Sonam Wangchuk

सीजेपी प्रदर्शन मामला : दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को भेजा नोटिस, अनशन के बीच सोनम वांगचुक ने सरकार से वार्ता के लिए रखीं 3 शर्तें

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Sonam Wangchuk Fast 3 Demands : कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा परीक्षा धांधली के खिलाफ आयोजित संसद मार्च के दौरान हुए उग्र पुलिस लाठीचार्ज और सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने के संवेदनशील मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से घटना से जुड़े सभी पुलिस बॉडी कैमरा और आसपास के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, गतिरोध दूर करने के लिए सीजेपी ने केंद्र सरकार से वार्ता हेतु नए स्थान की शर्त रखी है, वहीं अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख मांगें सामने रख दी हैं

दिल्ली उच्च न्यायालय का सख्त निर्देश और याचिकाकर्ताओं की गंभीर दलीलें

उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ वकीलों ने पुलिस की बर्बरता पर गंभीर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और विकास सिंह ने पीठ को बताया कि छात्र करीब 20 दिनों से जंतर-मंतर पर पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व चेतावनी या उद्घोषणा के निहत्थे छात्रों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया, जिसमें 90 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। वकीलों ने यह सनसनीखेज दावा भी किया कि पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई लाठियों में कीलें लगी हुई थीं और प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ बदसलूकी की गई। उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पुलिस साक्ष्यों को संरक्षित रखने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर तय की है

सीजेपी ने बातचीत के लिए रखी नई शर्त, नेताओं के घर जाने से इनकार

आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार के साथ आगे की बातचीत को लेकर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा की है कि वे सरकार से वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन अब किसी भी मंत्री या नेता के निजी आवास या कार्यालय में बैठक नहीं होगी। सीजेपी ने शर्त रखी है कि यदि सरकार संवाद चाहती है, तो बैठक सार्वजनिक और तटस्थ स्थान जैसे जंतर-मंतर या कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की जाए। इससे पहले सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की करीब 2 घंटे वार्ता हुई थी, जहां आशुतोष रांका और सौरव दास ने अपना मांग पत्र सौंपा था। हालांकि, पार्टी का कहना है कि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है

अस्पताल से सोनम वांगचुक का पत्र, अनशन तोड़ने के लिए रखीं तीन शर्तें

प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक पत्र भेजकर अनशन समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है, परंतु इसके लिए तीन मुख्य शर्तें तय की हैं। वांगचुक ने मांग की है कि कथित प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा अनियमतताओं के कारण तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर संसद में तुरंत विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा दें

गतिरोध खत्म करने की कोशिशें जारी, प्रदर्शन पर अड़े छात्र

सोमवार को हुए संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा दागे गए आंसू गैस के गोलों और लाठीचार्ज के बाद से स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सीजेपी नेताओं से संपर्क कर बातचीत के जरिए रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं छात्र संगठन अपनी मांगों पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। सीजेपी नेताओं का कहना है कि वे किसी भी विवाद का हल संवाद से ही चाहते हैं, लेकिन सरकार को पारदर्शिता बरतनी होगी। जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और नैतिक जिम्मेदारी के तहत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन अनवरत जारी रहेगा

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