एजेंसी, नई दिल्ली। PM Modi Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 134वीं कड़ी के जरिए देश की जनता को संबोधित किया। इस संबोधन में उन्होंने खेल, संस्कृति, पर्यावरण और जल संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों में समाज और देश के हित में काम कर रहे नागरिकों के प्रयासों की जमकर सराहना की और उन्हें पूरे देश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया।
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— Narendra Modi (@narendramodi) May 31, 2026
एथलेटिक्स में भारत की ऐतिहासिक कामयाबी और नेशनल रिकॉर्ड
संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पिटिशन का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस बड़े खेल आयोजन में देश के कोने-कोने से आए लगभग 800 एथलीट्स ने अपनी किस्मत आजमाई। इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें चार अलग-अलग स्पर्धाओं में देश के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट गए। रिकॉर्ड तोड़ने वाले खिलाड़ियों में गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार जैसे होनहार नाम शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से पुरुषों की 100 मीटर रेस की चर्चा की, जिसने पूरे खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा। महज दो दिनों के अंतराल में इस स्पर्धा में राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तीन बार ध्वस्त किया गया। यह अद्भुत कारनामा गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर की जोड़ी ने कर दिखाया। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक सफलता को लेकर इन दोनों धावकों से फोन पर सीधी बातचीत भी की और उनकी खेल भावना को सराहा।
धावकों के संघर्ष और उनकी खेल भावना की अद्भुत कहानी
छत्तीसगढ़ के रहने वाले और वर्तमान में ओडिशा की तरफ से खेलने वाले धावक अनिमेष कुजूर ने बातचीत में बताया कि वह पहले फुटबॉल खेला करते थे। कोविड महामारी के दौर में जब पाबंदियां थीं, तब उनके माता-पिता ने उन्हें बाहर दौड़ने की अनुमति दी। महामारी खत्म होने पर दोस्तों के कहने पर उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहाँ से उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर हो गया। अनिमेष ने बताया कि लोग अक्सर कहते थे कि भारतीयों के जींस ऐसे नहीं होते कि वे 100 मीटर जैसी तेज दौड़ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकें, लेकिन उन्होंने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है। वहीं इंडियन नेवी में पेट्टी ऑफिसर के पद पर तैनात गुरिंदरवीर सिंह ने बताया कि वह देश के सबसे तेज स्प्रिंटर बन चुके हैं और उन्होंने 10.09 सेकंड का नया रिकॉर्ड बनाया है। गुरिंदरवीर के पिता और दादा भी खेलों से जुड़े थे। उन्होंने बताया कि बचपन में वह अपने पिता के मेडल्स और ट्रॉफी साफ करते हुए बड़े हुए, जिससे उन्हें दौड़ने की प्रेरणा मिली। जब उन्होंने 100 मीटर रेस को अपने करियर के रूप में चुना, तो कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया कि यह स्पर्धा भारतीयों के लिए नहीं बनी है। लेकिन उनके पिता ने उन पर पूरा भरोसा जताया और उसी भरोसे के दम पर आज उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
भीषण गर्मी में बचाव और पारंपरिक देसी पेय पदार्थों का महत्व
प्रधानमंत्री ने देश के कई हिस्सों में पड़ रही अत्यधिक गर्मी और चिलचिलाती धूप को लेकर देशवासियों को सचेत किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभागों द्वारा जारी की जाने वाली गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और दोपहर की तेज धूप में निकलने से बचें। गर्मी से निपटने के पारंपरिक तरीकों का जिक्र करते हुए उन्होंने भारतीय रसोई की तारीफ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के अलग-अलग राज्यों में गर्मी से राहत पाने के लिए बेहतरीन देसी पेय पदार्थ मौजूद हैं। उत्तर भारत में आम पन्ना, पंजाब और हरियाणा में मिलने वाली लस्सी, राजस्थान और गुजरात की छाछ, और बिहार, झारखंड तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश का सत्तू का शरबत इसके बेहतरीन उदाहरण हैं। इसी तरह कोंकण और गोवा में कोकम शरबत और सोल कढ़ी, दक्षिण भारत में पानकम और सम्बारम तथा ओडिशा में बेल पना जैसी पारंपरिक चीजें पीढ़ियों के अनुभव का निचोड़ हैं। इनमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की सुंदर झलक देखने को मिलती है।
भारतीय आमों की अनूठी विविधता और ग्लोबल मार्केट में धूम
