Donald Trump US Currency

अमेरिकी मुद्रा पर डोनाल्ड ट्रम्प की छवि छापने की ऐतिहासिक तैयारी, डेढ़ सदी पुराना कानून बदलने के लिए संसद की मंजूरी का इंतजार

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एजेंसी, वॉशिंगटन डीसी। Donald Trump US Currency : संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले दो सौ पचास डॉलर के एक बिल्कुल नए नोट को जारी करने की कूटनीतिक और प्रशासनिक तैयारियां बहुत तेजी से शुरू हो चुकी हैं। ट्रम्प प्रशासन का इस विषय पर स्पष्ट कहना है कि यदि वहां की संसद यानी कांग्रेस इस संबंध में बने पुराने कानून में संशोधन को अपनी हरी झंडी दे देती है, तो देश में इस नए मूल्य वर्ग के नोट की छपाई का रास्ता पूरी तरह से साफ हो जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में अमेरिका के भीतर एक बेहद कड़ा और प्राचीन नियम प्रभावी है, जिसके अंतर्गत किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को देश की सरकारी मुद्रा या नोटों पर कतई नहीं छापा जा सकता। अब इसी ऐतिहासिक नियम को पूरी तरह से बदलने के लिए प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। यदि संसद द्वारा इस नए प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया जाता है, तो डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी मुद्रा पर स्थान पाने वाले पिछले एक सौ पचास वर्षों से भी अधिक समय के इतिहास में पहले जीवित व्यक्ति बन जाएंगे।

देश की स्थापना की ढाई सौवीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने की कवायद

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार के दिन व्हाइट हाउस में आयोजित एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति की तस्वीर वाले इस नए नोट को जारी करने से जुड़ी तमाम कड़ियों और योजनाओं को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने अपनी बात को सही ठहराते हुए तर्क दिया कि आगामी वर्ष दो हजार छब्बीस में संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी स्थापना के गौरवशाली दो सौ पचास वर्ष पूरी तरह से संपन्न करने जा रहा है। ऐसे अत्यंत ऐतिहासिक और यादगार मौके पर देश के वर्तमान राष्ट्रपति की तस्वीर वाला एक विशेष स्मारक नोट जारी करने में कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, उन्होंने कूटनीतिक तौर पर यह भी साफ किया कि वर्तमान में यह विषय केवल एक सरकारी प्रस्ताव के रूप में ही सामने आया है और इसे जमीन पर पूरी तरह से लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की अंतिम संवैधानिक मंजूरी मिलना बेहद अनिवार्य होगा।

अमेरिकी नोट छापने वाली मुख्य एजेंसी को नया और आकर्षक ढांचा तैयार करने के मिले निर्देश

वाशिंगटन पोस्ट की एक बेहद प्रामाणिक और कूटनीतिक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी करेंसी की छपाई करने वाली मुख्य सरकारी एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंग्रेविंग एंड प्रिंटिंग को इस नए नोट का एक बेहद आकर्षक और आधुनिक डिजाइन तैयार करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। इस प्रस्तावित नए डिजाइन के तहत राष्ट्रपति ट्रम्प की मुख्य तस्वीर को नोट के बिल्कुल मध्य यानी बीच के हिस्से में स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इस पूरे प्रस्ताव की शुरुआत पिछले वर्ष ही साउथ कैरोलिना प्रांत के रिपब्लिकन पार्टी के सांसद जो विल्सन द्वारा एक विशेष बिल के रूप में संसद में पेश करने के साथ हुई थी। इसके बाद फरवरी दो हजार पच्चीस में इस महत्वपूर्ण बिल को गहन समीक्षा के लिए हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के पास भेजा गया था। अब इसे पूरी तरह से कानून का रूप देने के लिए देश के दोनों मुख्य सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों से ही भारी बहुमत के साथ अपनी मंजूरी लेनी होगी।

