एजेंसी, इंदौर। BRICS Summit : भारत इस साल दुनिया के सबसे मजबूत और प्रभावशाली वैश्विक संगठनों में से एक, ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता करने जा रहा है। इसी सिलसिले में मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ और प्रमुख शहर इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक का आयोजन किया जा रहा है। देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इस भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की पूरी रूपरेखा देश के सामने रखी।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि ब्रिक्स संगठन की स्थापना साल 2006 में हुई थी और अपने शानदार सफर को तय करते हुए आज यह समूह 11 सदस्य देशों तथा 10 साझेदार देशों के साथ मिलकर पूरी दुनिया के सबसे असरदार और ताकतवर मंचों में गिना जाता है। अगर दुनिया के नक्शे पर देखा जाए तो कृषि और खाद्य उत्पादन के मामले में यह समूह बहुत बड़ी हैसियत रखता है, क्योंकि पूरे विश्व की लगभग 42 प्रतिशत खेती योग्य भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत कुल अनाज व खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास मौजूद है।
ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं हैं:
1. खाद्य सुरक्षा, पोषण और किसानों की आजीविका
2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग
3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि
4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी– माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी pic.twitter.com/6dq2KCwZjH
— Office of Shivraj (@OfficeofSSC) June 8, 2026
तीन बार पहले भी अध्यक्षता कर चुका है भारत
कृषि मंत्री ने इस मंच के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में जो भी फैसले और आपसी समझौते होते हैं, उनका सीधा असर पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा और अनाज व्यवस्था पर पड़ता है। भारत के लिए इस समूह का नेतृत्व करना कोई नया अनुभव नहीं है, बल्कि इससे पहले भी देश ने साल 2012, साल 2016 और साल 2021 में ब्रिक्स सम्मेलनों की बेहद सफल अध्यक्षता संभाली है। इसी सफल नेतृत्व के दौरान साल 2016 के सम्मेलन में ‘ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच’ जैसी एक बेहद प्रगतिशील और बड़ी वैश्विक पहल की नींव भी रखी गई थी।
नीतियां बनाने में छोटे और गरीब किसान ही मुख्य केंद्र
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में साफ किया कि ब्रिक्स के वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष समूह ने इस सम्मेलन की तैयारी को लेकर अब तक 8 दौर की महत्वपूर्ण बैठकें पूरी की हैं। इन शुरुआती चर्चाओं में मुख्य रूप से दुनिया भर में अनाज की उपलब्धता यानी खाद्य सुरक्षा, मछली पालन और पशुपालन जैसे जरूरी विषयों पर बहुत ही बारीकी से विमर्श किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी सरकार और इस संगठन की प्रत्येक नीति के मूल केंद्र में हमेशा छोटे और कम जमीन वाले सीमांत किसान ही रहते हैं, क्योंकि उनकी अपनी बहुत सी जमीनी समस्याएं हैं।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह रहेगा कि दुनिया भर में हो रहे नए कृषि अनुसंधानों और वैज्ञानिक खोजों का सीधा आर्थिक लाभ इन छोटे किसानों के खेतों तक पहुंचे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक इनकी पहुंच को बेहद सुगम और आसान बनाया जा सके और बैंकों से मिलने वाले कृषि ऋण का प्रवाह भी पूरी तरह से इन गरीब किसानों की तरफ बढ़े। बैठक में किसानों की आमदनी को दोगुना करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, आजीविका के साधनों को सुरक्षित करने और पर्यावरण के अनुकूल सतत कृषि विकास पर सबसे ज्यादा गंभीर चर्चा की जाएगी।
पहली बार मंत्री स्तर पर हो रही है यह महाबैठक
इंदौर शहर में आयोजित होने जा रहा यह अंतरराष्ट्रीय समागम इस मायने में भी बेहद ऐतिहासिक और खास है क्योंकि ब्रिक्स के इतिहास में पहली बार कृषि मंत्रियों की यह बैठक सीधे मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें मुख्य सदस्य और सहयोगी देशों को मिलाकर दुनिया के लगभग 20 देशों के शीर्ष प्रतिनिधि और मंत्री व्यक्तिगत रूप से भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत के सफल नेतृत्व में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 अलग-अलग सत्रों में 8 बेहद कामयाब और सार्थक बैठकें पूरी की जा चुकी हैं, जो भविष्य की एक मजबूत रूपरेखा तैयार करती हैं।
