JPSC Exam Controversy

जेपीएससी परीक्षा विवाद : सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग

झारखंड देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली/रांची। JPSC Exam Controversy : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में हुई कथित भारी गड़बड़ियों और धांधली का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। रांची में हजारों अभ्यर्थियों के लगातार जारी आंदोलन और विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की है। इस याचिका में संपूर्ण चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने, परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और पूरे पारदर्शी सुरक्षा उपायों के तहत नए सिरे से दोबारा परीक्षा आयोजित कराने की प्रमुख मांग की गई है।

सीबीआई जांच और निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग

सर्वोच्च अदालत में दायर जनहित याचिका में परीक्षा से जुड़ी तमाम शिकायतों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की गुहार लगाई गई है। इसके अलावा निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या झारखंड से बाहर के किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में एक स्वतंत्र जांच समिति बनाने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का सुझाव है कि इस जांच दल में फोरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, ओएमआर शीट मूल्यांकन, परीक्षा सुरक्षा तथा लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि इस गड़बड़ी की हर पहलू से बारीकी से पड़ताल हो सके।

परीक्षा रद्द कर नए सिरे से आयोजन और संपूर्ण डेटा के ऑडिट की अपील

याचिका में अदालत से यह स्पष्ट निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है कि जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 को पूरी तरह रद्द किया जाए। याचिकाकर्ता ने ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणाम तैयार करने वाले पूरे डिजिटल सिस्टम का एक स्वतंत्र निकाय से ऑडिट कराने पर बल दिया है। इसके साथ ही परीक्षा से संबंधित सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित करने की मांग की गई है। इनमें मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं।

ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद भड़का विवाद

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार यह प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी, जिसके बाद 2 जुलाई 2026 को आयोग द्वारा परिणाम घोषित किए गए। परिणाम आने के तुरंत बाद एक सफल उम्मीदवार की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। दावों के मुताबिक उस उम्मीदवार ने प्रथम प्रश्नपत्र में कुल 100 प्रश्नों में से केवल 48 प्रश्नों के ही उत्तर अंकित किए थे, फिर भी उसे सफल घोषित कर दिया गया। इस धांधली के उजागर होने के बाद जेपीएससी ने सीआईडी जांच का हवाला देते हुए उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त तक ओएमआर की कार्बन प्रतियां जमा कराने के निर्देश जारी किए थे।

रांची में छात्रों का जोरदार आंदोलन और अभिनेता पीयूष मिश्रा का समर्थन

परीक्षा में हुई कथित धोखाधड़ी के खिलाफ राज्य की राजधानी रांची में अभ्यर्थियों का विरोध-प्रदर्शन लगातार उग्र रूप ले रहा है। बापू वाटिका से 25 जुलाई को शुरू हुआ यह आंदोलन अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन के रूप में तब्दील हो चुका है, जहां छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच शनिवार को प्रसिद्ध अभिनेता, गायक और लेखक पीयूष मिश्रा भी आंदोलित छात्रों का हौसला बढ़ाने रांची पहुंचे। उन्होंने छात्रों के साथ खड़े होकर अपना प्रसिद्ध गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ गाया और छात्रों को बिना किसी हिंसक या अभद्र गतिविधि के पूरी मर्यादा और अनुशासन में रहकर अपना हक मांगने की सलाह दी।

इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :

प्रश्न 1: जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 का मामला सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा?

उत्तर: परीक्षा प्रक्रिया में कथित भारी धांधली, ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी और पारदर्शी निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर यह मामला जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

प्रश्न 2: जनहित याचिका में जांच के लिए किस प्रकार की समिति गठित करने की मांग की गई है?

उत्तर: सर्वोच्च या उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है, जिसमें फोरेंसिक, साइबर, आईटी और परीक्षा सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।

प्रश्न 3: याचिकाकर्ता ने किन भौतिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है?

उत्तर: मूल ओएमआर शीट, कार्बन प्रतियां, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, बायोमेट्रिक डेटा, उपस्थिति रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज का स्वतंत्र ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है।

प्रश्न 4: विवाद की शुरुआत किस सोशल मीडिया खुलासे के बाद हुई थी?

उत्तर: एक सफल अभ्यर्थी की ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल हुई, जिसमें 100 में से केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे उत्तीर्ण घोषित किए जाने का आरोप लगा।

प्रश्न 5: रांची में आंदोलित अभ्यर्थियों को किस प्रसिद्ध हस्ती का समर्थन मिला?

उत्तर: मशहूर अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने रांची पहुंचकर अनशनकारी छात्रों से मुलाकात की, ‘आरंभ है प्रचंड’ गीत गाया और उनके आंदोलन का समर्थन किया।

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