एजेंसी, नई दिल्ली। Major Abhilasha Barak : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाते हुए लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन (पीसकीपिंग मिशन) में तैनात भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को एक बेहद बड़े और वैश्विक सम्मान से नवाजा गया है। विश्व की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने मेजर अभिलाषा बराक को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार देने की आधिकारिक घोषणा की है। पश्चिम एशियाई देश लेबनान में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा लड़कियों के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण के लिए जो असाधारण प्रयास किए हैं, उसी के सम्मान में उन्हें इस वैश्विक पुरस्कार से विभूषित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद से ही भारतीय सेना और पूरे देश में गर्व की लहर है।
Proud to announce that Major Abhilasha Barak has been awarded the 2025 @UN Military Gender Advocate of the Year Award.
She is serving with the Indian Battalion as the Commander of the Female Engagement Team (FET) in #UNIFIL. Major Abhilasha is also first woman combat… pic.twitter.com/FcAW3OFZul
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) May 22, 2026
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने जताई खुशी
इस गौरवशाली और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक बेहद गर्व भरा संदेश साझा किया। भारतीय मिशन ने अपने बयान में कहा कि हमें पूरे देश के सामने यह घोषणा करते हुए अत्यंत गर्व और हर्ष की अनुभूति हो रही है कि भारत की बहादुर बेटी मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के लिए ‘यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ अवार्ड से सम्मानित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन्हें यह पुरस्कार विशेष रूप से स्थानीय समाज में महिलाओं और किशोरियों के अधिकारों की रक्षा करने, उनके बीच जाकर कम्युनिटी आउटरीच जैसी सामुदायिक गतिविधियों को सक्रियता से चलाने तथा शांति रक्षकों (पीसकीपर्स) को लैंगिक संवेदनशीलता से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण देने के लिए दिया जा रहा है। मेजर बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत भारतीय बटालियन में महिला सहभागिता दल (फीमेल एंगेजमेंट टीम – एफईटी) की कमांडर के रूप में बेहद मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रही हैं।
भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट एविएटर का अनूठा रिकॉर्ड
मेजर अभिलाषा बराक का सैन्य करियर हमेशा से ही देश की युवा महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान को पाने से पहले भी उनके नाम सैन्य इतिहास में एक बहुत ही विशिष्ट और स्वर्णिम रिकॉर्ड दर्ज है। मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना (इंडियन आर्मी) के इतिहास में पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट यानी कॉम्बैट एविएटर बनने का गौरव हासिल कर चुकी हैं। आसमान की ऊंचाइयों में देश की रक्षा करने के बाद अब वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले विश्व शांति और महिला अधिकारों की अलख जगा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी 29 मई को जब विश्व निकाय द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला ‘संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों का अंतरराष्ट्रीय दिवस’ (इंटरनेशनल डे ऑफ यूएन पीसकीपर्स) आयोजित किया जाएगा, तब वाशिंगटन और न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्य मुख्यालय में एक भव्य और विशेष समारोह के दौरान मेजर अभिलाषा बराक को इस प्रतिष्ठित मेडल और प्रशस्ति पत्र से व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान पाने वाली देश की तीसरी जांबाज महिला अधिकारी
संपूर्ण भारतवर्ष के लिए यह कूटनीतिक और सैन्य इतिहास का एक बेहद अनूठा और ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि मेजर अभिलाषा बराक इस सर्वोच्च वैश्विक सैन्य सम्मान को हासिल करने वाली भारत की तीसरी महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं। उनसे पहले भी भारतीय सेना की दो अन्य बेटियों ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपनी वीरता और सूझबूझ का लोहा मनवाते हुए इस प्रतिष्ठित मेडल को देश के नाम किया था। भारत की तरफ से सबसे पहले मेजर सुमन गवानी को और उनके बाद मेजर राधिका सेन को संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय शांति मिशनों में उनके द्वारा किए गए बेहद सराहनीय, मानवीय और अनुकरणीय कार्यों के लिए इस वैश्विक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इन महिला अधिकारियों की लगातार मिलती अंतरराष्ट्रीय कामयाबियों ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना और मानवीय सेवा के मामलों में भारतीय महिला शक्ति का कोई सानी नहीं है।
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