एजेंसी, नई दिल्ली/पटना। Lalu Yadav Fodder Scam SC : राष्ट्रीय जनता दल के सर्वोच्च नेता और बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत से एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा दाखिल उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें लालू प्रसाद यादव को प्रदान की गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दखल देने की सीबीआई की कोशिशों को झटका देते हुए साफ किया कि वह झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व फैसले को बदलने का कोई इरादा नहीं रखती है। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय ने संबंधित उच्च न्यायालय को इस पूरे मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपनी सुनवाई की गति को और तेज करने का एक महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किया है।
Supreme Court refuses to interfere with Jharkhand High Court order suspending Rashtriya Janata Dal (RJD) chief Lalu Prasad Yadav’s sentence and granting him bail after conviction in the fodder scam case.
Supreme Court refusing to cancel the bail granted of Yadav asks the High…
— ANI (@ANI) July 14, 2026
झारखंड उच्च न्यायालय के पुराने फैसले को बदलने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
इस मामले की कानूनी बहस और सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वे झारखंड हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए जमानत के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझते हैं। अदालत ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय के उस आदेश को आए हुए तकरीबन 7 वर्ष का एक लंबा समय बीत चुका है। केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा लालू प्रसाद यादव की रिहाई के खिलाफ दायर की गई यह विशेष अपील वर्ष 2018 से अदालत के समक्ष लंबित पड़ी हुई थी, जिसे इतने लंबे समय के बाद अब पूरी तरह से निष्प्रभावी मानते हुए खारिज कर दिया गया है।
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने अदालत के समक्ष रखीं अपनी दलीलें
इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत के सामने कई पुराने कानूनी संदर्भ पेश किए। सरकारी वकील ने अपनी दलील में इस बात पर जोर दिया कि लालू प्रसाद यादव की रिहाई से जुड़ी जमानत याचिका को पूर्व में 2 बार खारिज किया जा चुका था। इसके बाद में झारखंड उच्च न्यायालय ने इस राहत को केवल इस आधार पर मंजूरी दी थी कि आरोपी नेता ने अपनी कुल निर्धारित सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा जेल की सलाखों के पीछे पूरा कर लिया है। सीबीआई के वकील के मुताबिक इस कानूनी पहलू पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया था क्योंकि यह सजाएं एक साथ चलने वाली नहीं थीं, बल्कि अलग-अलग अवधियों के लिए थीं।
क्या है पूरा देवघर चारा घोटाला और इससे जुड़ा इतिहास
समाचार एजेंसी पीटीआई से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को 950 करोड़ रुपये के इस विशालकाय चारा घोटाले से संबंधित कुल 5 अलग-अलग मामलों में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है। यह पूरा कथित वित्तीय घोटाला वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 1995 के बीच के समय का है, जब बिहार का विभाजन नहीं हुआ था और झारखंड भी उसी राज्य का हिस्सा था। उस दौरान लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन थे और राज्य के वित्त मंत्रालय के साथ-साथ पशुपालन विभाग का पूरा कार्यभार भी सीधे तौर पर उन्हीं के नियंत्रण में था। वर्तमान समय में लालू प्रसाद यादव अपने अत्यंत खराब स्वास्थ्य और कई गंभीर बीमारियों का हवाला देकर कोर्ट से मिली जमानत पर जेल से बाहर चल रहे हैं।
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