गर्मियों के मौसम में आम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहाँ इस फल की बात न होती हो। भारत के हर क्षेत्र का अपना एक खास आम है, जिसका स्वाद और खुशबू लाजवाब है। उन्होंने महाराष्ट्र के हापुस (अल्फांसो), गुजरात के केसर, उत्तर प्रदेश के दशहरी, बिहार के जर्दालू और मालदा के साथ-साथ काशी के प्रसिद्ध लंगड़ा आम का नाम लिया। दक्षिण भारत के बंगनपल्ली, तोतापुरी और बंगाल के हिमसागर जैसे आमों की विविधता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत के आमों का स्वाद केवल घरेलू बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों से निकलकर ग्लोबल मार्केट तक पहुँच रहा है। उन्होंने देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आम की बागवानी करने वाले तमाम किसान भाई-बहनों की कड़ी मेहनत की सराहना की।
साजी वलाशेरिल का अनोखा स्विमिंग क्लब
केरल के आलुवा से सामने आई एक अनोखी कहानी को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने साजी वलाशेरिल नामक व्यक्ति के प्रयासों की सराहना की। साजी एक ऐसा स्विमिंग क्लब चलाते हैं जहाँ बिना किसी फीस, बड़ी बिल्डिंग या क्लासरूम के, सीधे नदी में तैराकी सिखाई जाती है। इस अनोखे स्कूल में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी तैरना सीख रहे हैं और अब तक 15 हजार से अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। साजी जी ने विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों को भी तैराकी में पारंगत किया है। इस मानवीय कार्य की शुरुआत के पीछे एक बेहद दुखद घटना जुड़ी थी। कुछ साल पहले एक नाव दुर्घटना में कई स्कूली छात्रों की डूबने से मौत हो गई थी, जिसने साजी जी को अंदर तक हिला दिया। उन्होंने संकल्प लिया कि वह बच्चों को तैराकी सिखाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं के कारण किसी की जान न जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज सेवा के लिए बहुत बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि एक नेक इरादा और निरंतर प्रयास ही काफी होता.।
चोला साम्राज्य की प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं की भारत वापसी
प्रधानमंत्री ने अपनी हालिया नीदरलैंड्स यात्रा का जिक्र करते हुए एक ऐतिहासिक क्षण को साझा किया, जिसने हर भारतीय को गौरव की अनुभूति कराई। नीदरलैंड्स में आयोजित एक विशेष आधिकारिक समारोह के दौरान चोला राजवंश के काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंप दी गईं। इस अवसर पर वहाँ के प्रधानमंत्री भी उपस्थित थे। इन धरोहरों की वापसी से विशेष रूप से दुनिया भर के तमिल समुदाय में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इन ऐतिहासिक पट्टिकाओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इनमें 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्र पट्टिकाएं शामिल हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने और आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार के लिए दान में देने से संबंधित हैं। इन अभिलेखों से चोला साम्राज्य की अद्भुत समुद्री ताकत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि होती है।
छत्तीसगढ़ के मल्हार में दुर्लभ पांडुवंशी अभिलेखों की खोज
सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में सरकार के ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ की सफलता की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के मल्हार नामक स्थान पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज हुई है। यहाँ खुदाई और शोध के दौरान तीन अत्यंत दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं प्राप्त हुई हैं। विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि ये ताम्र पट्टिकाएं पांडुवंशी राजवंश के शासक महर्षि बालार्जुन के शासनकाल की हैं, जो लगभग छठी या सातवीं सदी यानी आज से तकरीबन चौदह-सौ या पंद्रह-सौ साल पुरानी हैं। प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखे गए इन अभिलेखों से उस दौर की बेहतरीन शासन-व्यवस्था, सामाजिक धार्मिक ताने-बाने और समृद्ध संस्कृति के बारे में बेहद महत्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारियां प्राप्त होती हैं।
युवाओं में एस्ट्रोनॉमी का बढ़ता क्रेज और खगोल विज्ञान क्लब
भारत में खगोल विज्ञान के प्रति प्राचीन काल से चले आ रहे आकर्षण की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में सदियों पुरानी वेधशालाएं आज भी मौजूद हैं, जहाँ गणितीय और खगोलीय खोजें की गईं। आज देश के युवाओं में इस विज्ञान को लेकर एक नया उत्साह देखा जा रहा है और देशभर में एस्ट्रोनॉमी क्लब्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने बैंगलोर एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी का उदाहरण दिया, जो ग्रामीण क्षेत्रों में खगोल विज्ञान को बढ़ावा देने का सराहनीय काम कर रही है। इसी तरह ‘खगोल मण्डल’ टीम द्वारा तैयार किए गए इनोवेटिव कोर्स, केरल की ‘एस्ट्रो केरला’ संस्था द्वारा आयोजित किए जाने वाले नाइट ऑब्जर्वेशन कैंप्स, और राजकोट के ‘बिग बैंग एस्ट्रोनॉमी क्लब’ द्वारा गिर के जंगलों से लेकर कच्छ के रण तक आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की उन्होंने तारीफ की। प्रधानमंत्री ने पुणे की ‘ज्योतिर्विद्या परिसंस्था’ और छात्रों द्वारा संचालित ‘आईसैक’ नेटवर्क का भी विशेष उल्लेख किया और युवाओं से छुट्टियों में तारामंडल (प्लेनेटेरियम) घूमने जाने का आग्रह किया।
