Twisha Sharma

ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो का बड़ा एक्शन : पूर्व न्यायाधीश और उनके बेटे को मिली पांच दिनों की पुलिस रिमांड

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एजेंसी, भोपाल। Twisha Sharma CBI Case : देश की जानी-मानी मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बेहद चर्चित मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही विशेष अदालत ने शुक्रवार को मामले की मुख्य आरोपी और मृतका की सास जो स्वयं एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, गिरिबाला सिंह और ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पांच-पांच दिनों के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष पुलिस रिमांड पर भेजने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिया है। अदालत के इस नए फैसले के बाद अब जांच अधिकारियों को इन दोनों आरोपियों से हिरासत में लेकर बेहद कड़ाई के साथ पूछताछ करने और इस पूरे रहस्यमयी घटनाक्रम की परतों को खोलने का एक बड़ा अवसर मिल गया है। इस दौरान आरोपी पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे वकीलों ने भी अदालत के सामने केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा मांगी गई इस विशेष हिरासत अवधि का किसी भी प्रकार से कोई विरोध या आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

बयानों में भारी विरोधाभास और असहयोग के कारण आमने-सामने बिठाकर होगी कड़ाई से पूछताछ

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस विशेष अदालत के समक्ष अपनी रिमांड अर्जी पेश करते हुए कई बेहद चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के आला अधिकारियों ने अदालत को लिखित में बताया कि आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच में उनका बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। अब तक की शुरुआती पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों द्वारा दिए गए अलग-अलग बयानों और दलीलों में बहुत ही बड़े स्तर पर भारी विसंगतियां और विरोधाभास खुलकर सामने आए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अदालत के सामने यह पुरजोर दलील दी कि इस पूरे मामले के पीछे छिपी हुई असली सच्चाई और गहरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए इन दोनों आरोपियों को एक ही कमरे में आमने-सामने बिठाकर सघन पूछताछ करना कानूनन बेहद आवश्यक हो गया है। इसके साथ ही इस पूरे जघन्य मामले से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण और गायब किए गए साक्ष्यों को ढूंढने के लिए भी आरोपियों की यह पुलिस हिरासत बेहद जरूरी थी।

पूर्व में मिली हिरासत अवधि समाप्त होने पर दोबारा कड़े सुरक्षा घेरे में अदालत में किया गया पेश

इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी समर्थ सिंह पहले से ही पिछले सात दिनों से केंद्रीय जांच ब्यूरो की कड़ी पुलिस रिमांड पर चल रहे थे। शुक्रवार को उनकी वह पुरानी तय कस्टडी अवधि समाप्त हो रही थी, जिसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष टीम ने उन्हें और उनकी मां को बेहद कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच एक साथ दोबारा भोपाल की विशेष अदालत के समक्ष हाजिर किया। दोपहर के करीब बारह बजकर चौंतीस मिनट से लेकर दोपहर दो बजकर आठ मिनट तक यह दोनों मुख्य आरोपी अदालत के मुख्य कक्ष के भीतर ही मौजूद रहे, जहां दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस चलती रही। अदालत से दोबारा पांच दिनों की नई रिमांड मिलने का आदेश जारी होते ही केंद्रीय जांच ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी उन दोनों को अपनी गाड़ियों में बिठाकर वापस अपने मुख्यालय की तरफ रवाना हो गए, जहां उनसे आगे की पूछताछ का नया दौर शुरू किया जाएगा।

फरारी के दिनों के मददगारों और छिपने के गुप्त ठिकानों का पता लगाएगी केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम

विश्वसनीय सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के अनुसार इस नई रिमांड अवधि के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम मुख्य रूप से गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक-दूसरे के ठीक सामने बैठाकर उनके बयानों का मिलान करेगी। जांच एजेंसी के अधिकारी मुख्य रूप से समर्थ सिंह से उन दिनों का पूरा हिसाब-किताब मांगेंगे जब वह पुलिस की पकड़ से दूर भागते फिर रहे थे। एजेंसी इस बात की गहराई से छानबीन करने में जुटी है कि अपनी फरारी के उन गुप्त दिनों के दौरान समर्थ देश के किन-किन हिस्सों और शहरों में छिपे हुए थे और कानून से बचने के लिए उन्हें किन-किन रसूखदार लोगों, रिश्तेदारों या दोस्तों का सक्रिय सहयोग और पनाह मिल रही थी। इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो अब उन सभी मददगारों को भी इस जांच के दायरे में शामिल करने की तैयारी कर रही है।

आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक के जरिए अभिनेत्री के जीवन के अंतिम पलों का तैयार होगा काल्पनिक खाका

