एजेंसी, भोपाल। MP UCC final report draft : मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को धरातल पर उतारने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता के निर्माण के लिए गठित की गई उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी व्यापक और अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दी है। मुख्यमंत्री को यह महत्वपूर्ण प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद अब आगामी 18 जुलाई को राजधानी भोपाल के समीप स्थित ऐतिहासिक क्षेत्र जगदीशपुर (जिसका पूर्व नाम इस्लाम नगर था) में एक विशेष कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली इसी महत्वपूर्ण मंत्रि-परिषद की बैठक में सरकार द्वारा तैयार किए गए यूसीसी के इस अंतिम कानूनी मसौदे को आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी, जिसके बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र के दौरान पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा।
STORY | MP panel on UCC submits report to CM Yadav, recommends exclusion of tribals
A committee constituted to draft a Uniform Civil Code (UCC) for Madhya Pradesh has recommended exclusion of tribals from its scope in its report submitted to Chief Minister Mohan Yadav, officials… pic.twitter.com/H5Hyvz0ZBM
— Press Trust of India (@PTI_News) July 14, 2026
जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासियों को समान नागरिक संहिता से रखा जाएगा पूरी तरह बाहर
मुख्यमंत्री को सौंपी गई इस विस्तृत रिपोर्ट के अंतर्गत जो सबसे बड़ा और युगांतरकारी प्रावधान किया गया है, वह प्रदेश के मूल निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित है। उच्च स्तरीय समिति ने अपनी सिफारिशों में यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज को इस नए कानून यानी समान नागरिक संहिता के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह से मुक्त और बाहर रखा जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक सामाजिक रीति-रिवाजों, जल-जंगल-जमीन से जुड़े अधिकारों और उनके विशिष्ट हितों पर किसी भी प्रकार का कोई विपरीत प्रभाव या आंच नहीं आएगी। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हर हाल में की जा सके।
लिव इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा अनिवार्य, पुलिस और परिजनों को देनी होगी सूचना
कमेटी द्वारा तैयार किए गए इस नए कानूनी मसौदे में आधुनिक सामाजिक व्यवस्थाओं को विनियमित करने के लिए भी कई कड़े और महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके अंतर्गत राज्य में ‘लिव इन रिलेशनशिप’ (बिना विवाह के साथ रहने की प्रथा) में रहने वाले जोड़ों के लिए अपनी इस स्थिति का आधिकारिक पंजीकरण या रजिस्ट्रेशन करवाना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। रिपोर्ट में यह भी साफ तौर पर प्रावधान किया गया है कि जब भी कोई युवक या युवती लिव इन संबंध का रजिस्ट्रेशन कराएंगे, तो इसकी लिखित और आधिकारिक सूचना अनिवार्य रूप से उनके माता-पिता या परिजनों को भेजी जाएगी। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को भी इस बात की जानकारी देना कानूनी रूप से जरूरी होगा, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।
कुल 404 धाराओं, 4 भागों और 7 अनुसूचियों में संकलित की गई है यूसीसी की तीन खंडों वाली विशाल रिपोर्ट
मुख्यमंत्री को सौंपी गई यह ऐतिहासिक रिपोर्ट मुख्य रूप से 3 बड़े और विस्तृत खंडों में विभाजित है, जिसे बनाने में लंबी कानूनी रिसर्च की गई है। रिपोर्ट के पहले खंड में समिति की मुख्य अनुशंसाओं को शामिल किया गया है, जिसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय नियमों, भारत के राष्ट्रीय कानूनों और देश के विभिन्न राज्यों की विधियों तथा प्रथाओं का गहन विश्लेषण कर कुल 10 अध्यायों में रिपोर्ट तैयार की गई है। प्रतिवेदन का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के मूल प्रारूप (विधेयक के ड्राफ्ट) के रूप में है, जिसमें मध्य प्रदेश में वर्तमान में प्रचलित नियमों को ध्यान में रखकर 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल की गई हैं। वहीं इसके तीसरे खंड में व्यापक जन परामर्श का विवरण दर्ज है, जिसके अंतर्गत वेबसाइट और जिला स्तर पर चलाए गए अभियानों के माध्यम से प्रदेश भर के करीब 9 लाख 58 हजार लोगों से प्राप्त हुए लिखित सुझावों का लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर साधा निशाना, कांग्रेस से यूसीसी पर रुख स्पष्ट करने को कहा
यूसीसी की इस अंतिम रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की राजनीति पर जमकर तीखे प्रहार किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बेहद गंभीर और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दे पर अब कांग्रेस पार्टी को भी देश के सामने अपना स्टैंड पूरी तरह से स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे समान नागरिक संहिता का विषय हो या फिर धार की ऐतिहासिक भोजशाला का मामला, कांग्रेस हमेशा हर राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दे को केवल हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से और अपने तुष्टिकरण के वोट बैंक की राजनीति के हिसाब से ही देखती आई है। मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश की जागरूक जनता और सभी धर्मों के आम नागरिकों ने यूसीसी के पक्ष में अपने विचार बहुत खुलकर और सकारात्मक रूप से सामने रखे हैं, लेकिन कांग्रेस अभी भी इस पर चुप्पी साधे हुए है।
विधि विभाग को हस्तांतरित हुआ प्रतिवेदन, मानसून सत्र में कानून बनने की प्रबल संभावना
विदित हो कि मध्य प्रदेश की राज्य सरकार द्वारा गठित की गई इस उच्च स्तरीय समिति को विवाह, तीन तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने (दत्तक ग्रहण), उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे बेहद संवेदनशील व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से जुड़ी प्रचलित व्यवस्थाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति ने इन सभी विषयों को लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को बिना प्रभावित किए संकलित किया है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (समिति के अध्यक्ष), वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह, अनूप नायर, प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया का धन्यवाद किया। वर्तमान में इस प्रतिवेदन को विधि विभाग को सौंप दिया गया है, जहां वरिष्ठ सचिवों की समिति द्वारा आवश्यक परिमार्जन के बाद इसे आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में ही पारित कराकर कानून का रूप दिए जाने की शत-प्रतिशत संभावना है।
कैबिनेट की पुरानी बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रस्तावों पर भी लग चुकी है मुहर
इस बड़े नीतिगत फैसले के साथ ही पूर्व में मंत्रालय में आयोजित हुई कैबिनेट की सामान्य बैठक में राज्य के विकास से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत कृषि विभाग और जल संसाधन विभाग सहित सरकार के कई अन्य प्रमुख मंत्रालयों की जनकल्याणकारी योजनाओं की अवधि को आगामी वर्ष 2031 तक निरंतर जारी रखने का एक बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके अलावा प्रदेश में किसानों से समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली फसलों की खरीद की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विभिन्न व्यावसायिक बैंकों को दी जाने वाली सरकारी गारंटी की व्यवस्था को भी अनवरत जारी रखा जाएगा। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली ‘टेक होम राशन’ (घर ले जाने वाले राशन) की पुरानी व्यवस्था में भी प्रशासनिक सुधार के दृष्टिकोण से कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
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