एजेंसी, सेंट पीटर्सबर्ग। India Russia : रूस और भारत की अटूट और ऐतिहासिक दोस्ती को लेकर वैश्विक मंच से एक बहुत ही बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ शब्दों में पश्चिमी देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनका देश भारत के साथ समय की हर कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे अपने मजबूत संबंधों को और ज्यादा व्यापक तथा गहरा बनाने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है। उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग शहर में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बेहद कड़े लहजे में जोर देकर कहा कि नई दिल्ली को रूस के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को कम करने के लिए मजबूर करने के अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के तमाम प्रयास पूरी तरह से बेकार साबित हुए हैं। पुतिन ने कहा कि इस तरह की जबरदस्ती करने वाली नीतियां न केवल नाकाम रहेंगी, बल्कि यह वर्तमान समय के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी ढांचे के लिए भी बेहद नुकसानदेह साबित होंगी।
💬 President #Putin:
The US is trying to pressure India on certain issues, including some aspects of cooperation with Russia.
But it should be clear to everyone by now: pressuring Prime Minister @narendramodi, who leads a country of 1.5 billion people, is 👉a futile exercise. pic.twitter.com/v2MlhpV34Z
— MFA Russia 🇷🇺 (@mfa_russia) June 5, 2026
रूसी राष्ट्रपति ने दुनिया की तमाम जानी-मानी और प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों के शीर्ष प्रमुखों के साथ एक विशेष और विस्तृत बातचीत के दौरान भारत की शानदार आर्थिक तरक्की और उसकी पूरी तरह से स्वतंत्र विदेश नीति की जमकर तारीफ की। उन्होंने बेहद गर्व के साथ कहा कि रूस किसी भी बाहरी दबाव की परवाह किए बिना नई दिल्ली के साथ अपने व्यापारिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों का विस्तार करने के लिए पूरी तरह से अडिग है। पश्चिमी देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं कर रहा है, जो कि उसकी वैश्विक मजबूती का सबसे बड़ा प्रमाण है।
विदेशी आर्थिक प्रतिबंधों की रणनीति पूरी तरह से फ्लॉप
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्थिक मोर्चे पर भारत की बढ़ती ताकत का लोहा मानते हुए कहा कि भारत आज के समय में दुनिया की सबसे प्रमुख और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। वर्तमान समय में भारत जिस प्रभावशाली और तेज रफ्तार के साथ आर्थिक विकास दर प्रदर्शित कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। उन्होंने पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच होने वाला आपसी द्विपक्षीय व्यापार आने वाले कुछ ही सालों के भीतर 100 अरब अमेरिकी डॉलर के विशाल ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पुतिन ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि रूस के साथ दोस्ती को सीमित करने और कच्चे तेल की खरीद को रोकने के लिए पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर जो लगातार दबाव बनाया जा रहा था, मॉस्को ने उसका कोई भी नकारात्मक या विपरीत परिणाम नहीं देखा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसी ताकतों की इस तरह की डराने-धमकाने वाली राजनैतिक रणनीति का हमेशा उल्टा असर होना बिल्कुल तय है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पूरी दुनिया यह अच्छी तरह से समझ चुकी है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व वाले एक मजबूत भारत पर किसी भी प्रकार का अनुचित दबाव डालना पूरी तरह से नामुमकिन है। यह दबाव चाहे दुनिया के किसी भी कोने या शक्तिशाली देश की तरफ से क्यों न आ रहा हो, भारत केवल अपने देश के नागरिकों के हित में ही फैसले लेता है।
अमेरिका संग मजबूत रिश्तों से रूस को कोई आपत्ति नहीं
रूसी राष्ट्रपति के ये बेहद तीखे और बेबाक बयान ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में खरीदे जा रहे कच्चे तेल को लेकर लगातार अपनी चिंताएं और आपत्तियां जता रहे थे। अमेरिका बार-बार भारत से रूसी तेल की खरीद में कटौती करने की सार्वजनिक अपील भी करता रहा है। इन सभी बातों का जवाब देते हुए पुतिन ने स्पष्ट किया कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों को हमेशा सबसे ऊपर रखना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती हुई राजनयिक और व्यापारिक भागीदारी से रूस को कोई असुरक्षा नहीं है और न ही यह जुड़ाव रूस-भारत के पुराने और परखे हुए रिश्तों में किसी तरह की बाधा डालता है।
जब पुतिन से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी से रूस को किसी तरह की कोई बेचैनी या असहजता महसूस होती है, तो उन्होंने बेहद सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि हमें इस बात की बेहद खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध बहुत अच्छे ढंग से विकसित कर रहा है, जिन्हें वह अपने देश की प्रगति के लिए जरूरी और महत्वपूर्ण समझता है। रूस भारत को एक बेहद विश्वसनीय और वफादार साझेदार मानता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा और महान लोकतंत्र है और रूस उसके इस दर्जे का पूरा सम्मान करते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर विस्तार करता रहेगा।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संकट पर पुतिन का रुख