अमेरिकी नोटों पर शामिल होंगे राष्ट्रपति के आधिकारिक हस्ताक्षर

इस बड़े नोट के प्रस्ताव से पहले भी ट्रेजरी विभाग ने एक और बेहद चौंकाने वाली घोषणा की थी। विभाग के अनुसार, अब अमेरिका में छपने वाले नोटों पर राष्ट्रपति ट्रम्प के आधिकारिक हस्ताक्षर भी विशेष रूप से जोड़े जाने की योजना है। इस पूरे कदम को भी अमेरिका की ढाई सौवीं वर्षगांठ के बड़े समारोहों के साथ ही जोड़कर देखा जा रहा है। विभाग के मुख्य प्रवक्ता ने जानकारी साझा की है कि नोट छापने वाली मुख्य एजेंसी इस समय इस पूरे विषय को लेकर अपनी शुरुआती तकनीकी तैयारियां और कानूनी जांच-पड़ताल बहुत तेजी से कर रही है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि यह बिल संसद से कानून के रूप में पास हो जाता है, तो देश की इस ऐतिहासिक वर्षगांठ के महान मौके पर राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा देश के हित में की गई बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों को एक सर्वोच्च सम्मान देने के लिए इस विशेष नोट को आधिकारिक रूप से बाजार में जारी कर दिया जाएगा।

राष्ट्रपति ने खुद डिजाइन को देखकर सुझाए कुछ बेहद महत्वपूर्ण और बड़े बदलाव

दो सौ पचास डॉलर के इस अनूठे नोट का सबसे पहला और शुरुआती प्रारूप तैयार करने वाले प्रसिद्ध ब्रिटिश कलाकार इयान एलेक्जेंडर ने मीडिया के सामने एक बेहद ही दिलचस्प और बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पूरे डिजाइन को बहुत ही बारिकी के साथ देखा था और इसके बाद उन्होंने नोट को और अधिक सुंदर व भव्य बनाने के लिए अपनी तरफ से कुछ बेहद महत्वपूर्ण बदलाव करने के सुझाव भी दिए थे। कलाकार के मुताबिक, ट्रम्प की यह विशेष इच्छा थी कि इस नए ऐतिहासिक नोट के भीतर अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज के तीनों मुख्य रंगों को बहुत ही खूबसूरती से शामिल किया जाए और इसके साथ ही देश की आजादी की ढाई सौवीं वर्षगांठ को प्रदर्शित करने वाले एक विशेष और राष्ट्रीय लोगो को भी इसमें प्रमुखता के साथ स्थान दिया जाए। हालांकि, इस पूरे प्रस्ताव के सामने आने के बाद अब अमेरिका के भीतर एक नई राजनीतिक और कानूनी बहस भी बहुत तेजी से छिड़ गई है, जहां ट्रम्प के समर्थक इसे देश का एक बड़ा सम्मान बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे पुरानी स्थापित परंपराओं को जबरन तोड़ने वाला कदम करार दे रहे हैं।

कड़े तकनीकी और सुरक्षा मानकों के कारण छपाई में लग सकता है छह से आठ वर्षों का लंबा समय

किसी भी देश के लिए एक बिल्कुल नया और उच्च मूल्य वर्ग का नोट जारी करना कोई आसान काम नहीं होता है। यही कारण है कि इस नए नोट को पूरी तरह से तैयार करके आम जनता और बाजार के बीच चलन में लाने में करीब छह से लेकर आठ वर्षों तक का एक लंबा समय लग सकता है। करेंसी छापने वाली मुख्य सरकारी एजेंसी के आला अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के नए और बेहद हाई-वैल्यू वाले नोट को जारी करने के रास्ते में वर्तमान समय में कई बड़ी कानूनी, प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियां खड़ी हैं। एजेंसी की पूर्व मुख्य निदेशक पैटी सोलिमेन ने भी प्रशासन को इस बात से पूरी तरह अवगत कराया था कि किसी भी नई मुद्रा के संपूर्ण डिजाइन को तैयार करने, उसकी सुरक्षा कड़ियों की जांच करने, अंतिम मंजूरी लेने और फिर उसकी प्रिंटिंग शुरू करने की पूरी प्रक्रिया में सामान्य तौर पर छह से आठ साल का समय लग ही जाता है।

