एजेंसी, लंदन। UK Declares IRGC Terrorist : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद बड़ी और युगांतरकारी खबर सामने आ रही है। यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) ने ईरान की सबसे प्रभावशाली और सर्वशक्तिशाली सुरक्षा इकाई, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को आधिकारिक तौर पर एक आतंकवादी संगठन घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाए गए इस अत्यंत सख्त कदम के बाद, अब वहां की संसद से औपचारिक मंजूरी मिलते ही देश के भीतर आईआरजीसी का किसी भी रूप में समर्थन करना, उसे वित्तीय या रणनीतिक सहायता प्रदान करना अथवा उसके पक्ष में प्रचार-प्रसार करना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी का अपराध माना जाएगा। इस नए कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति को अधिकतम 14 वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
UK government says an Iran-backed group was behind attacks on Britain’s Jewish community and bans Iran’s powerful IRGC, reports AP. pic.twitter.com/Nj1Zg73HQa
— Press Trust of India (@PTI_News) July 13, 2026
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्पन्न खतरों के मद्देनजर उठाया गया कदम
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने इस अभूतपूर्व कार्रवाई के पीछे के ठोस कारणों को स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ताओं के अनुसार, ब्रिटिश खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को इस बात के पर्याप्त एवं पुख्ता प्रमाण हाथ लगे हैं कि यह ईरानी संगठन लगातार ऐसी गुप्त गतिविधियों में लिप्त रहा है जो सीधे तौर पर ब्रिटेन की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं। इसी वजह से देश की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाने का फैसला किया है, जिससे भविष्य में विदेशी ताकतों के नापाक इरादों को नाकाम किया जा सके।
शत्रुतापूर्ण हरकतों और पत्रकारों को निशाना बनाने की साजिशों का पर्दाफाश
गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा बल आईआरजीसी पर ब्रिटेन की धरती पर कई तरह की गैर-कानूनी और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को संचालित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें सबसे प्रमुख रूप से लंदन से प्रसारित होने वाले प्रसिद्ध ईरान इंटरनेशनल टेलीविजन चैनल के 2 वरिष्ठ पत्रकारों की हत्या करने अथवा उन्हें नुकसान पहुंचाने की एक बेहद खतरनाक कथित साजिश शामिल है। इसके अतिरिक्त, ब्रिटेन के महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे और सरकारी वेबसाइटों पर किए गए कई बड़े साइबर हमलों के पीछे भी इसी संगठन का हाथ होने की बात सामने आई है। ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने इस विषय पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार विदेशी शक्तियों के इशारे पर देश के भीतर अशांति फैलाने वाली किसी भी ताकत को बर्दाश्त नहीं करेगी और उपलब्ध अकाट्य साक्ष्यों के आधार पर देशहित की रक्षा के लिए यह प्रतिबंध लगाना अत्यंत अनिवार्य हो गया था।
जानिए क्या है आईआरजीसी और कितना व्यापक है इसका प्रभाव
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के इतिहास और उसकी संरचना को समझना बेहद जरूरी है। इस संगठन की नींव वर्ष 1979 में हुई ऐतिहासिक ईरानी इस्लामी क्रांति के फौरन बाद रखी गई थी। वर्तमान समय में यह ईरान की पारंपरिक सेना से इतर, वहां की सबसे शक्तिशाली सैन्य, आर्थिक और सुरक्षा संस्थाओं में से एक बन चुकी है, जो सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता के प्रति उत्तरदायी है। इस बल का कार्यक्षेत्र केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशों में खुफिया अभियानों को अंजाम देने, मध्य-पूर्व के विभिन्न देशों में सक्रिय अपने सहयोगी समूहों का संचालन करने तथा पूरी दुनिया में ईरान के राजनैतिक और मजहबी प्रभाव को आक्रामक रूप से बढ़ाने के लिए जाना जाता है।
खुफिया अभियानों और छद्म युद्ध नेटवर्क पर कड़ा प्रहार
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय की एक अन्य वरिष्ठ मंत्री एंजेला ईगल ने आईआरजीसी की वास्तविक प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस बल को केवल एक सामान्य सैन्य टुकड़ी के रूप में देखना भारी भूल होगी, क्योंकि यह वास्तव में ईरान की पूरी सुरक्षा और दमनकारी व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ है। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि यह संगठन खुफिया ऑपरेशनों और अपने व्यापक छद्म (प्रॉक्सी) नेटवर्क के जरिए दूसरे देशों की आंतरिक शांति को भंग करने का काम करता है। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी इस नए कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद देश की पुलिस और जांच एजेंसियों को उन राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करने की असीमित कानूनी शक्तियां प्राप्त हो जाएंगी, जो विदेशी सरकारों के इशारे पर ब्रिटेन के हितों को चोट पहुंचाते हैं।
ईरान से जुड़ा एक और संदिग्ध संगठन भी आया पाबंदी के दायरे में
ब्रिटेन की सरकार ने इस बड़ी कार्रवाई के दौरान केवल आईआरजीसी पर ही प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि इसके साथ ही ईरान समर्थित एक अन्य खतरनाक संगठन ‘इस्लामिक मूवमेंट ऑफ कंपेनियंस ऑफ द राइट’ (आईएमसीआर) को भी काली सूची में डाल दिया है। सुरक्षा एजेंसियों का यह संगीन आरोप है कि इस प्रतिबंधित संगठन ने पिछले कुछ समय में ब्रिटेन के भीतर रहने वाले यहूदी और इजरायली समुदायों को विशेष रूप से निशाना बनाया है। साथ ही, फारसी भाषा के स्वतंत्र मीडिया संस्थानों पर भी कई जानलेवा हमले किए गए हैं। इस संगठन की हिंसक हरकतों का सबसे बड़ा उदाहरण लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में देखने को मिला था, जहां इस समूह के उग्रवादियों ने सामाजिक सेवा में लगी 4 एंबुलेंसों को पूरी तरह से आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद से ही यह संगठन सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था।
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