एजेंसी, नई दिल्ली। OTT Content Rules Update : देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहे ओवर द टॉप यानी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाली अश्लील, अनैतिक और आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए केंद्र सरकार एक व्यापक और सख्त कानूनी ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इस दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि ओटीटी माध्यमों पर परोसी जा रही अनुचित सामग्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए, हालांकि ऐसा करते समय आम नागरिकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा। संसद की गृह मामलों से जुड़ी स्थायी समिति ने अपनी 259वीं रिपोर्ट में सरकार से कड़े नियम, तकनीक आधारित आयु सत्यापन और भारी जुर्माने के प्रावधान लागू करने की मजबूत सिफारिश की है।
Government has notified the Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media, Ethics Code) Rules, 2021 on 25.02.2021 under IT Act, 2000 in order to put in place an institutional mechanism for publishers of news & current affairs on digital media and publishers of…
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) August 7, 2026
संसदीय समिति ने दिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था और जुर्माने के निर्देश
संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में स्थायी समिति ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और हिंसक सामग्री को बच्चों की पहुंच से दूर रखने के लिए मजबूत तकनीक-आधारित आयु सत्यापन प्रणाली और प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को अनिवार्य किया जाना चाहिए। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि जो भी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स या कंटेंट निर्माता इन सरकारी नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उन पर भारी आर्थिक जुर्माना और सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों के ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ का होगा गठन
वर्तमान में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का संचालन मुख्य रूप से स्व-नियमन यानी सेल्फ-रेगुलेशन प्रणाली पर निर्भर है। समिति ने अपनी 254वीं रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए एक बार फिर एक स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ गठित करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। इस प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति में बाल विकास, शिक्षा, कानून, सामाजिक विज्ञान और नागरिक समाज के जाने-माने जानकारों को शामिल किया जाएगा। यह पैनल दर्शकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर चिन्हित या ट्रेंडिंग ओटीटी कंटेंट की गहन समीक्षा करेगा और आवश्यक होने पर सुधारात्मक कदम उठाएगा।
पारंपरिक सिनेमा और ओटीटी के नियमों में बड़ा अंतर
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया कि भारत में अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं, जिनकी पहुंच पारंपरिक सिनेमाघरों से भी कहीं अधिक व्यापक हो गई है। इनमें नाबालिग दर्शकों की संख्या काफी अधिक है। समिति ने ध्यान दिलाया कि फिल्मों के लिए सिनेमाटोग्राफ एक्ट के तहत रिलीज से पहले सेंसर बोर्ड से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है, जबकि ओटीटी पर आईटी नियम 2021 के तहत केवल सेल्फ-क्लासिफिकेशन और रिलीज के बाद शिकायत निवारण की व्यवस्था लागू है।
कमजोर सत्यापन व्यवस्था के कारण बच्चों तक पहुंच रही अश्लील सामग्री
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार यद्यपि मौजूदा आईटी नियमों में आयु वर्गीकरण और शिकायत निवारण प्रणाली के प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन कंटेंट रिलीज से पहले जांच की व्यवस्था न होने और कमजोर आयु सत्यापन तंत्र के कारण नाबालिग बच्चे आसानी से अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के संपर्क में आ रहे हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार एक ऐसे पैनल के गठन पर विचार कर रही है जो देश की सांस्कृतिक मान्यताओं और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर सख्त दिशानिर्देश तैयार करेगा और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सीधी कानूनी कार्रवाई का आधार तय करेगा।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट रोकने के लिए संसदीय समिति ने क्या सिफारिशें की हैं?
उत्तर: समिति ने मजबूत तकनीक-आधारित आयु सत्यापन, प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल, कड़े नियमों और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने के प्रावधानों की सिफारिश की है।
प्रश्न 2: ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ का गठन किस उद्देश्य से करने का सुझाव दिया गया है?
उत्तर: यह स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल बाल विकास, कानून, शिक्षा और सामाजिक विशेषज्ञों से मिलकर बनेगा, जो प्राप्त शिकायतों के आधार पर ओटीटी कंटेंट की समीक्षा कर सुधारात्मक कार्रवाई करेगा।
प्रश्न 3: पारंपरिक फिल्मों और ओटीटी कंटेंट के प्रदर्शन के नियमों में क्या मुख्य अंतर है?
उत्तर: फिल्मों के लिए सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत प्री-रिलीज सर्टिफिकेशन अनिवार्य है, जबकि ओटीटी पर केवल आईटी नियम 2021 के तहत सेल्फ-क्लासिफिकेशन और पोस्ट-रिलीज शिकायत तंत्र लागू है।
प्रश्न 4: मौजूदा व्यवस्था में बच्चे किस वजह से आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच रहे हैं?
उत्तर: रिलीज से पहले जांच की कमी और कमजोर आयु सत्यापन प्रणाली के कारण नाबालिग दर्शक आसानी से ओटीटी पर उपलब्ध अश्लील या अनैतिक कंटेंट के संपर्क में आ जाते हैं।
प्रश्न 5: नए नियम बनाते समय सरकार नागरिकों के किन अधिकारों का ध्यान रखेगी?
उत्तर: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अनैतिक सामग्री पर रोक लगाने के साथ-साथ नागरिकों के मूल अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
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