विभाग के ही एक वरिष्ठ कर्मचारी ने आंतरिक जानकारी देते हुए बताया कि अधिकारियों ने शुरू में ही यह बात पूरी तरह साफ कर दी थी कि वर्तमान में बने कानूनों के तहत ऐसे किसी भी नोट को छापने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। इसके अलावा इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अभी तक देश की सभी संबंधित बड़ी सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों के बीच किसी भी प्रकार की कोई औपचारिक या आधिकारिक बैठक भी संपन्न नहीं हो सकी है। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का भी विशेष जिक्र किया गया है कि अधिकारियों ने प्रशासन की एक दूसरी बड़ी मांग को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत अब ट्रम्प के आधिकारिक हस्ताक्षर वाले सौ डॉलर के नोटों की छपाई का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास की एक बेहद ही अनूठी घटना होगी जब किसी मौजूदा और जीवित राष्ट्रपति के वास्तविक हस्ताक्षर देश की मुख्य करेंसी पर दिखाई देंगे।

जानिए आखिर क्यों अमेरिकी मुद्रा पर किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर छापने पर लगी है कानूनी रोक?

  • साल अटठारह सौ छाछठ में बनाए गए एक बेहद कड़े अमेरिकी कानून के तहत देश की मुद्रा पर किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर लगाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

  • इस नियम को बनाने का मुख्य उद्देश्य तत्कालीन समय में सत्ता के दुरुपयोग को रोकना और देश के भीतर किसी भी नेता की व्यक्तिगत पूजा या छवि निर्माण की प्रवृत्ति को समाप्त करना था।

  • अमेरिकी नोटों पर हमेशा से ही केवल देश के दिवंगत पूर्व राष्ट्रपतियों और इतिहास में अमर हो चुकी महान विभूतियों की तस्वीरों को ही सम्मानपूर्वक छापा जाता रहा है।

  • किसी भी नई राष्ट्रीय करेंसी के संपूर्ण री-डिजाइन और उसकी प्रिंटिंग की पूरी प्रक्रिया में तकनीकी कारणों से कई वर्षों का लंबा समय लगता है।

एक सदी पहले भी एक चतुर राष्ट्रपति ने कानून की कमी का फायदा उठाकर तोड़ी थी यह परंपरा

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक बेहद ही ऐतिहासिक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ढाई सौ वर्षों के लंबे अमेरिकी इतिहास में सिर्फ एक ही बार ऐसा अनोखा वाकया देखने को मिला है जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति ने देश के सिक्कों पर अपनी खुद की तस्वीर लगवाने में कामयाबी हासिल की थी। साल उन्नीस सौ छब्बीस में अमेरिका के भीतर एक विशेष आधा डॉलर मूल्य का सिक्का जारी किया गया था, जिसके ऊपर उस समय के मौजूदा राष्ट्रपति केल्विन कूलिज की तस्वीर साफ तौर पर अंकित की गई थी। उस दौर में भी इस कदम को लेकर पूरे देश में बहुत ही भारी राजनीतिक बवाल और तीखा विवाद खड़ा हुआ था। दरअसल, उन्होंने अटठारह सौ छाछठ के बने पुराने कानून की एक बहुत बड़ी तकनीकी कमी यानी लूपहोल का बेहद चालाकी से फायदा उठाया था। उस पुराने कानून में बहुत ही स्पष्ट शब्दों में यह लिखा गया था कि किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को अमेरिकी सरकारी करेंसी, कागजी नोट, बॉन्ड या अन्य सिक्योरिटीज पर बिल्कुल नहीं छापा जाएगा। यह कानून मुख्य रूप से देश के गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद इसीलिए बनाया गया था ताकि कोई भी शक्तिशाली नेता पद पर रहते हुए देश के पैसे पर खुद का प्रचार न कर सके। लेकिन उस पुराने कानून को लिखते समय अधिकारी उसमें सिक्कों यानी कॉइंस शब्द का उल्लेख करना पूरी तरह भूल गए थे, जिसका तत्कालीन राष्ट्रपति ने पूरा फायदा उठा लिया।

