Student Protest SC

जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई मामले में सुप्रीम कोर्ट का तत्काल सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले- अदालत का समय बर्बाद न करें

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Jantar Mantar Student Protest SC : देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के उग्र प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के संवेदनशील मामले पर उच्चतम न्यायालय ने किसी भी प्रकार का तत्काल हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। संसद भवन की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर त्वरित सुनवाई की गुहार लगाई गई थी। हालांकि, भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका का ध्यान मुख्य मुद्दों पर है और इस तरह के मामलों में याचिकाकर्ता को अदालती प्रक्रिया का समय नष्ट नहीं करना चाहिए।

तीन जजों की विशेष पीठ के समक्ष रखा गया था मामला

शीर्ष अदालत में यह मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की सदस्यता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष उल्लेखित किया गया था। सुनवाई की शुरुआत में ही याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील ने मध्य दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस बर्बरता का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। वकील ने पीठ को अवगत कराया कि उनके पास घटना से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य और वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं, जो पुलिस की अत्यधिक सख्ती और अन्याय को साबित करते हैं। इस आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर तुरंत सुनवाई करने तथा तीन प्रमुख मांगों पर विचार करने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

वीडियो फुटेज देखने से सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट मनाही

याचिकाकर्ता के वकील द्वारा पुलिस लाठीचार्ज के वीडियो फुटेज देखने के बार-बार किए गए अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने बेहद कड़ा रुख दिखाया। पीठ ने दोटूक शब्दों में कहा कि अदालत इस चरण पर किसी भी तरह का वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं रखती है और न ही उनके पास इन साक्ष्यों को देखने का अतिरिक्त समय मौजूद है। जब वकील ने पुनः छात्रों की पिटाई और उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए जल्द निर्देश देने की मांग की, तो मुख्य न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अदालत का कीमती समय बर्बाद न करें। पीठ का मानना था कि परीक्षा में कथित धांधली और सुधारों से जुड़ा मूल विषय पहले से ही न्यायपालिका के समक्ष विचाराधीन है।

संसद भवन मार्च के दौरान बिगड़े थे हालात

यह पूरी याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन आयोजित एक विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों पर आधारित है। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आयोजित इस संसद मार्च में हजारों की संख्या में छात्र और युवा मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्रित हुए थे। प्रदर्शनकारी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे और उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा थी। संसद भवन की ओर बढ़ते जनसैलाब को रोकने के दौरान स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद बढ़ा विवाद

जंतर-मंतर से संसद की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी धक्का-मुक्की तथा तीखी झड़प देखने को मिली। भीड़ को तितर-बितर करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें लाठीचार्ज के साथ-साथ आंसू गैस के गोले भी दागे गए थे। इसी पुलिसिया कार्रवाई को असंवैधानिक और बर्बर करार देते हुए याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, शीर्ष अदालत द्वारा याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद अब प्रदर्शनकारियों को नियमित कानूनी प्रक्रियाओं का ही सहारा लेना पड़ेगा।

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