कृषि विकास के चार मुख्य आधारों पर रहेगा विशेष फोकस
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि के विकास का वास्तविक और सच्चा अर्थ तभी सिद्ध माना जाएगा जब देश के सबसे आखिरी पायदान पर खड़े छोटे किसान की आय में वृद्धि होगी और उसकी आजीविका पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगी। इसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस साल के आयोजन में मुख्य रूप से चार बड़े विषयों पर विशेष काम किया जा रहा है। इनमें पहला विषय—खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका की सुरक्षा है; दूसरा—कृषि व्यापार और आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ाना है; तीसरा—जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए अनुकूलन और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है; और चौथा—कृषि व खाद्य प्रणालियों में नए आविष्कारों, आधुनिक तकनीकों व आपसी साझेदारी को और ज्यादा सशक्त बनाना शामिल है।
कल यानी 9 जून से शुरू होगा बैठकों का सिलसिला
प्रेस वार्ता के दौरान दुनिया के सामने खड़ी जलवायु परिवर्तन की भयंकर वैश्विक चुनौती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि हमें पुनर्योजी कृषि, पारंपरिक सतत पद्धतियों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी बेहद आधुनिक और कंप्यूटर आधारित तकनीकों को हर हाल में छोटे किसानों तक पहुंचाना होगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र के भविष्य को ज्यादा सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए खेती-किसानी में महिलाओं और युवाओं के नेतृत्व को हर स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी महत्वपूर्ण सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 12 जून के दिन “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” के विशेष विषय पर एक बेहद महत्वपूर्ण मंत्री स्तरीय संवाद कार्यक्रम भी रखा गया है।
निर्धारित और तय कार्यक्रम के अनुसार, 9 जून से लेकर 11 जून तक कृषि कार्य समूह से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके तुरंत बाद, 12 जून से 13 जून तक मुख्य कृषि मंत्रियों की महाबैठक का आयोजन होगा। इस दो दिवसीय मुख्य सम्मेलन के दौरान खेतों और गोदामों में होने वाले अनाज के नुकसान को कम करने, पशुपालन के आधुनिकीकरण, मत्स्य पालन के नए तौर-तरीकों और दुनिया भर के किसानों के अधिकारों की रक्षा जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर बहुत ही गंभीर मंथन किया जाएगा।
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बनेगी ‘ब्रिक्स वाटिका’
भारत की प्रकृति से जुड़ी प्राचीन संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए इस भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान एक बेहद अनूठी पहल की जा रही है। सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी सदस्य देशों के मंत्रियों और विदेशी प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता से इंदौर में एक विशेष “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण किया जाएगा। इस वाटिका में सभी विदेशी मेहमान मिलकर सामूहिक रूप से वृक्षारोपण करेंगे, जो पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण और धरती को बचाने के प्रति हमारी साझी प्रतिबद्धता का एक अटूट संदेश देगा।
इसके साथ ही, इंदौर आने वाले तमाम विदेशी मेहमानों और राजनयिकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और वास्तुकला की विरासत से रूबरू कराने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। उन्हें इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा महल, खान-पान के लिए मशहूर छप्पन दुकान और प्राचीन ऐतिहासिक नगरी मांडू जैसे बेहद प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि मंत्री ने पूरा भरोसा और विश्वास जताया है कि इंदौर में होने वाली यह उच्च स्तरीय बैठक ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को एक बिल्कुल नई और ऐतिहासिक ऊँचाई पर ले जाएगी और वैश्विक एजेंडे में दुनिया के करोड़ों छोटे और गरीब किसानों के हितों को बहुत मजबूती के साथ स्थापित करेगी।
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