एजेंसी, नई दिल्ली। ITLOS Judge Bimal Patel : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मंच पर भारत ने एक और बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र संघ की समुद्री कानून संधि से जुड़े सदस्य देशों ने भारत के बेहद योग्य उम्मीदवार प्रोफेसर डॉ. बिमल एन. पटेल को ‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण’ (इंटरनेशनल ट्राइब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी) का नया न्यायाधीश चुना है। भारत की इस शानदार कामयाबी पर देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने के लिए विशेष बधाई संदेश दिए हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चुनाव में डॉ. बिमल पटेल को दुनिया के तमाम देशों का बहुत व्यापक और बड़ा समर्थन हासिल हुआ है। वे इस वैश्विक न्यायाधिकरण में साल 2026 से लेकर साल 2035 तक के एक लंबे कार्यकाल के लिए न्यायधीश की जिम्मेदारी को संभालेंगे। भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक जीत पर उन सभी सदस्य देशों के प्रति अपना गहरा आभार प्रकट किया है जिन्होंने भारत की योग्यता पर अपना अटूट विश्वास जताया है।
A proud moment for India!
Congratulations to Prof. (Dr.) Bimal N. Patel on his election as Judge of the International Tribunal for the Law of the Sea (ITLOS) for the 2026–35 term. His election reflects India’s steadfast commitment to multilateralism, the rule of law, and UNCLOS.… pic.twitter.com/1rXS3lztm3— India in the UK (@HCI_London) June 19, 2026
वैश्विक मंच पर लगातार बढ़ रही है भारत की प्रतिष्ठा और धाक
प्रोफेसर डॉ. बिमल एन. पटेल का अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण में इतने बड़े बहुमत से चुना जाना इस बात का साक्षात प्रमाण है कि पूरी दुनिया में भारत की साख, प्रतिष्ठा और कूटनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। विशेषकर समुद्री सीमा से जुड़े नियमों, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और वैश्विक जल क्षेत्रों के प्रबंधन के मामले में अब भारत की उपस्थिति को बेहद मजबूती के साथ स्वीकार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस गौरवशाली क्षण की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रोफेसर पटेल की यह जीत हर देशवासी के लिए गर्व का विषय है। भारत वैश्विक शांति, समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का हमेशा से पालन करता आया है, और यह नियुक्ति इसी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पूरी दुनिया के सदस्य देशों को कहा धन्यवाद
भारत की इस बड़ी जीत के तुरंत बाद देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने आधिकारिक सामाजिक डिजिटल मंच (सोशल मीडिया) पर पोस्ट करते हुए देश की खुशी का इजहार किया। विदेश मंत्री ने लिखा कि डॉक्टर बिमल पटेल को इस ऐतिहासिक और गौरवमयी उपलब्धि के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के उन सभी सदस्य देशों का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद किया, जिन्होंने भारत के पक्ष में मतदान करके अपना अमूल्य समर्थन और अटूट भरोसा प्रकट किया है। इस चुनाव के बाद भारत ने न्यायाधिकरण के लिए चुने गए दुनिया के अन्य सभी सम्मानित और प्रतिष्ठित नवनिर्वाचित सदस्यों को भी अपनी तरफ से शुभकामनाएं भेजी हैं।
जानिए क्या है संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि और न्यायाधिकरण
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण की महत्ता को समझने के लिए इससे जुड़ी संधि को जानना बेहद जरूरी है। ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सी’ यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है। यह संधि दुनिया भर के समुद्रों के इस्तेमाल, समुद्री सीमाओं के निर्धारण, जल के भीतर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की खोज और समुद्री पर्यावरण की रक्षा से जुड़े कड़े नियम व कानून तय करने का काम करती है।
वर्तमान समय में दुनिया के करीब 168 देश इस वैश्विक संधि के आधिकारिक सदस्य हैं। भारत के इतिहास की बात करें तो भारत ने शुरुआती दौर में ही यानी साल 1982 में इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधि पर अपने हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके बाद साल 1995 में भारत सरकार ने पूरी तरह से इस संधि का अनुमोदन करते हुए इसे देश में स्वीकार कर लिया था। अब इस न्यायाधिकरण में भारतीय जज की मौजूदगी से समुद्री विवादों को सुलझाने में भारत की भूमिका और ज्यादा अहम हो जाएगी।
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