एजेंसी, भरुच। India LNG Supply : वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते का सीधा और बेहद सकारात्मक असर अब भारत की आर्थिक और ऊर्जा व्यवस्था पर दिखने लगा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही भारी तनातनी और सैन्य गतिरोध समाप्त होने के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्ते, यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी तरह के प्रतिबंध पूरी तरह हटा लिए गए हैं। प्रतिबंध हटते ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग दोबारा खुल गया है, जिसके तुरंत बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से पूरी तरह लदा हुआ पहला विशाल टैंकर गुजरात के भरूच जिले में स्थित प्रसिद्ध दहेज टर्मिनल पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया है। बीते करीब 110 दिनों से इस समुद्री रास्ते पर बने अनिश्चितता और कड़े तनाव के माहौल के बीच इस बेहद महत्वपूर्ण खेप का भारत पहुंचना देश की आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक मांग की आपूर्ति के लिहाज से एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी माना जा रहा है।
India’s LNG tanker ‘Disha’ successfully arrived at Dahej Port in Gujarat after crossing the strategically important Strait of Hormuz. Carrying 62,370 metric tonnes of liquefied natural gas from Qatar’s Ras Laffan terminal, the vessel reaches the Dahej LNG terminal this morning.… pic.twitter.com/OpM2TNiqAc
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 19, 2026
तरलीकृत प्राकृतिक गैस की विशाल खेप उतरी, ऊर्जा बाजार को मिलेगी भारी स्थिरता
आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक, भारत के समुद्री तट पर पहुंचा यह विशालकाय जलयान अपने साथ रिकॉर्ड 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) लेकर आया है। गुजरात के दहेज बंदरगाह टर्मिनल पर इस बेहद संवेदनशील और मूल्यवान गैस खेप को सुरक्षित रूप से जहाजों से उतारने (अनलोडिंग) की तकनीकी प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है। रक्षा और व्यापारिक मामलों के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य समूची दुनिया का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ऊर्जा व्यापार मार्ग माना जाता है। इस रास्ते में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न होने से पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में अचानक भारी उछाल आ जाता है। ऐसे में इस रास्ते के दोबारा पूरी तरह चालू होने से भारत जैसे विशाल ऊर्जा आयातक देश को बहुत बड़ी राहत मिली है।
ईरान की सर्वोच्च परिषद का बड़ा फैसला, जहाजों को मिली त्वरित अनुमति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत होर्मुज के जलमार्ग से होकर गुजरने वाले दुनिया भर के तमाम व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के आवागमन से जुड़ी सभी प्रकार की कानूनी अपीलों, प्रार्थना पत्रों और जरूरी सरकारी अनुमतियों को बिना किसी देरी के तुरंत निपटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। ईरान प्रशासन का यह बेहद सहयोगात्मक और ऐतिहासिक फैसला ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फ्रांस में हस्ताक्षरित किए गए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तुरंत बाद सामने आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक बिरादरी ने बड़ी राहत की सांस ली है।
अगले 60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क, सारा खर्च खुद उठाएगी ईरान सरकार
ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नए वैश्विक शांति समझौते के नियमों के तहत आगामी 60 दिनों की अवधि तक होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरने वाले किसी भी देश के व्यापारिक जहाजों से किसी भी प्रकार का टैक्स, चुंगी या अतिरिक्त सुरक्षा शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इस दो महीने की पूरी समय सीमा के दौरान समुद्री यातायात और सुरक्षा से जुड़े तमाम वित्तीय खर्चों का पूरा बोझ खुद ईरान सरकार अपनी तिजोरी से वहन करेगी। इस जलमार्ग से गुजरने की इच्छा रखने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अपने आने-जाने से संबंधित आधिकारिक अनुरोध पत्र पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी को भेजने होंगे, जो इस पूरी यातायात प्रक्रिया की देखरेख और बेहतर समन्वय का काम संभालेगी।
समुद्री यातायात को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह सामान्य करने का मिला आश्वासन
ईरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र को यह पक्का भरोसा और लिखित आश्वासन भी दिया है कि इस बेहद संवेदनशील जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार और जहाजों के ट्रैफिक को बहुत ही सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह सामान्य कर दिया जाएगा। वैश्विक आर्थिक मामलों के बड़े विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों का यह साफ मानना है कि ईरान के इस बेहद सकारात्मक कदम से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में चल रही भारी अस्थिरता पर तुरंत लगाम लगेगी। इसके साथ ही भारत जैसे उन तमाम बड़े विकासशील देशों को, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं, भविष्य की आपूर्ति संबंधी चिंताओं और भारी आर्थिक नुकसान से बहुत बड़ी सुरक्षा मिल जाएगी।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


