केसी वेणुगोपाल

प्रधानमंत्री के खिलाफ कांग्रेस का विशेषाधिकार हनन नोटिस : सांसदों के वोट पर टिप्पणी को बताया नियमों का उल्लंघन

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। पीएम मोदी पर नोटिस : लोकसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री द्वारा ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में विपक्षी सांसदों के मतदान और उनकी मंशा पर उठाए गए सवालों को संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया है।

पीएम के संबोधन पर जताई आपत्ति

केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री ने अपने लगभग आधे घंटे के भाषण के दौरान विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल को रोकने का आरोप मढ़ा। उन्होंने सांसदों के वोट देने के तरीके और उनके फैसलों के पीछे की नीयत पर जो टिप्पणी की, वह नियमों के विरुद्ध है। कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि इस पूरे मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

विशेषाधिकार हनन नोटिस की प्रमुख दलीलें

लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कांग्रेस ने मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर जोर दिया है:

  • इस तरह के बयान चुने हुए जन प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और उनकी ईमानदारी पर प्रहार करते हैं, जिससे संसद की गरिमा कम होती है।

  • संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों, सांसदों के स्वतंत्र मतदान या उनके आचरण पर सवाल खड़ा नहीं कर सकता।

  • सदन के भीतर किसी सांसद के वोट देने के पीछे के कारणों पर टिप्पणी करना विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना है।

  • कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण बिल के नाम पर परिसीमन से जुड़े नियमों में बदलाव की कोशिश की जा रही थी, जिसका विरोध करना विपक्ष का अधिकार था।

कांग्रेस ने साधा तीखा निशाना

पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन देश को जोड़ने के बजाय राजनीतिक हमलों का केंद्र बन गया। उन्होंने दावा किया कि भाषण के दौरान 59 बार कांग्रेस को निशाना बनाया गया, जो प्रधानमंत्री के पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। बता दें कि 18 अप्रैल को अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों को ‘नारी शक्ति का अपराधी’ बताते हुए कहा था कि आधी आबादी का हक छीनने वालों को उनके पापों की सजा जरूर मिलेगी।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल जरूरी बहुमत न मिलने के कारण पास नहीं हो सका। इस बिल में लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।

क्या होता है विशेषाधिकार हनन?

संसद के सदस्यों और समितियों को सुरक्षित माहौल में काम करने के लिए कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं। यदि कोई व्यक्ति इन अधिकारों में बाधा डालता है या सांसदों के कार्य की अवमानना करता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सदन द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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