान जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि मध्यप्रदेश पुलिस को न केवल संख्यात्मक रूप से मजबूत किया जाए, बल्कि इसे देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस के रूप में स्थापित किया जाए। एक ऐसा पुलिस बल, जो तकनीक से लैस हो, मानवीय संवेदनाओं से युक्त हो, और कानून का पालन कराने में अत्यंत कठोर तथा नागरिकों की सेवा में सदैव विनम्र हो।
​मध्यप्रदेश में पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण का यह प्रयास राज्य के समग्र विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। अतीत में राज्य के कुछ हिस्से नक्सलवाद और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। हालांकि, राज्य सरकार की दृढ़ नीतियों, पुलिस और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और निरंतर अभियानों के फलस्वरूप राज्य से नक्सलवाद का लगभग सफाया हो चुका है। नक्सलवाद के उन्मूलन के बाद अब यह अत्यंत आवश्यक है कि उन क्षेत्रों में शांति, स्थिरता और स्थायी विकास का वातावरण निर्मित किया जाए। मुख्यमंत्री ने अत्यंत सटीक रूप से रेखांकित किया है कि सुरक्षा का माहौल स्थापित होने के बाद अब पुलिस बल राज्य के निर्माण और रचनात्मक विकास कार्यों में भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेगा। जब सुरक्षा का वातावरण अभेद्य होता है, तभी उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और बुनियादी ढांचे का विकास गति पकड़ता है।
​मध्यप्रदेश के युवाओं के दृष्टिकोण से देखें तो यह निर्णय किसी वरदान से कम नहीं है। रोजगार की तलाश में जुटे हजारों योग्य और ऊर्जावान युवाओं के लिए पुलिस बल में शामिल होकर देश और प्रदेश की सेवा करने का यह एक सुनहरा अवसर है। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और बड़ी संख्या में पदों की उपलब्धता से युवाओं में विश्वास की एक नई लहर दौड़ी है। यह कदम राज्य के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूती प्रदान करेगा, क्योंकि जब युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिलता है, तो उनका सामर्थ्य राज्य के नवनिर्माण में लगता है।
​निष्कर्षतः, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह त्वरित, पारदर्शी और निर्णायक कदम यह सिद्ध करता है कि एक संवेदनशील और इच्छाशक्ति से परिपूर्ण नेतृत्व किस प्रकार राज्य की नियति को सकारात्मक मोड़ दे सकता है। केवल घोषणाएं करने के बजाय त्वरित निर्णय लेना, विभागों से तत्काल क्रियान्वयन कराना और सार्वजनिक रूप से स्वीकृतियों के आदेश जारी करना आधुनिक सुशासन की पहचान है। 25 हजार पुलिसकर्मियों की पदोन्नति से लेकर 18 हजार नए पदों पर भर्ती का यह विशाल संकल्प मध्यप्रदेश को सुरक्षा, शांति और समृद्धि के एक नए युग में ले जाने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस बनाने का यह सपना केवल एक नारा नहीं है, बल्कि धरातल पर आकृतियां लेता हुआ एक ठोस यथार्थ बन चुका है। डॉ. मोहन यादव के इस प्रगतिशील और दृढ निर्णयों से मध्यप्रदेश की जनता का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है, और यह तय है कि सुरक्षित मध्यप्रदेश ही स्वर्णिम मध्यप्रदेश की नींव बनेगा।

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