इस पूरे रहस्यमयी मौत के मामले को पूरी तरह से सुलझाने और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने अब एक बेहद आधुनिक और उच्च स्तरीय फॉरेंसिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इस विशेष तकनीक के अंतर्गत जांच एजेंसी मृतका ट्विशा शर्मा के जीवन के उन आखिरी बेहद कीमती और संदिग्ध घंटों की हर एक गतिविधि का एक संपूर्ण और सघन वर्चुअल रीक्रिएशन यानी काल्पनिक खाका तैयार करने में जुटी है। इस आधुनिक वैज्ञानिक प्रणाली को अपनाने का मुख्य उद्देश्य इस भयानक घटना के घटित होने के ठीक पहले और उसके तुरंत बाद की हर एक इंसानी हरकत और गतिविधि को मिनट-दर-मिनट के हिसाब से बहुत ही बारिकी के साथ समझना है, ताकि अभिनेत्री की दुखद मौत से जुड़ी तमाम संदिग्ध परिस्थितियों और कारणों की एक बिल्कुल साफ और पारदर्शी तस्वीर देश के सामने आ सके।

पवित्र तीर्थनगरी ऋषिकेश के पावन गंगा तट पर अश्रुपूर्ण आंखों से किया गया अस्थि विसर्जन

एक तरफ जहां इस पूरे मामले को लेकर कानूनी गलियारों और अदालत में बेहद तीखी बहस और जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ मृतका ट्विशा शर्मा के बेहद गमगीन परिजन और उनके करीबी रिश्तेदार शुक्रवार के दिन देश की अत्यंत पवित्र धार्मिक नगरी ऋषिकेश के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर पहुंचे। वहां मौजूद विद्वान पुजारियों की देखरेख में पूरे विधि-विधान, सनातन संस्कृति, पूजा-अर्चनो और सभी आवश्यक धार्मिक रस्मों को निभाते हुए अत्यंत अश्रुपूर्ण आंखों के साथ ट्विशा शर्मा की पवित्र अस्थियों को मां गंगा की बहती हुई पावन जलधारा में विसर्जित कर दिया गया। इस दुखद और भावुक कर देने वाले क्षण के दौरान मृतका के परिवार के सभी लोग अपनी बेटी को याद कर पूरी तरह से टूट चुके थे।

गंगा की लहरों और ऋषिकेश की वादियों से बेटी का था बेहद पुराना और अटूट लगाव

इस अत्यंत भावुक विसर्जन प्रक्रिया के बाद मृतका ट्विशा शर्मा के पिता नवनीधि शर्मा ने रुंधे हुए गले से अपनी बेटी की यादों को साझा करते हुए एक बेहद भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी प्यारी बेटी ट्विशा का इस पावन तीर्थनगरी ऋषिकेश और पतित पावनी मां गंगा के साथ एक बेहद ही गहरा, आध्यात्मिक और अटूट लगाव था। वह जब भी मानसिक शांति की तलाश में होती थी, तो वह अक्सर यहां आकर घंटों तक अकेले ही मां गंगा के शांत किनारों पर बैठी रहती थी और उनकी लहरों को निहारती रहती थी। इस पावन और अलौकिक जगह का उनकी बेटी के पूरे जीवन में एक बेहद ही विशेष और पूजनीय स्थान था, इसलिए उसकी इसी पवित्र भावना और अंतिम इच्छा का पूरा आदर व सम्मान करते हुए उनके पूरे परिवार ने सर्वसम्मति से यह बड़ा निर्णय लिया कि उसकी अस्थियों का विसर्जन इसी परम पावन गंगा नदी में ही किया जाना सबसे उचित होगा।

जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिल जाती तब तक थमेगा नहीं न्याय का यह संघर्ष

अस्थि विसर्जन की धार्मिक रस्मों को पूरा करने के साथ ही पीड़ित परिवार ने देश के कानून और न्याय व्यवस्था पर अपना पूरा भरोसा जताते हुए यह साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। ट्विशा शर्मा के पिता और उनके करीबियों ने बेहद कड़े और संकल्पित शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मासूम बेटी को पूरी तरह से इंसाफ नहीं मिल जाता और उसकी इस असामयिक मौत के जिम्मेदार तमाम दोषियों को उनके किए की कड़ी से कड़ी कानूनी सजा नहीं मिल जाती, तब तक उनका यह न्याय के लिए शुरू हुआ महासंघर्ष और कानूनी लड़ाई इसी तरह बिना थमे और बिना झुके लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि वे इस लड़ाई को देश की सबसे बड़ी अदालत तक लेकर जाएंगे ताकि सच सबके सामने आ सके।

