एजेंसी, खंडवा। Sickle Cell Mission : मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के पावन अवसर पर एक भव्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ की शानदार प्रगति और अब तक की बड़ी उपलब्धियों की जमकर सराहना की। उन्होंने बेहद गर्व के साथ कहा कि यह राष्ट्रव्यापी अभियान महज एक साधारण स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को पूरी तरह सुरक्षित, खुशहाल और सेहतमंद बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय संकल्प है। राष्ट्रपति ने इस मिशन को जमीन पर उतारने में मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की विशेष रूप से पीठ थपथपाई और कहा कि इस जानलेवा बीमारी को जड़ से खत्म करने में राज्य ने पूरे देश के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित कई बड़े जनप्रतिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे। pic.twitter.com/nD1TR9CtwL
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 19, 2026
निर्धारित समय सीमा से बहुत पहले पूरा हुआ करोड़ों लोगों की जांच का महालक्ष्य
श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देश को संबोधित करते हुए बताया कि साल 2023 में जब इस महत्वाकांक्षी मिशन की नींव रखी गई थी, तब जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनमें से कई महत्वपूर्ण पड़ाव देश ने तय समय से काफी पहले ही पार कर लिए हैं। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि देश में नवजात बच्चों से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के करीब 7 करोड़ लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) का काम सफलतापूर्व पूरा किया जा चुका है। अनुवांशिक यानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैलने वाली बीमारियों की पहचान करने के मामले में यह पूरी दुनिया का सबसे बड़ा और अनूठा अभियान बनकर उभरा है। उन्होंने आगे बताया कि अकेले मध्य प्रदेश में ही अब तक सवा करोड़ से भी अधिक नागरिकों की जांच की जा चुकी है और प्रभावित लोगों को उनके स्वास्थ्य की सही स्थिति बताने वाले अनुवांशिक परामर्श कार्ड (जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड) भी बांटे गए हैं।
मध्य भारत के जनजातीय और आदिवासी अंचलों में सबसे बड़ी चुनौती
राष्ट्रपति ने इस बीमारी की गंभीरता पर वैज्ञानिक शोध का हवाला देते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक भारत में करीब 2 से 2.5 करोड़ लोग ऐसे हैं जो अनजाने में ही सिकल सेल बीमारी के जीन को अपने शरीर में लेकर घूम रहे हैं, यानी वे इसके वाहक हैं। इसके अलावा लाखों लोग इस दर्दनाक बीमारी की चपेट में आकर इसका दंश झेल रहे हैं। देश में इसका सबसे ज्यादा खतरनाक असर मध्य भारत के जनजातीय और आदिवासी बहुल इलाकों में देखा गया है। राष्ट्रपति ने दुख जताते हुए कहा कि इन दूरदराज के क्षेत्रों में कई ऐसे गरीब परिवार हैं जो पीढ़ियों से इस बीमारी के कारण अपनों को खो रहे थे, लेकिन अज्ञानता के कारण उन्हें इस बीमारी के असली नाम और इसके लक्षणों की सही जानकारी तक नहीं थी। इसी बड़ी चुनौती को ध्यान में रखकर सरकार ने देश के स्वास्थ्य विभाग, आदिवासी कल्याण मंत्रालय, आधुनिक अनुवांशिक विज्ञान और डिजिटल निगरानी प्रणाली को एक साथ जोड़कर इस देशव्यापी महाअभियान का आगाज किया है।
जन-जागरूकता, बड़े पैमाने पर जांच और लगातार इलाज ही सफलता की चाबी
अपने प्रभावशाली संबोधन में राष्ट्रपति ने इस पूरे मिशन की सफलता के तीन सबसे मजबूत स्तंभों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहली प्राथमिकता बड़े पैमाने पर सामाजिक जागरूकता फैलाना और शादियों से पहले लड़का-लड़की के अनुवांशिक कार्ड का मिलान करना है। दूसरा स्तंभ समय रहते जांच के जरिए मरीजों की पहचान करना है, और तीसरा सबसे जरूरी स्तंभ है कि प्रभावित मरीजों को बिना किसी रुकावट के लगातार बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें। उन्होंने बताया कि अब तक देश भर में करीब ढाई लाख सिकल सेल के मरीजों और 20 लाख से ज्यादा इस बीमारी को फैलाने वाले वाहकों की पहचान की जा चुकी है। इन सभी लोगों को सही समय पर डॉक्टरी सलाह देना बेहद जरूरी है, क्योंकि ज्यादातर वाहकों को खुद भी यह पता नहीं होता कि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह गंभीर बीमारी विरासत में दे रहे हैं।
देश के लिए रोल मॉडल बना मध्य प्रदेश का बेहतरीन स्वास्थ्य ढांचा
राष्ट्रपति मुर्मु ने देश के सामने मध्य प्रदेश द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए नए प्रयोगों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और सिकल सेल से प्रभावित मरीजों के लिए इलाज और जांच की आधुनिक व्यवस्था को गांव-गांव में बने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (स्वास्थ्य केंद्रों) तक पहुँचा दिया है। इसके साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और आदिवासी बस्तियों में जाकर बड़े स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य में चलाए जा रहे ‘सिकल मित्र’ अभियान की भी सराहना की, जिसके तहत स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और एनसीसी कैडेट्स को ट्रेनिंग देकर गांव-गांव में जागरूकता की अलख जगाई जा रही है।
भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का महासंकल्प: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ओंकारेश्वर की इस पवित्र और ऐतिहासिक धरती से लिया गया सिकल सेल उन्मूलन का यह संकल्प कोई साधारण सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि देश की आने वाली नस्लों और भावी पीढ़ियों को एक अत्यंत गंभीर अनुवांशिक बीमारी से बचाने का एक पवित्र राष्ट्रीय यज्ञ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीमारी का डंक सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे हंसते-खेलते परिवार और आने वाली कई पीढ़ियों को तबाह कर देता है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में प्रभावित महिलाओं की पहचान करने और जेनेटिक कार्ड बांटने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और वर्तमान में 3700 से ज्यादा ‘सिकल मित्र’ इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
जांच के मामले में मध्य प्रदेश बना देश का नंबर वन राज्य: उप मुख्यमंत्री
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सिकल सेल की जांच करने के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश के अग्रणी राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है। उन्होंने बताया कि राज्य के आदिवासी बहुल जिलों में अब तक रिकॉर्ड 1.32 करोड़ लोगों की जांच पूरी की जा चुकी है। राज्य सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है कि साल 2026 के अंत तक सूबे के 1.60 करोड़ लोगों की सिकल सेल जांच का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने एक बेहद सकारात्मक बदलाव का जिक्र करते हुए बताया कि अब आदिवासी समाजों में शादी-ब्याह तय करने से पहले कुंडली की तरह सिकल सेल जांच कार्ड का मिलान भी किया जाने लगा है, ताकि आने वाले बच्चों को इस बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने इस मिशन में बेहतरीन काम करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों और डॉक्टरों को सम्मानित भी किया और वहां लगी एक भव्य स्वास्थ्य प्रदर्शनी का बारीकी से मुआयना भी किया।
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