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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान की चुनौती : होर्मुज की नाकाबंदी नाकाम, 90 करोड़ डॉलर का तेल लेकर निकले 34 टैंकर

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एजेंसी, नई दिल्ली। US Blockade : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण और सख्त नाकाबंदी के दावों को ईरानी बेड़े ने बड़ी चुनौती दी है। ट्रंप प्रशासन का कहना था कि जब तक ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक समुद्र के रास्ते होने वाला उसका व्यापार पूरी तरह ठप रहेगा। हालांकि, हालिया घटनाक्रम ने इन दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, क्योंकि ईरान से जुड़े दर्जनों जहाज अमेरिकी घेराबंदी को चकमा देकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ गए हैं।

अमेरिकी घेराबंदी को भेदकर निकले 34 जहाज

वित्तीय आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 34 टैंकर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, इनमें से 19 जहाजों ने खाड़ी क्षेत्र से बाहर का रुख किया है, जबकि 15 अन्य जहाज अरब सागर के रास्ते खाड़ी में प्रवेश कर ईरान की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों की गतिविधियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी निगरानी के बावजूद ईरान अपनी तेल आपूर्ति और व्यापारिक नेटवर्क को बहाल रखने में सक्षम है।

करोड़ों डॉलर के कच्चे तेल की सफल आपूर्ति

खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों में से कम से कम छह ऐसे टैंकरों की पुष्टि हुई है, जो भारी मात्रा में ईरानी कच्चा तेल लेकर जा रहे थे। अनुमान के मुताबिक, इन जहाजों पर लगभग 10.7 मिलियन बैरल तेल लदा था। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा कीमतों पर गौर किया जाए, तो इस खेप की कीमत लगभग 90 करोड़ डॉलर (910 मिलियन डॉलर) के करीब है। यह ईरान के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका ने 13 अप्रैल से ही ईरान के व्यापारिक रास्तों को ‘पूरी तरह से रोकने’ के उद्देश्य से घेराबंदी लागू की थी।

ट्रंप की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का संकेत दिया है, लेकिन वे समुद्री नाकाबंदी हटाने को तैयार नहीं हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उन सामानों की आपूर्ति रोकना है जिनका उपयोग युद्ध में किया जा सकता है। हालांकि, ‘फिनेंशियल टाइम्स’ और अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि कई जहाज अपने नेविगेशन सिस्टम को बंद करके इस घेराबंदी से निकलने में कामयाब रहे हैं। इस स्थिति ने पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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