India Nuclear Power

भारत अब दुनिया की टॉप-5 सैन्य शक्तियों में शामिल : परमाणु हथियारों की दौड़ में पाकिस्तान को पछाड़ा, रक्षा बजट 92.1 अरब डॉलर पहुंचा

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। India Nuclear Power : वैश्विक सुरक्षा और सैन्य ताकतों पर नजर रखने वाली दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) की ताजा रिपोर्ट में भारत को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और बड़े खुलासे सामने आए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी सामरिक और परमाणु सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है। नए आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान साल की शुरुआत तक भारत के पास कुल परमाणु वारहेड यानी परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर लगभग 190 के स्तर पर पहुंच गई है। इस बड़ी बढ़त के साथ ही भारत ने परमाणु हथियारों के मामले में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ दिया है, जिसकी कुल परमाणु क्षमता अभी भी करीब 170 हथियारों पर ही थमी हुई है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत लगातार अपनी सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने परमाणु हथियारों के बेड़े का आधुनिकीकरण करने में जुटा है।

लंबी दूरी के आधुनिक मिसाइल हथियारों पर भारत का मुख्य फोकस

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय सेनाओं और रक्षा वैज्ञानिकों का पूरा ध्यान अब ऐसी आधुनिक और लंबी दूरी की घातक मिसाइल प्रणालियों को विकसित करने पर केंद्रित हो गया है, जो बेहद सुदूर इलाकों तक सटीक मार करने में सक्षम हों। भारत की इस रणनीतिक तैयारी का मुख्य उद्देश्य अपनी सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित रखना है, ताकि देश के खिलाफ उठने वाली किसी भी बड़ी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

इसी रिपोर्ट के भीतर बीते साल 2025 के दौरान भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर उपजे भीषण सैन्य तनाव का भी विस्तार से जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उस बेहद नाजुक समय में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत एक बेहद आक्रामक और खुफिया सैन्य रणनीति अपनाई थी। इस विशेष अभियान के तहत भारत ने पड़ोसी देश के उन कई महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डों और मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकानों की घेराबंदी कर उन्हें सीधे अपने निशाने पर ले लिया था, जिनकी भूमिका संदिग्ध और सीधे तौर पर परमाणु गतिविधियों से जुड़ी हो सकती थी। हालांकि, संस्था ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की भी सराहना की है कि दोनों ही देशों के जिम्मेदार नेतृत्व ने समय रहते सूझबूझ का परिचय दिया और हालात को और अधिक बिगड़ने या किसी बड़े युद्ध में तब्दील होने से पहले ही संभाल लिया था। इस तनाव के दौरान पहली बार दोनों सेनाओं द्वारा डिजिटल युद्ध प्रणालियों यानी साइबर ऑपरेशनों का भी खुलकर उपयोग किया गया, जो आज के दौर में युद्ध लड़ने की बदलती हुई आधुनिक तकनीक को साफ तौर पर दर्शाता है।

रक्षा खर्च के मामले में दुनिया के टॉप-5 देशों की सूची में भारत शामिल

सिपरी के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, भारत पूरी दुनिया के भीतर अपनी सेनाओं और रक्षा तंत्र पर सबसे ज्यादा धन खर्च करने वाले शीर्ष 5 देशों के कुनबे में मजबूती से बना हुआ है। बीते साल 2025 के दौरान देश का कुल रक्षा बजट बढ़कर 92.1 अरब डॉलर के विशाल स्तर पर पहुंच गया है, जो कि इसके पिछले साल के खर्च की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत की एक बहुत बड़ी और रिकॉर्डतोड़ बढ़ोतरी को दर्शाता है। अगर पूरी दुनिया में सैन्य खर्च के ग्राफ को देखा जाए, तो बजट के मामले में भारत से आगे अब केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी जैसे बेहद संपन्न देश ही बचे हैं।

इसके अलावा, साल 2021 से लेकर साल 2025 की चार वर्षीय लंबी अवधि के दौरान भारत दुनिया की सबसे आधुनिक रक्षा प्रणालियों और हथियारों की खरीद करने वाला दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश भी बना रहा। पूरी दुनिया में होने वाले कुल रक्षा सामानों और हथियारों के आयात में अकेले भारत की कुल हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत के करीब दर्ज की गई है, जो भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण की रफ्तार को बयां करती है।

पाकिस्तान भी चुपके से बढ़ा रहा है अपनी सैन्य क्षमताएं

दूसरी तरफ, पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी साल 2025 के दौरान चुपके-चुपके नई परमाणु प्रणालियों और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों के विकास पर अपना काम लगातार जारी रखा है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का ऐसा अनुमान है कि आने वाले अगले 10 सालों यानी एक दशक के भीतर पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी करने की पुरजोर कोशिश कर सकता है।

सिपरी की रिपोर्ट कहती है कि इस समय दुनिया में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल सहित कुल 9 देश ऐसे मौजूद हैं जो पूरी तरह से परमाणु शक्ति से संपन्न हैं। आज के इस अशांत दौर में ये सभी परमाणु ताकत वाले देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पारंपरिक सेनाओं से ज्यादा अपने इन घातक परमाणु हथियारों पर बहुत अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।

दुनिया भर में मौजूद कुल 12,187 परमाणु हथियारों का खतरनाक आंकड़ा

इस अंतरराष्ट्रीय शोध रिपोर्ट में दुनिया भर के घातक हथियारों की कुल संख्या को लेकर भी बेहद चौंकाने वाला अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक पूरी पृथ्वी पर कुल 12,187 परमाणु हथियार मौजूद होने की आशंका है। इन विनाशकारी हथियारों में से करीब 9,745 हथियार पूरी तरह से विभिन्न देशों के सक्रिय सैन्य भंडारों में सुरक्षित रखे हुए हैं, जबकि लगभग 4,012 परमाणु वारहेड को दुनिया भर की सेनाओं ने हर पल मुस्तैद रहने वाले अपने लड़ाकू विमानों, मिसाइल ठिकानों और जहाजों पर सीधे तौर पर तैनात कर रखा है, जिन्हें सिर्फ एक आदेश पर तुरंत दागा जा सकता है।

अमेरिका, रूस और चीन के बीच मची हथियारों की अंधी होड़

अगर परमाणु शक्ति के वैश्विक संतुलन की बात की जाए, तो आज भी पूरी दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 86 प्रतिशत से ज्यादा का बहुत बड़ा हिस्सा अकेले अमेरिका और रूस जैसे दो महाशक्तियों के पास ही जमा है। ये दोनों ही देश अपनी पुरानी मिसाइलों और परमाणु प्रणालियों को बदलकर उन्हें नई तकनीक से पूरी तरह से लेस करने में अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रहे हैं।

वहीं दूसरी तरफ, एशिया महाद्वीप में चीन भी बहुत ही तीव्र गति से अपने परमाणु हथियारों के बेड़े और सैन्य भंडारों का विस्तार करने में लगा हुआ है। सिपरी के वैज्ञानिकों का अनुमान है कि चीन के पास मौजूद कुल परमाणु वारहेड की संख्या बहुत कम समय में 600 से बढ़कर अब 620 के पार पहुंच चुकी है, जिसने वैश्विक मंच पर हथियारों की एक नई और खतरनाक होड़ को जन्म दे दिया है।

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