Rashtrapati Bhavan

राष्ट्रपति भवन में भव्य रक्षा अलंकरण समारोह : देश के जांबाजों को राष्ट्रपति ने किया वीर चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Rashtrapati Bhavan : देश की राजधानी दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में सोमवार को एक बेहद गौरवमयी और भव्य रक्षा अलंकरण समारोह के पहले चरण का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले और अदम्य साहस का परिचय देने वाले भारतीय सेना के वीर जवानों तथा पुलिस कर्मियों को विशिष्ट वीरता पुरस्कारों से नवाजा। देश के इन जांबाजों को सम्मानित करने के लिए आयोजित किए गए इस विशेष समारोह की औपचारिक शुरुआत पूरे आदर के साथ राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान की गूंज के साथ हुई, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों में देशभक्ति का नया जोश भर दिया। इस बेहद खास और ऐतिहासिक पल के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने देश के रक्षकों का हौसला बढ़ाया।

स्क्वाड्रन लीडर आर्शवीर सिंह ठाकुर को मिला वीर चक्र

इस भव्य अलंकरण समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट (जो कि वर्तमान समय में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर कार्यरत हैं) आर्शवीर सिंह ठाकुर को उनकी असाधारण वीरता के लिए प्रतिष्ठित ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया। वायुसेना के इस जांबाज पायलट ने अपने बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल ड्यूटी के दौरान अदम्य साहस, अद्वितीय सूझबूझ और बेमिसाल शौर्य का प्रदर्शन करते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की थी, जिसके लिए उन्हें यह बड़ा राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है।

सागर परिक्रमा की वीरांगनाओं को मिला शौर्य चक्र

समारोह में भारतीय नौसेना की दो बेहद जांबाज महिला सैन्य अधिकारियों की बहादुरी की गाथा भी गूंजी। नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और रूपा ए. को उनके ऐतिहासिक और बेहद साहसिक ‘सागर परिक्रमा 2’ समुद्री अभियान के दौरान दिखाए गए असाधारण साहस, बेमिसाल समुद्री कौशल, गहरे धैर्य और अटूट सहनशक्ति के लिए देश के बड़े नागरिक और सैन्य सम्मान ‘शौर्य चक्र’ से नवाजा गया। इन दोनों महिला अधिकारियों ने समंदर की जानलेवा और ऊंची लहरों के बीच हफ्तों तक भूखे-प्यासे रहकर देश का मान बढ़ाया था। इसके साथ ही, देश की पूर्वी सीमा यानी अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम और अत्यधिक संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में एक बेहद खुफिया और खतरनाक सैन्य ऑपरेशन के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मनों को धूल चटाने वाले भारतीय सेना के जांबाज मेजर आदित्य प्रताप सिंह को भी राष्ट्रपति द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

छत्तीसगढ़ के पुलिस अधिकारियों और सिख रेजिमेंट के कर्नल को मिला सम्मान

नक्सलवाद के मोर्चे पर देश के भीतर सुरक्षा व्यवस्था कायम रखने वाले जांबाज पुलिस अधिकारियों को भी इस समारोह में उचित सम्मान मिला। छत्तीसगढ़ राज्य के बेहद खतरनाक और घने जंगलों में चलाए गए एक बड़े नक्सल-विरोधी ऑपरेशन के दौरान अद्वितीय बहादुरी, रणनीतिक कौशल और अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के दो प्रखर इंस्पेक्टरों—लक्ष्मण केवट और रामेश्वर प्रसाद देशमुख को देश के प्रतिष्ठित शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इनके अलावा, भारतीय सेना की सबसे पुरानी और पराक्रमी सिख रेजिमेंट की 19वीं बटालियन के जांबाज अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल नितेश भारती शुक्ला को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर असाधारण बहादुरी दिखाते हुए देश की सीमा में घुसपैठ कर रहे 3 खूंखार अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों को अकेले ही मौत के घाट उतारने के लिए शौर्य चक्र से नवाजा गया।

देश के इन वीर योद्धाओं को भी मिले विशिष्ट सैन्य पुरस्कार

अलंकरण समारोह के अगले चरण में भारतीय सेना के नायब सूबेदार सतीश कुमार को उनके द्वारा कर्तव्य पथ पर दिखाए गए अटूट साहस, असाधारण वीरता और देश के प्रति की गई विशिष्ट सेवाओं के सम्मान में ‘वीर चक्र’ प्रदान किया गया। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र और युद्ध के मैदान में अपने अद्भुत कौशल का लोहा मनवाने वाले देश के अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों—लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट, विंग कमांडर (जो अब ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत हो चुके हैं) जॉय चंद्रा, ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा और ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू को भी उनकी असाधारण वीरता, अदम्य साहस और अनुकरणीय कर्तव्य-निष्ठा के लिए वीर चक्र से विभूषित किया गया।

समारोह के अंतिम पड़ाव में देश की सुरक्षा में तैनात राइफलमैन ध्रुबा ज्योति दत्ता और नायक राहुल सिंह को भी उनकी अद्भुत बहादुरी, अनुकरणीय साहस और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए शौर्य चक्र प्रदान किया गया। इनके साथ ही, मेजर शिवंत यादव और लेफ्टिनेंट कर्नल नीतेश भरत शुक्ला को भी उनके द्वारा दिखाए गए असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए की गई विशिष्ट और अमूल्य सेवाओं के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने हाथों से शौर्य चक्र भेंट किया, जिससे पूरा दरबार हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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