एजेंसी, नई दिल्ली। June Financial Changes : हर महीने की तरह इस बार भी जून की शुरुआत देश के आम नागरिकों के जीवन और उनकी जेब पर सीधा असर डालने वाले कई बड़े वित्तीय बदलावों के साथ हो रही है। चाहे आप एक नौकरीपेशा कर्मचारी हों, घर खरीदने-बेचने की योजना बना रहे निवेशक हों या फिर रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ता, एक जून से लागू होने जा रहे ये नए नियम आपके बजट को प्रभावित करने वाले हैं। इस बार बैंकिंग, टैक्स, डिजिटल पेमेंट और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नियमों में बहुत बड़े स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि आगामी महीने से आपकी वित्तीय जिंदगी में क्या-क्या मुख्य बदलाव होने जा रहे हैं।
यूपीआई पेमेंट स्क्रीन पर दिखेगा बैंक रिकॉर्ड वाला असली नाम, डिजिटल धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
देश में लगातार बढ़ते जा रहे डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए सरकार और बैंकिंग नियामक संस्थाएं एक बेहद सुरक्षित प्रणाली लागू करने जा रही हैं। नए नियम के तहत अब जब भी कोई उपभोक्ता किसी दुकान पर क्यूआर कोड को स्कैन करेगा या किसी के मोबाइल नंबर पर सीधे पैसे ट्रांसफर करेगा, तो उसके मोबाइल स्क्रीन पर सामने वाले व्यक्ति का वही असली नाम स्पष्ट रूप से दिखाई देगा जो उसके बैंक खाते के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। अब तक कई मामलों में शातिर ठग अपनी पसंद का कोई भी फर्जी नाम या टैग इस्तेमाल करके लोगों को आसानी से धोखा दे देते थे। इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद गलत पहचान बनाकर की जाने वाली डिजिटल ठगी पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो जाएगी और ऑनलाइन लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
15 जून तक एडवांस टैक्स की पहली किस्त चुकाना अनिवार्य, नए नियमों के तहत होगी प्रक्रिया
जून महीने का सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक वित्तीय कार्य देश के करदाताओं के एडवांस टैक्स भुगतान से जुड़ा हुआ है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, जिन भी करदाताओं की अनुमानित वार्षिक टैक्स देनदारी दस हजार रुपये से अधिक बनती है, उन्हें हर हाल में आगामी 15 जून तक अपने एडवांस टैक्स की पहली किस्त सरकारी खजाने में जमा करानी होगी। इस बार यह पूरी प्रक्रिया नए आयकर कानून 2025 और आयकर नियमों 2026 के तहत संचालित की जाएगी। यदि कोई करदाता इस तय समय सीमा के भीतर अपनी किस्त का भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे नियम के अनुसार प्रति माह 1 फीसदी की दर से भारी ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।
नौकरीपेशा वर्ग को मिली बड़ी राहत, बच्चों के भत्ते और एचआरए छूट के दायरे में हुआ इजाफा
पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन करने वाले मध्यमवर्गीय और नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए सरकार ने इस बार राहत के कुछ बड़े कदम उठाए हैं। कर्मचारियों को अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाले एजुकेशन भत्ते पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को भारी बढ़ोतरी के साथ 3,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा तय कर दिया गया है, जो कि पहले बेहद कम हुआ करती थी। इसी तरह, बच्चों के हॉस्टल भत्ते पर मिलने वाली छूट के दायरे को भी बढ़ाकर अब 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इसके अलावा देश के प्रमुख विकासशील शहरों जैसे बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी 50 फीसदी हाउस रेंट अलाउंस छूट वाले विशेष शहरों की सूची में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है, जिससे इन शहरों में किराए के मकानों में रहने वाले लाखों कर्मचारियों को अब पहले से कहीं ज्यादा टैक्स बचत का सीधा फायदा मिल सकेगा।
एटीएम से कैश निकालना और बैंकिंग सेवाएं हो सकती हैं और अधिक महंगी
आगामी महीने में देश के कुछ प्रमुख बैंक अपने ग्राहकों को दी जाने वाली कुछ विशेष सेवाओं पर लगने वाली फीस और सर्विस चार्ज में बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद ग्राहकों को एटीएम से अतिरिक्त कैश निकासी करने, मिनी स्टेटमेंट निकालने और बैंक बैलेंस चेक करने जैसी सामान्य सेवाओं के लिए भी पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ सकता है। अलग-अलग सरकारी और निजी बैंकों की यह शुल्क सूची भिन्न हो सकती है, इसलिए आम ग्राहकों को अपनी जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए अपने संबंधित बैंक की नई गाइडलाइंस और सर्विस चार्ज की लिस्ट को एक बार जरूर ध्यान से देख लेना चाहिए।