देश की पहली गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन
पर्यावरण और जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश से आई एक बेहद सुखद खबर को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने एक वीडियो का जिक्र किया, जिसमें एक गंगा डॉल्फिन को बचाने का रेस्क्यू ऑपरेशन दिखाया गया था। उत्तर प्रदेश की एक नहर में फंसी इस डॉल्फिन को बचाने में रेस्क्यू टीम को पूरे 13 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस पूरे जीवन रक्षक ऑपरेशन में ‘नमामि गंगे अभियान’ के तहत तैयार की गई भारत की पहली ‘गंगा डॉल्फिन रेस्क्यू एंबुलेंस’ ने मुख्य भूमिका निभाई। इस एंबुलेंस को एक चलते-फिरते आधुनिक अस्पताल की तरह डिजाइन किया गया है, जिसमें डॉल्फिन को पानी से बाहर भी सुरक्षित रखने के लिए विशेष स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलेंडर और मेडिकल उपकरण मौजूद हैं। डॉल्फिन का सुरक्षित इलाज करने के बाद उसे वापस राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि गंगा डॉल्फिन को बचाना केवल एक जीव को बचाना नहीं है, बल्कि यह पूरी गंगा नदी के ईकोसिस्टम और उसकी जैव विविधता को सुरक्षित रखने जैसा है।
मनोरमा नदी की सफाई का संकल्प और बस्ती के युवाओं का प्रयास
जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक युवा आकाश गुप्ता की प्रेरक कहानी भी इस संबोधन का हिस्सा बनी। आकाश अपने गाँव के पास से बहने वाली मनोरमा नदी की दुर्दशा और उसमें जमा होने वाले प्लास्टिक और कचरे को देखकर काफी दुखी थे। उन्होंने व्यवस्था से शिकायत करने के बजाय खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला किया। आकाश ने ‘शिकायत नहीं, शुरुआत’ के मूल मंत्र को अपनाते हुए अपने दोस्तों की एक टीम बनाई। फावड़ा, टोकरी और जाल जैसे साधारण उपकरणों को साथ लेकर इन युवाओं ने नदी में उतरकर जलकुंभी और प्लास्टिक कचरा निकालना शुरू किया। यह टीम प्रतिदिन 50 से 60 किलो तक कचरा नदी से बाहर निकालने लगी, जिससे देखते ही देखते नदी का वह हिस्सा पूरी तरह साफ और सुंदर हो गया। इस प्रयास को देखकर आसपास के ग्रामीणों में भी स्वच्छता को लेकर एक नई चेतना का संचार हुआ है।
गोवा में पेयजल संकट दूर करने वाले बालकृष्ण अइया
इसी तरह जल संकट के समाधान की एक और बेहतरीन कहानी गोवा से सामने आई। वहाँ के मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की भारी किल्लत से लोग परेशान थे। इस समस्या को दूर करने के लिए बालकृष्ण अइया नामक एक सेवानिवृत्त शिक्षक (रिटायर्ड टीचर) ने कमान संभाली। बालकृष्ण जी ने अपनी उम्र की परवाह न करते हुए समाज के हित के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और इलाके में नई पेयजल पाइपलाइन बिछाने के कार्य को पूरा करवाया। उनके इस भागीरथी प्रयास के कारण आज क्षेत्र के कई घरों तक साफ पीने का पानी सुलभ हो सका है, जिससे उन स्थानीय परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है जिन्हें पानी की बूंद-बूंद के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता था।
गिरिजा अम्मा और नन्हे छात्रों का देशभक्ति का अनोखा जज्बा
संबोधन के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नागरकोइल में हुई अपनी एक भावुक मुलाकात का जिक्र किया। उनकी मुलाकात गिरिजा अम्मा जी से हुई, जिनसे वह करीब तीन दशक पहले भी मिल चुके थे। गिरिजा अम्मा वर्तमान में लगभग 15 स्कूल संचालित करती हैं, जिनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय काफी प्रसिद्ध है, जिसने हाल ही में अपने गौरवशाली 50 वर्ष पूरे किए हैं। गिरिजा अम्मा ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम से प्रेरित होकर देश की सुरक्षा में तैनात वीर जवानों की मदद के लिए एक अनूठा अभियान शुरू किया। उन्होंने अपने स्कूलों के सभी नन्हे छात्र-छात्राओं को देश के सैनिकों के लिए प्रतिदिन केवल एक रुपया गुल्लक में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। इस तरह एक साल में प्रत्येक छात्र की तरफ से 365 रुपये का योगदान हुआ। इस छोटी-सी बचत से कुल 40 luxury लाख रुपये की एक बड़ी धनराशि इकट्ठा हुई, जिसका चेक गिरिजा अम्मा ने प्रधानमंत्री को सौंपा। प्रधानमंत्री ने इस अद्भुत देशभक्ति की भावना के लिए बच्चों और स्कूल प्रशासन की भरपूर सराहना की।
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