एजेंसी, नई दिल्ली। Foreigners Deportation SC : विदेशी नागरिकों के निर्वासन को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने सर्वोच्च अदालत के समक्ष यह रुख साफ किया है कि किसी भी विदेशी नागरिक को उसके मूल देश में तब तक वापस नहीं भेजा जा सकता, जब तक उसकी राष्ट्रीयता की पूरी तरह से पुष्टि न हो जाए और संबंधित देश उसे स्वीकार करने के लिए आधिकारिक रूप से अपनी सहमति न दे दे। केंद्र सरकार का यह जवाब असम में विदेशी घोषित किए गए ऐसे व्यक्तियों से जुड़ी एक याचिका पर आया है, जिन्हें उनके मूल देश में निर्वासन की संभावना न होने के बावजूद अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखे जाने को चुनौती दी गई थी।
Foreign National Can’t Be Deported Without Acceptance By Home Country, Union Tells Supreme Court#SupremeCourt https://t.co/gYOQm1ImpT
— Live Law (@LiveLawIndia) August 1, 2026
राष्ट्रीयता का सत्यापन और निर्वासन के लिए अनिवार्य शर्तें
गृह मंत्रालय द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, किसी भी विदेशी नागरिक को उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया एक स्थापित और सख्त नियमों के तहत ही पूरी की जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्वासन केवल तभी संभव है जब संबंधित व्यक्ति की राष्ट्रीयता का पूरी तरह से सत्यापन हो चुका हो। इसके साथ ही उस व्यक्ति के पास वैध यात्रा दस्तावेज मौजूद होना अनिवार्य है और उसके मूल देश की सरकार द्वारा उसे अपने नागरिक के रूप में स्वीकार करने की आधिकारिक स्वीकृति मिलना आवश्यक है। केंद्र सरकार के मुताबिक इन शर्तों के पूरा हुए बिना किसी को भी निर्वासित करना व्यावहारिक और कानूनी रूप से संभव नहीं है।
विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय और कानूनी कार्यवाही से जुड़े नियम
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में निर्वासन से पहले की जाने वाली अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि संबंधित राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय केवल उन्हीं विदेशी नागरिकों को निर्वासित करने की कार्रवाई कर सकते हैं जिनकी सजा पूरी हो चुकी हो या जिनके खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही समाप्त हो चुकी हो। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ देश की किसी भी अदालत में कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित न चल रहा हो।
संबंधित दूतावास से संपर्क और यात्रा दस्तावेजों की व्यवस्था
गृह मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से संपर्क स्थापित किया जाता है। दूतावास के जरिए उस व्यक्ति के नागरिक होने का सत्यापन कराया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात ही संबंधित दूतावास की ओर से आवश्यक यात्रा दस्तावेज जारी किए जाते हैं। इन आधिकारिक दस्तावेजों के मिलने के बाद ही निर्वासन की अंतिम प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: विदेशी नागरिकों के निर्वासन के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने किस अदालत में अपना जवाब प्रस्तुत किया?
उत्तर: केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में अपना हलफनामा प्रस्तुत किया।
प्रश्न 2: केंद्र सरकार के अनुसार किसी भी विदेशी नागरिक को वापस भेजने के लिए सबसे पहली शर्त क्या है?
उत्तर: निर्वासन के लिए सबसे पहली शर्त संबंधित व्यक्ति की राष्ट्रीयता का पूरी तरह से सत्यापन होना है।
प्रश्न 3: विदेशी नागरिक को निर्वासित करने के लिए किस देश की आधिकारिक अनुमति अनिवार्य है?
उत्तर: उस विदेशी व्यक्ति के मूल देश की सरकार द्वारा उसे स्वीकार करने की आधिकारिक सहमति अनिवार्य है।
प्रश्न 4: निर्वासन की अंतिम प्रक्रिया शुरू करने से पहले किस प्रकार के दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: निर्वासन के लिए संबंधित देश के दूतावास से प्राप्त वैध यात्रा दस्तावेजों का होना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 5: सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा यह मामला किस राज्य में हिरासत में रखे गए विदेशियों से जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला असम राज्य में विदेशी घोषित किए गए लोगों को हिरासत केंद्रों में रखे जाने से जुड़ा है।
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