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और यूक्रेन के साथ चल रहे लंबे सैन्य संघर्ष से जुड़े एक बेहद अहम सवाल का जवाब देते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस हमेशा से ही इस पूरी समस्या के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान के लिए पूरी तरह तैयार रहा है। उन्होंने कहा कि असली चुनौती अब यूक्रेन की राजधानी कीव के शासकों को इस शांति वार्ता के लिए राजी करने की है। इसके साथ ही उन्होंने इस विचार को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि यूरोपीय संघ के देश इस मामले में किसी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। पुतिन ने नसीहत दी कि यूरोपीय देश यूक्रेन को विनाशकारी हथियार मुहैया कराना तुरंत बंद करें और उसे एक व्यावहारिक समझौते के लिए राजी करके इस संघर्ष को समाप्त करने में मदद करें।
पुतिन ने यूक्रेन संकट को एक स्थानीय सीमाई मुद्दा बताया, जबकि इसके मुकाबले ईरान और पश्चिम एशिया के तनाव को एक बड़ा वैश्विक संकट करार दिया। उन्होंने पश्चिमी ताकतों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि रूस आखिरकार उन लोगों पर कैसे भरोसा कर सकता है जो बीते कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मॉस्को को रणनीतिक रूप से पूरी तरह पराजित करने और बर्बाद करने का नारा बुलंद करते आ रहे हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस पश्चिम एशिया के इलाके में जारी भारी तनाव को कम करने और वहां शांति स्थापित करने में योगदान देने वाले हर एक वैश्विक निर्णय का पूरी तरह से समर्थन करने के लिए मुस्तैद है। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के कार्यकाल की समाप्ति का हवाला देते हुए उनके पद की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
भारत, चीन और पाकिस्तान के त्रिकोणीय रिश्तों पर बड़ी बात
एशिया महाद्वीप के नाजुक राजनैतिक समीकरणों और विशेष रूप से भारत तथा चीन के बीच जारी सीमा विवाद को लेकर भी पुतिन ने अपनी राय खुलकर सामने रखी। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत और चीन के बीच के इन नाजुक द्विपक्षीय मामलों में रूस अपनी तरफ से किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप या दखलंदाजी नहीं करेगा। पुतिन ने पूरा विश्वास जताया कि भारत और चीन दोनों ही बड़े और समझदार राष्ट्र हैं और वे अपने पुराने सीमा विवादों को पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए आपस में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों ही बड़े नेता इन संवेदनशील मामलों को बातचीत के जरिए हल करने की इच्छाशक्ति रखते हैं।
गौरतलब है कि साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में एक बहुत ही गंभीर सैन्य गतिरोध पैदा हो गया था, जिसे दूर करने और द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए पिछले एक साल के दौरान दोनों देशों की तरफ से कई सकारात्मक और कूटनीतिक कदम उठाए गए हैं। पुतिन ने एशिया में रूस के रणनीतिक संतुलन को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत और चीन दोनों के ही साथ रूस की दोस्ती दशकों पुरानी और स्वाभाविक है और ये दोनों रिश्ते पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। इसका मतलब यह है कि भारत के साथ रूस की बढ़ती हुई घनिष्ठता कभी भी चीन की कीमत पर नहीं है, और ठीक इसी तरह चीन के साथ रूस का गहरा गठजोड़ भारत के साथ उसके संबंधों को रत्ती भर भी प्रभावित नहीं करता है।
इसके साथ ही उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच के तनावपूर्ण रिश्तों पर भी अपनी बात रखी। पुतिन ने माना कि वे दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि पाकिस्तान देश पूरी तरह से चीन के इशारों या उसके नियंत्रण में काम कर रहा है। पुतिन का मानना है कि पाकिस्तान खुद में एक बहुत बड़ा और संप्रभु देश है, जिसके दुनिया के कई अन्य मुल्कों के साथ अपने बहुआयामी और स्वतंत्र संबंध हैं, इसलिए उसे किसी का पिछलग्गू कहना पूरी तरह गलत होगा।
सुखोई और ब्रह्मोस तकनीक पर मिलकर काम करेंगे भारत-रूस
द्विपक्षीय रक्षा और सैन्य संबंधों की मजबूती का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से बनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल निर्माण और उसके उत्पादन का एक शानदार उदाहरण दिया। इस रक्षा सहयोग को एक नए और आधुनिक स्तर पर ले जाने का संकेत देते हुए उन्होंने बताया कि रूस ने अब भारतीय सेना और सरकार को पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक सुखोई-57 (एसयू-57) लड़ाकू विमान के निर्माण पर पूरी तरह से संयुक्त रूप से काम करने का एक बेहद बड़ा और आकर्षक प्रस्ताव दिया है। ज्ञात हो कि भारत इस समय अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए पांचवीं पीढ़ी के आधुनिक लड़ाकू विमानों की एक बड़ी खेप खरीदने की रक्षा प्रक्रिया में सक्रियता से जुटा हुआ है।
रूसी राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र के इस महाप्रस्ताव की पुष्टि करते हुए कहा कि हमने अपने भारतीय मित्रों को दुनिया की सबसे बेहतरीन पांचवीं पीढ़ी की सैन्य विमान तकनीक पर मिलकर काम करने और उसे साझा करने की पेशकश की है। रूस इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में भारत को हर तरह से लड़ाकू विमान और साजो-सामान उपलब्ध कराने के लिए उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने को तैयार है। उन्होंने अंत में भरोसा दिलाया कि उनका देश भारत की सैन्य जरूरतों को समझते हुए उसे दुनिया के सबसे प्रमुख रक्षा मंचों, आधुनिक हथियारों और अत्यंत गोपनीय तथा महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों को सीधे हस्तांतरित करने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा।
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