सिक्कों के दुरुपयोग को रोकने के लिए संसद ने बाद में बनाए थे बेहद सख्त और नए नियम

इस पुरानी घटना से सबक लेते हुए साल दो हजार पांच में अमेरिकी संसद ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया और प्रेसिडेंसियल वन डॉलर कॉइन एक्ट नामक एक नया कानून पूरी तरह से पास कर दिया। इस नए कानून के जरिए विशेष रूप से राष्ट्रपतियों की तस्वीर वाले सिक्कों के लिए तीन बेहद साफ और कड़े नियम तय किए गए:

  • इस विशेष राष्ट्रीय श्रृंखला के तहत केवल उन्हीं राष्ट्रपतियों को शामिल किया जा सकता है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं यानी केवल दिवंगत नेता ही इसके पात्र होंगे।

  • किसी भी पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाने के कम से कम दो वर्ष की लंबी अवधि बीत जाने के बाद ही उनकी याद में कोई नया सिक्का जारी किया जा सकता है।

  • देश का कोई भी जीवित या वर्तमान समय में पद पर बना हुआ राष्ट्रपति इस पूरी श्रृंखला का हिस्सा किसी भी कीमत पर नहीं बन सकता है। इस नए कानून को बनाने का मुख्य मकसद यही था कि देश की मुद्रा को लेकर किसी भी प्रकार का राजनीतिक विवाद पैदा न हो और सरकारी धन का इस्तेमाल किसी भी नेता के निजी राजनीतिक प्रचार के लिए न किया जा सके।

नोट के साथ-साथ अब विशेष सिक्के पर भी ट्रम्प की तस्वीर लगाने की चल रही है समानांतर तैयारी

देश की आजादी की इस ढाई सौवीं वर्षगांठ के बड़े मौके पर केवल नोट ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ट्रम्प की छवि वाला एक डॉलर का विशेष सिक्का जारी करने की भी समानांतर तैयारियां बहुत तेजी से चल रही हैं। अमेरिकी टकसाल यानी यूएस मिंट ने इस विशेष सिक्के के कई बेहतरीन डिजाइन पूरी तरह से तैयार कर लिए हैं और उनके कुछ नमूने भी आधिकारिक तौर पर बना लिए हैं। हालांकि, यह सिक्का भी अभी तक आम जनता के लिए बाजार में नहीं आ सका है। इस सिक्के की पूरी डिजाइनिंग प्रक्रिया लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन इसे बाजार में उतारने के लिए मिलने वाली अंतिम मंजूरी अभी भी अधर में लटकी हुई है।

इस देरी की मुख्य वजह साल दो हजार पांच में बनाया गया वही सख्त राष्ट्रपति सिक्का कानून है। हालांकि, इस मामले पर ट्रम्प प्रशासन का अपना एक अलग कूटनीतिक तर्क है। प्रशासन का कहना है कि यह नया सिक्का दो हजार पांच वाली पुरानी राष्ट्रपति सिक्का योजना के अंतर्गत नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि इसे अमेरिका की स्थापना की ढाई सौवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तैयार किए जा रहे एक बिल्कुल विशेष और अलग स्मारक सिक्के की श्रेणी में रखा गया है। दूसरी तरफ, देश के सिक्कों की समीक्षा करने वाली मुख्य सरकारी विशेषज्ञ समिति ने इस पूरे कदम का बहुत ही कड़ा विरोध किया है। समिति के सदस्यों का साफ कहना है कि किसी भी मौजूदा और जीवित राष्ट्रपति की तस्वीर वाले सिक्के जारी करना अमेरिकी इतिहास की महान लोकतांत्रिक परंपराओं के पूरी तरह खिलाफ है। लेकिन इस कड़े विरोध के बाद भी देश के ट्रेजरी विभाग और यूएस मिंट ने अपनी तैयारियों को बिल्कुल नहीं रोका है और वे इस प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि वर्तमान में स्थिति यह बनी हुई है कि ट्रम्प के सिक्के का पूरा डिजाइन और उसके वास्तविक नमूने बनकर पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें बस अब संसद और प्रशासन की अंतिम हरी झंडी मिलने का इंतजार है।

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