एजेंसी, नई दिल्ली। Rahul Gandhi Auto Driver : देश की राजनीति में आम लोगों से सीधे जुड़ने के अपने विशेष अभियान के तहत लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शुक्रवार को अचानक दिल्ली की सड़कों पर काम करने वाले ऑटोरिक्शा चालकों के बीच पहुंचे। उन्होंने दिल्ली के बेहद व्यस्त इलाके बंगाली मार्केट के पास स्थित टोडरमल पार्क में जाकर इन ऑटो चालकों से मुलाकात की। इस बेहद अनौपचारिक मुलाकात के दौरान राहुल गांधी का एक बिल्कुल अलग और अनोखा अंदाज देखने को मिला, जब वे न केवल इन चालकों के साथ जमीन पर बैठे, बल्कि उन्होंने उनकी पहचान मानी जाने वाली खाकी यूनिफॉर्म भी पहनी। राहुल गांधी ने वहां मौजूद मेहनतकश चालकों के साथ करीब आधे घंटे से भी अधिक समय तक बेहद आत्मीय माहौल में बातचीत की और उनकी रोजमर्रा की दिक्कतों को बहुत ही गहराई से समझा।
VIDEO | Delhi: LoP Lok Sabha Rahul Gandhi was seen wearing auto driver’s uniform and taking selfies with children after an interaction with autorickshaw drivers at Todarmal Park, Bengali Market.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/McF6zCOidO
— Press Trust of India (@PTI_News) May 29, 2026
आम जनता के बीच जमीन पर बैठकर साझा किया सादा भोजन
इस बेहद खास और औचक मुलाकात के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रही हैं। पार्क में जब सभी ऑटो चालक दोपहर के समय आराम करने और अपना भोजन करने के लिए एकत्र हुए थे, तभी राहुल गांधी बिना किसी तामझाम और बड़े सुरक्षा घेरे के सीधे उनके बीच पहुंच गए। वे बिना किसी हिचकिचाहट के पार्क की घास पर जमीन पर ही बैठ गए और चालकों के साथ पूरी तरह घुलमिल गए। इस दौरान उन्होंने ऑटो चालकों के साथ मिलकर पूड़ी-सब्जी, दाल, रोटी और सादे भोजन का आनंद लिया। उनके इस बेहद सरल और जमीनी व्यवहार को देखकर वहां मौजूद सभी लोग पूरी तरह से हैरान रह गए और उन्होंने इस पल को अपने लिए एक बेहद यादगार अनुभव बताया।
रोजमर्रा की आर्थिक चुनौतियों और बढ़ते खर्चों पर हुई लंबी चर्चा
मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने पूरी तरह से एक सामान्य नागरिक की तरह ऑटो चालकों से उनकी जीवनशैली और काम करने के हालातों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने चालकों से सीधे सवाल पूछे कि आज के इस दौर में उनकी रोज की औसत कमाई कितनी हो पाती है, लगातार बढ़ते जा रहे घरेलू खर्चों को वे कैसे संभालते हैं और सड़कों पर गाड़ी चलाते समय उन्हें किन-किन प्रशासनिक और व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चालकों की सभी शिकायतों को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना और उनके जीवन को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी सुझावों पर भी लंबी बातचीत की। इस दौरान राहुल गांधी ने चालकों के काम को समझने के लिए कुछ दूरी तक ऑटो की सवारी भी की।
ईंधन की आसमान छूती कीमतों और कमर्शियल गैस के बोझ से दबा है ऑटो चालक
इस मुलाकात का हिस्सा रहे ऑटो चालक अरिंदर कुमार शाह ने बातचीत की अंदरूनी जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने विपक्ष के नेता के सामने देश में लगातार बढ़ती जा रही महंगाई के भारी बोझ का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि किस तरह कमर्शियल ईंधन और खासकर कमर्शियल एलपीजी तथा गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम चालकों की कमर तोड़कर रख दी है। ईंधन के दाम लगातार बढ़ने के कारण अब उनके लिए रोज का गुजारा करना और अपने परिवार का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। चालकों ने कहा कि कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ गैस और गाड़ी के रख-रखाव में ही चला जाता है, जिससे उनके पास बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए बहुत कम पैसे बचते हैं।
बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और भविष्य को लेकर राहुल गांधी ने जताई चिंता
एक अन्य वरिष्ठ ऑटो चालक रमेश प्रसाद ने बताया कि राहुल गांधी ने केवल कामधंधे की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने एक अभिभावक की तरह उनके परिवार की स्थिति की भी पूरी सुध ली। उन्होंने बहुत ही अपनेपन के साथ पूछा कि उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई किस तरह चल रही है, वे किन स्कूलों में जा रहे हैं और उनके पूरे परिवार के खाने-पीने तथा अन्य बुनियादी जरूरतों का खर्च महीने भर में किस तरह से प्रबंधित होता है। चालकों ने उन्हें बताया कि मंदी और काम धीमा होने के कारण वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में काफी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इस बात को सुनकर उन्होंने चालकों को आश्वस्त किया कि वे इन बुनियादी अधिकारों के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।
बीमा सुरक्षा और सरकारी सहायता दिलाने के वादे के साथ संसद में गूंजेगी चालकों की आवाज
सभी ऑटो चालकों की समस्याओं और उनके दर्द को बेहद करीब से महसूस करने के बाद राहुल गांधी ने उनसे एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण वादा किया। उन्होंने सभी चालकों को पूरी तरह से आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इन सभी जायज मांगों, शिकायतों और उनके जीवन से जुड़े तमाम जरूरी मुद्दों को सीधे देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद के भीतर पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। उन्होंने चालकों के लिए एक सुरक्षित बीमा योजना लागू करवाने और सरकार की तरफ से अन्य जरूरी वित्तीय सहायता तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करवाने के लिए सदन के भीतर और बाहर लगातार संघर्ष करने का भरोसा दिया। विपक्ष के नेता से मिले इस बेहद मजबूत और सीधे आश्वासन के बाद दिल्ली के ऑटो चालकों में न्याय की एक नई उम्मीद जगती हुई दिखाई दे रही है।
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