एजेंसी, गुवाहाटी। Assam Flood News : असम में इस साल मानसून की बारिश ने भयानक तबाही मचा रखी है और हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ का पानी भले ही कुछ कम हुआ हो, लेकिन संकट अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान जलभराव और बाढ़ से जुड़ी विभिन्न दुर्घटनाओं में 7 और लोगों की जान चली गई है। इन ताजा मौतों के साथ ही इस पूरे मानसून मौसम में अपनी जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 75 तक पहुंच गया है। सरकार और प्रशासन लगातार युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन कुदरत के इस कहर के सामने आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुका है। वर्तमान समय में असम के 3.32 लाख से अधिक नागरिक अभी भी बाढ़ की इस भीषण मार को झेलने के लिए मजबूर हैं। राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत कार्यों को तेज कर दिया है और जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए दी जाने वाली मुआवजा राशि को भी पहले से अधिक बढ़ा दिया है। अब पीड़ित परिवारों को 9 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी और इस पूरी प्रक्रिया को बिना किसी कागजी परेशानी के बहुत आसान बना दिया गया है ताकि प्रभावित लोगों को तुरंत वित्तीय सहायता मिल सके।
We will restore every piece of infrastructure damaged by the floods: stronger, more resilient and future ready.
No family in the affected areas will be left behind.#AssamFloodResponse pic.twitter.com/q9TPHS3P2t
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 29, 2026
7 जिले अभी भी जलमग्न और लाखों लोग बेघर
असम के कई इलाके अभी भी पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं और वहां के निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 7 प्रमुख जिले अभी भी बाढ़ की गंभीर चपेट में हैं। इन प्रभावित क्षेत्रों में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, सोनितपुर और कामरूप महानगर शामिल हैं। इन 7 जिलों के अंतर्गत आने वाले 21 राजस्व परिक्षेत्र और लगभग 622 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। अगर सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों की बात करें, तो चराइदेव जिले की स्थिति इस समय सबसे ज्यादा खराब है। केवल चराइदेव में ही 1.42 लाख से अधिक लोग बाढ़ की वजह से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर जिले में 97074 लोग और जोरहाट जिले में 57371 नागरिक बेहाल हैं। इन सभी इलाकों में लोगों के घर, संपत्तियां और मुख्य सड़कें पानी में डूब चुकी हैं, जिसके कारण उनका दैनिक जीवन पूरी तरह से ठप पड़ गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
बचाव अभियान और राहत शिविरों में जिंदगी
प्रशासन ने बेघर हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान चलाए हुए हैं। वर्तमान में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 81 से अधिक राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन सुरक्षित शिविरों में 32477 बेघर लोगों ने शरण ली हुई है, जिनके घर पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं या बह गए हैं। इसके अतिरिक्त 34 राहत वितरण केंद्र भी बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रभावित लोगों तक राशन, पीने का साफ पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री पहुंचाई जा रही है। लोगों की जान बचाने के लिए थल सेना, वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन सेवाएं दिन रात कड़ी मेहनत कर रही हैं। स्थानीय स्वयंसेवक भी इस आपदा की घड़ी में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं। शिवसागर जिले में आपातकालीन स्थिति में लोगों को एक दूसरे से संपर्क में रहने में कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए प्रशासन ने 30 जुलाई की रात 11:59 बजे तक दूरसंचार संजाल की आंतरिक रोमिंग सुविधा को भी बढ़ा दिया है ताकि संपर्क व्यवस्था बनी रहे।
खेती को भारी नुकसान और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान
इस भयानक जलप्रलय का असर केवल लोगों के घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था को भी इससे तगड़ा और विनाशकारी झटका लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूरे असम में 45341.98 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह से पानी में डूब चुकी है। खड़ी फसलें बर्बाद होने की वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिसका गहरा असर आने वाले समय में राज्य की खाद्य आपूर्ति और किसानों की आजीविका पर भी देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है कि राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों का बचपन और उनकी पढ़ाई इस प्राकृतिक आपदा के कारण बिल्कुल भी प्रभावित ना हो। सरकार ने सभी राहत शिविरों में बच्चों के लिए एक अनुकूल और सुरक्षित माहौल तैयार किया है। उनके लिए शांति से पढ़ाई करने और खेलने कूदने के लिए अलग से विशेष स्थान बनाए गए हैं, ताकि वे किसी भी तरह के मानसिक तनाव से दूर रह सकें और उनकी शिक्षा बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रह सके।
गृह मंत्री अमित शाह ने लिया स्थिति का जायजा
असम में बाढ़ की इस गंभीर और चिंताजनक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी पूरी तरह से सतर्कता के साथ काम कर रही है। देश के गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से दूरभाष पर लंबी बातचीत की और राज्य के मौजूदा हालात की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री शर्मा ने सामाजिक माध्यम मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि गृह मंत्री ने जमीनी स्थिति और चल रहे बचाव कार्यों की पूरी समीक्षा की है। अमित शाह ने केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता का पूरा भरोसा दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पूरी तरह से आश्वस्त किया है कि इस कठिन समय में राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के दोबारा निर्माण के लिए केंद्र की सभी एजेंसियां और सभी प्रकार के जरूरी संसाधन असम की जनता के लिए हर समय उपलब्ध रहेंगे। आपको बता दें कि यह दूसरी बार है जब गृह मंत्री ने इस अहम मुद्दे पर राज्य सरकार से सीधा संपर्क किया है, इससे पहले 23 जुलाई को भी उन्होंने अधिकारियों के साथ हालात का जायजा लिया था और जरूरी दिशा निर्देश जारी किए थे।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न: असम में वर्तमान में बाढ़ से कितने लोग और जिले प्रभावित हैं?
उत्तर: असम में बाढ़ के कारण 7 प्रमुख जिलों के 3.32 लाख से अधिक लोग बेहाल हैं और 622 गांव जलमग्न हैं।
प्रश्न: बाढ़ के इस मानसून सीजन में अब तक कुल कितने लोगों की जान जा चुकी है?
उत्तर: पिछले 24 घंटों में 7 और लोगों की मौत के साथ इस सीजन में मृतकों की कुल संख्या 75 हो गई है।
प्रश्न: राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए कितनी आर्थिक सहायता तय की है?
उत्तर: राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दी है।
प्रश्न: केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्री ने असम को क्या आश्वासन दिया है?
उत्तर: गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से बात कर राहत, बचाव और पुनर्वास के लिए केंद्र की सभी एजेंसियों और संसाधनों से पूरी मदद का भरोसा दिया है।
प्रश्न: राहत शिविरों में रह रहे बच्चों के लिए क्या विशेष कदम उठाए गए हैं?
उत्तर: मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के निर्देश पर राहत शिविरों में बच्चों की पढ़ाई और खेलने के लिए अलग से अनुकूल स्थान बनाए गए हैं।
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