एजेंसी, भोपाल। MP Education News : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में युगांतकारी बदलावों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई महत्वाकांक्षी ‘शिक्षा घर योजना’ को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इस योजना के तहत उन छात्र-छात्राओं को दोबारा पढ़ाई पूरी करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, जिन्होंने किसी कारणवश 8वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित होने वाली यह योजना मध्यप्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में लागू की जाएगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि आगामी 16 जून से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी प्रशासनिक और भौतिक तैयारियां अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाएं।
आज स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा कर वरिष्ठ अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा के लिए शालाओं में कृषि, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, एआई एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं… pic.twitter.com/yC0CJDPZeW
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 21, 2026
पाठ्यक्रम में शामिल होगा गौरवशाली इतिहास, गुरु सांदीपनि पर तैयार होगी पुस्तक
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम (सिलेबस) में राज्य सरकार ऐतिहासिक और सांस्कृतिक बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि महान शासक सम्राट वीर विक्रमादित्य की गौरवशाली जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। इसके साथ ही, भगवान श्रीकृष्ण के शिक्षा केंद्र को रेखांकित करते हुए उनके गुरु महर्षि सांदीपनि के पावन जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित एक बेहद रोचक व ज्ञानवर्धक पुस्तक तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अत्याधुनिक ‘सांदीपनि विद्यालयों’ के माध्यम से प्रदेश के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा देकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की एक बेहद मजबूत नींव तैयार कर रही है।
शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूल होंगे सम्मानित, पूर्व छात्रों का लिया जाएगा सहयोग
शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के जिन स्कूलों ने बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत (100%) रिजल्ट दिया है, उन्हें सार्वजनिक मंच पर राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश के ऐसे 26 शासकीय स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां के सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इसके साथ ही 90 से 95 प्रतिशत तक परिणाम लाने वाली संस्थाओं को भी इस सम्मान सूची में जोड़ा जाएगा। स्कूलों के विकास और विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ने सभी विद्यालयों में ‘पूर्व छात्र-छात्रा सम्मेलन’ आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि पुराने विद्यार्थी अपनी मातृभूमि और स्कूल के प्रति भावनात्मक रूप से जुड़कर उसके भौतिक विकास में अपना योगदान दे सकें।
रोजगारपरक शिक्षा पर जोर, कक्षा 8वीं से 12वीं तक जुड़ेगा एआई का कौशल
बदलते दौर की तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूली स्तर पर ही व्यावसायिक और कौशल विकास प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे सीधे रोजगार देने वाले पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराई जाए। इसके साथ ही कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) के कौशल को जोड़ने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। स्कूलों में एनसीसी और एनएसएस जैसी सामाजिक संस्थाओं को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने और ड्राइविंग लाइसेंस कैंप आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकार 12वीं के बाद छात्रों की ट्रैकिंग भी करेगी ताकि पता चल सके कि वे उच्च शिक्षा, पैतृक व्यवसाय या रोजगार में से कहां जा रहे हैं, जिससे युवाओं का एक सटीक डेटाबेस तैयार होगा।
अतिथि शिक्षकों की भर्ती 1 जुलाई से पहले, शासकीय स्कूलों में नामांकन दर में ऐतिहासिक उछाल
विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ किया कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया आगामी 1 जुलाई से पहले हर हाल में पूरी कर ली जाए। इसके साथ ही 1 जुलाई से लेकर गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) तक पूरे प्रदेश के स्कूलों में जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों की उपस्थिति में ‘शिक्षक वंदना कार्यक्रम’ धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। बैठक में शिक्षा सचिव ने एक बेहद उत्साहजनक डेटा साझा करते हुए बताया कि सरकार के प्रयासों से शासकीय स्कूलों में बच्चों के नामांकन में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में कक्षा पहली में रिकॉर्ड 32.4 प्रतिशत और कक्षा 9वीं से 12वीं में 4.25 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, प्रदेश के राजगढ़ और नरसिंहपुर जिलों में नए ‘संस्कृति विद्यालयों’ की शुरुआत भी की गई है।
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