एजेंसी, बैतूल। President Murmu : देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में आयोजित एक बेहद गरिमामय कार्यक्रम में जनजातीय समाज को लेकर एक बहुत ही गहरी और बड़ी बात कही है। ब्रह्मकुमारी संस्थान की तरफ से जनजातीय समाज के कल्याण के लिए आयोजित ‘एम्पावरमेंट ऑफ ट्रायबल सोसायटी बाय स्प्रिचुअल अवेकनिंग’ (आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण) नामक विशेष समारोह में राष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। वहां मौजूद विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि संसार में किसी भी वर्ग या समाज का असली सशक्तिकरण केवल आर्थिक संपन्नता या धन-दौलत आ जाने से नहीं होता है। इसके लिए पैसों के साथ-साथ शैक्षणिक, आध्यात्मिक और मानसिक प्रगति होना भी बहुत आवश्यक है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सच्चे सशक्तिकरण का असली मतलब आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ अपना जीवन जीना होता है। उन्होंने इस बात के लिए ब्रह्मकुमारी संस्था की जमकर सराहना की कि वह दूरदराज के इलाकों में जाकर जनजातीय समाज में नई ऊर्जा फूंकने और उनके सोचने का नजरिया बदलने का एक बहुत ही सराहनीय कार्य कर रही है।
जब अध्यात्म और सेवा का संगम होता है, तब समाज में स्थायी परिवर्तन आता है। pic.twitter.com/HtWiV6M4jY
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 18, 2026
जनजातीय समाज के स्वाभिमान और संतोषी स्वभाव की सराहना
अपने बेहद भावुक और प्रभावशाली संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनजातीय समाज की अनूठी विशेषताओं और उनकी जीवनशैली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार जनजातीय और पिछड़े समाज के कल्याण के लिए बहुत सारी कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इन सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के कई लोग उठा भी रहे हैं, जबकि कुछ सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोग किन्हीं कारणों से अभी तक इनका फायदा नहीं ले पाए हैं। लेकिन इस समाज की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये लोग कभी भी खुद आगे बढ़कर यह शिकायत नहीं करते कि दूसरों को लाभ मिल रहा है तो हमें क्यों नहीं मिला। राष्ट्रपति ने कहा कि इस समाज के लोग कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते, बल्कि वे बहुत ही सब्र और संतोष के साथ अपनी बारी का इंतजार करते हैं। उन्हें पूरा भरोसा होता है कि जब सरकार सबके लिए काम कर रही है, तो एक न एक दिन उनकी बारी भी जरूर आएगी।
शांत प्रिय जीवन और परंपराओं का सम्मान
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज के सीधेपन और स्वाभिमान की तारीफ करते हुए कहा कि इस वर्ग के लोग अपनी परेशानियों का रोना किसी के सामने नहीं रोते। वे स्वभाव से बेहद शांतप्रिय होते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ शांति से जीवन व्यतीत करना ही उन्हें सबसे ज्यादा पसंद होता है। वे दूसरों की देखादेखी करके किसी तरह की गैर-वाजिब मांगें नहीं उठाते। राष्ट्रपति ने वहां उपस्थित युवाओं से खास तौर पर अपील की कि वे अपनी महान सांस्कृतिक धरोहर और गौरवशाली परंपराओं को संजोए रखने के साथ-साथ आज की आधुनिक शिक्षा और कंप्यूटर व इंटरनेट की नई दुनिया यानी डिजिटल माध्यमों से भी मजबूती के साथ जुड़ें। उन्होंने कहा कि आज के दौर में आधुनिक शिक्षा और डिजिटल ज्ञान ही वह सबसे बड़ा जरिया हैं, जो समाज की सोच को बदलेंगे और उनके पूरे रहन-सहन के स्तर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को अध्यात्म से जुड़े रहने की भी सलाह दी ताकि वे अपनी प्राचीन जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को हमेशा सुरक्षित रख सकें।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के दौरे को राज्य के लिए बताया बेहद महत्वपूर्ण
समारोह में राष्ट्रपति का भव्य स्वागत करने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संचार माध्यमों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के इस पांच दिवसीय प्रांतीय दौरे को राज्य के विकास और गौरव के लिए एक मील का पत्थर बताया। मुख्यमंत्री ने उनके आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए जानकारी दी कि राष्ट्रपति १९ जून को ओंकारेश्वर में आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगी, जहां वे सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के अभियान की समीक्षा करेंगी। इसके बाद २० जून को वे संस्कारधानी जबलपुर का रुख करेंगी और २१ जून को वहां आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य समारोह में शामिल होंगी। योग दिवस के बाद राष्ट्रपति जबलपुर में ही रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के ३६वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान करेंगी। अपने दौरे के अंतिम चरण में, २२ जून को राष्ट्रपति कूनो राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करेंगी जहां वे चीता संरक्षण परियोजना की जमीनी प्रगति का अवलोकन करने के बाद ग्वालियर हवाई अड्डे से वापस देश की राजधानी दिल्ली के लिए प्रस्थान कर जाएंगी।
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