RG Kar Case

कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : आरजीकर मामले की दोबारा जांच के लिए सीबीआई की नई एसआईटी गठित

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एजेंसी, कोलकाता। RG Kar Case Update : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बहुचर्चित आरजीकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेप-मर्डर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले को रफा-दफा करने और सबूतों को दबाने के गंभीर आरोपों की नए सिरे से जांच करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। इसके लिए हाईकोर्ट ने सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के पूर्वी क्षेत्र के जॉइंट डायरेक्टर की अगुवाई में एक विशेष तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन करने का निर्देश दिया है। माननीय न्यायालय ने इस नई जांच टीम को सख्त हिदायत दी है कि वे घटना वाली उस खौफनाक रात के पूरे घटनाक्रम की दोबारा से गहन छानबीन करें। कोर्ट ने सीबीआई को पूरी छूट देते हुए साफ कहा है कि इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए यदि आवश्यक हो, तो वे किसी भी रसूखदार या संदिग्ध व्यक्ति से दोबारा पूछताछ कर सकते हैं। इस नवगठित एसआईटी को आगामी 25 जून तक अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।

पीड़ित माता-पिता की याचिका पर आया फैसला, सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट

यह महत्वपूर्ण आदेश आरजीकर अस्पताल की मृत ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता द्वारा दायर की गई एक विशेष याचिका पर आया है। पिछले साल 17 मार्च को पीड़ित परिवार ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। माता-पिता ने आरोप लगाया था कि सीबीआई इस मामले की सही दिशा में जांच नहीं कर रही है और मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने तथा पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में जब परिवार ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की विशेष अनुमति प्रदान की थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान आज पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ, जो अब पानीहाटी क्षेत्र से भाजपा की नवनिर्वाचित विधायक बन चुकी हैं, खुद अदालत कक्ष में मौजूद रहीं।

आरजीकर कांड का काला इतिहास, जब देश भर में गूंजी थी इंसाफ की आवाज

गौरतलब है कि कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 8 और 9 अगस्त 2024 की दरमियानी रात को एक युवा ट्रेनी डॉक्टर के साथ बर्बरतापूर्वक रेप और मर्डर की रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई थी। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल से बेहद संदेहास्पद स्थिति में बरामद हुआ था। इस क्रूरतम घटना को लेकर कोलकाता सहित पूरे देश में न्याय की मांग को लेकर उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण दो महीने से भी अधिक समय तक पूरी स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई थीं। इस मामले में मुख्य आरोपी संजय रॉय को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टूटे हुए ब्लूटूथ इयरफोन के आधार पर 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी, जिसके बाद सियालदह सेशंस कोर्ट ने 20 जनवरी 2025 को आरोपी संजय रॉय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

ब्लूटूथ इयरफोन और डीएनए रिपोर्ट से सलाखों के पीछे पहुंचा था हत्यारा संजय रॉय

इस पूरे मामले के खुलासे में वैज्ञानिक और तकनीकी सबूत सबसे बड़े हथियार साबित हुए थे। पुलिस टास्क फोर्स ने जांच शुरू करने के मात्र 6 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी संजय रॉय को दबोच लिया था। घटनास्थल यानी सेमिनार हॉल से पुलिस को एक टूटा हुआ ब्लूटूथ इयरफोन मिला था, जो वैज्ञानिक जांच के दौरान सीधे आरोपी संजय रॉय के मोबाइल फोन से कनेक्ट हो गया था। इसके अलावा फोरेंसिक जांच में संजय की जींस और जूतों पर मृत पीड़िता के खून के गहरे निशान पाए गए थे। सबसे बड़ा पुख्ता सबूत आरोपी का डीएनए था, जो घटना स्थल पर मिले जैविक साक्ष्यों से पूरी तरह मैच हो गया था। गिरफ्तारी के वक्त संजय के शरीर पर चोट के 5 ताजा निशान भी मिले थे, जो यह साबित करते थे कि पीड़ित डॉक्टर ने खुद को बचाने के लिए उस पर तीखा पलटवार किया था।

मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल को मिली जमानत, जांच पर उठे सवाल

सीबीआई की शुरुआती जांच पर सवाल उठने की एक मुख्य वजह मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को मिली बड़ी राहत भी रही। हालांकि संजय रॉय के अलावा सीबीआई ने आरजीकर कॉलेज के तत्कालीन विवादित प्रिंसिपल संदीप घोष और कोलकाता पुलिस के अभिजित मंडल सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था। लेकिन सीबीआई निर्धारित 90 दिनों की वैधानिक समय सीमा के भीतर संदीप घोष के खिलाफ ठोस चार्जशीट दाखिल करने में पूरी तरह नाकाम रही। इस बड़ी लापरवाही का फायदा उठाकर सियालदह कोर्ट ने पिछले साल 13 दिसंबर को संदीप घोष को इस मामले में तकनीकी रूप से जमानत दे दी थी, हालांकि घोष भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में अब भी जेल में बंद हैं। इसी तरह के लचर रवैये और मामले को रफा-दफा करने की कोशिशों के बाद ही पीड़ित परिवार को दोबारा अदालत की शरण में जाना पड़ा, जिसके बाद अब हाईकोर्ट ने सीबीआई को अपनी पूरी ताकत से दोबारा निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है।

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