सीधे यूपीआई के जरिए मिल सकेगा पीएफ का पैसा, निकासी की प्रक्रिया होगी बेहद तेज
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने करोड़ों अंशधारकों को एक बेहद शानदार और आधुनिक तकनीकी सौगात देने जा रहा है। विभाग की तरफ से जल्द ही सीधे यूपीआई के माध्यम से पीएफ की राशि निकालने की एक बेहद सरल सुविधा शुरू की जा सकती है। इस नए डिजिटल सिस्टम के पूरी तरह चालू हो जाने के बाद नौकरीपेशा लोगों को अपने पीएफ खाते से एडवांस या अंतिम पैसा निकालने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और क्लेम की गई राशि पहले से कहीं ज्यादा तेज गति से सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिस्टम की तकनीकी टेस्टिंग और ट्रायल का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
‘एलपीजी’, सीएनजी और पीएनजी की नई दरों पर टिकीं आम उपभोक्ताओं की निगाहें
हर महीने की पहली तारीख की स्थापित परंपरा के अनुसार, इस बार भी देश की बड़ी तेल और गैस कंपनियां कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों की समीक्षा करके ‘एलपीजी’, सीएनजी और पीएनजी के नए दामों की घोषणा करेंगी। ज्ञात हो कि पिछले महीने ही 19 किलोग्राम वाले ‘कमर्शियल’ गैस सिलेंडर की कीमतों में काफी अच्छी-खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसने व्यापारियों और होटलों के बजट को बिगाड़ दिया था। ऐसे में इस बार घरेलू और ‘कमर्शियल’ दोनों ही क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की नजरें इस बात पर टिकी हुई हैं कि तेल कंपनियां इस बार गैस की कीमतों में कटौती करके आम जनता को राहत देती हैं या फिर महंगाई का बोझ और बढ़ता है।
पैन कार्ड के नियमों में हुआ बड़ा फेरबदल, बड़े प्रॉपर्टी लेनदेन पर बढ़ेगी कतर
देश में उच्च मूल्य के बड़े नकद लेनदेन से जुड़े नियमों को पहले से काफी व्यवहारिक और कुछ मामलों में बेहद सख्त बना दिया गया है। नए बदलाव के तहत अब सामान्य परिस्थितियों में 50,000 रुपये से अधिक की नकदी बैंक में जमा करने पर पैन कार्ड की अनिवार्य आवश्यकता को हटा दिया गया है। इसके साथ ही, किसी अचल संपत्ति या प्रॉपर्टी की बिक्री के कुछ विशेष मामलों में पैन दिखाने की पुरानी सीमा को 10 लाख रुपये से सीधे बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि, बड़े स्तर पर होने वाले काले धन के लेनदेन को रोकने के लिए सरकार ने अपनी निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किया है। अब 45 लाख रुपये से अधिक की किसी भी प्रॉपर्टी डील, गिफ्ट डीड या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के दस्तावेजों में पैन नंबर दर्ज करना पूरी तरह से अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, यदि कोई व्यक्ति साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा की नकद निकासी करता है, तो बैंक द्वारा उसकी पूरी रिपोर्ट सीधे जांच एजेंसियों को भेजी जाएगी।
सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य हुए घरेलू मॉड्यूल, बढ़ सकती है शुरुआती लागत
देश के ग्रीन एनर्जी और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी 1 जून से एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा नियम प्रभावी होने जा रहा है। सरकार द्वारा समर्थित, वित्तीय सब्सिडी प्राप्त और नेट मीटरिंग की व्यवस्था पर आधारित जितने भी नए सोलर प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे, उन सभी में अब केवल एएलएमएम की आधिकारिक सूची में शामिल स्वीकृत सोलर मॉड्यूल का ही इस्तेमाल करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस नियम को लागू करने की तय समय सीमा में अब किसी भी प्रकार की कोई अतिरिक्त छूट या मोहलत नहीं दी जाएगी। हालांकि, इस कड़े कदम के कारण शुरुआती दौर में सोलर सिस्टम लगवाने की लागत में कुछ बढ़ोतरी जरूर देखी जा सकती है, लेकिन सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में सौर उपकरणों की गुणवत्ता को बनाए रखना और पूरी तरह से घरेलू उत्पादन व आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देना है।
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