कड़े डिजिटल सबूतों, इंटरनेट रिकॉर्ड और मोबाइल टावर लोकेशंस को खंगालने में जुटे वैज्ञानिक

इस पूरे मामले की शुरुआती जांच में ही केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष साइबर विंग लगातार सभी प्रकार के उपलब्ध डिजिटल सबूतों का बेहद गहराई से तकनीकी अन्वेषण और वैज्ञानिक विश्लेषण करने में जुटी हुई है। ज्ञात हो कि अट्ठाइस मई की बेहद सुबह करीब साढ़े दस बजे केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक बड़ी टीम अचानक आरोपी गिरिबाला सिंह के आलीशान आवास पर धमक पड़ी थी, जहां घर के भीतर बने एक बंद कमरे में उनसे लगातार सात घंटे से भी अधिक समय तक बेहद कड़े और तीखे सवाल-जवाब पूछे गए थे और उनके संतोषजनक उत्तर न मिलने के बाद उन्हें कानूनन गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच एजेंसी ने पच्चीस मई की देर रात ही इस पूरे मामले में अपनी औपचारिक और मुख्य प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। पिछले तीन दिनों से लगातार जांच टीम पूरे घटनाक्रम की बिखरी हुई कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए लगातार घटना स्थल का मुआयना कर रही है। मौके पर किए गए गहन निरीक्षण के दौरान जांच एजेंसी को ऐसे कई पुख्ता और बड़े संकेत मिले हैं, जिनसे यह साफ तौर पर आशंका पैदा होती है कि वारदात के बाद मुख्य सबूतों और घटनास्थल के साथ बहुत ही सोचे-समझे तरीके से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम अब दोनों आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, उनके मोबाइल फोन की टावर लोकेशन और तमाम उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की अत्यंत सूक्ष्मता से जांच कर रही है ताकि यह पूरी तरह साफ हो सके कि घटना की उस खौफनाक रात को इन आरोपियों ने किन-किन बाहरी लोगों से फोन पर बातचीत की थी और मौत की खबर सामने आने के बाद मुख्य घटनास्थल के भीतर क्या-क्या संदिग्ध बदलाव किए गए थे।

आधुनिक थ्री-डी मैपिंग और वाई-फाई लॉग के जरिए तैयार हो रहा है अभिनेत्री का डिजिटल अवतार

केंद्रीय जांच ब्यूरो के बेहद उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली तकनीकी जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी ने आरोपियों के उस तीन मंजिला आलीशान मकान के भीतर मृतका ट्विशा शर्मा के हर एक मूवमेंट यानी उनकी आवाजाही का एक बेहद पुख्ता डिजिटल ट्रैक और सटीक रूट मैप तैयार कर लिया है। इस जटिल वैज्ञानिक कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिए घर के भीतर और आस-पास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, मोबाइल फोन के संपूर्ण डेटा, वाई-फाई के इंटरनेट लॉग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कमरों की अत्याधुनिक फॉरेंसिक थ्री-डी मैपिंग को एक साथ एक अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में पूरी तरह से जोड़ दिया गया है। जांच एजेंसी इस समय उस बड़े मकान के भीतर ट्विशा की आखिरी मौजूदगी, उनकी अंतिम गतिविधियों और उनके संपर्कों के वास्तविक समय चक्र का एक बिल्कुल सटीक क्रम तैयार करने में पूरी ताकत से जुटी हुई है।

इस पूरी तकनीकी और वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो के डिजिटल विशेषज्ञ मृतका ट्विशा शर्मा का एक पूर्ण रूप से हूबहू दिखने वाला डिजिटल अवतार यानी एक सिम्युलेटेड वर्चुअल मॉडल तैयार कर रहे हैं। इस आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से जांच अधिकारी बहुत ही आसानी से इस बात को लाइव देख और समझ सकेंगे कि असल घटना के घटित होने के ठीक पहले ट्विशा उस बड़े घर के किस विशेष हिस्से या कमरे में मौजूद थीं, उस दौरान कौन-कौन से बाहरी या घर के लोग किन-किन कमरों के भीतर आ रहे थे या वहां से बाहर की तरफ जा रहे थे और किस तय समय पर क्या-क्या शारीरिक या अन्य गतिविधियां संचालित हो रही थीं। जांच एजेंसी सभी कैमरों के ऊपर दर्ज टाइमस्टैंप, आरोपियों की मोबाइल फोन एक्टिविटी और उनके इंटरनेट उपयोग के वास्तविक समय का आपस में मिलान करके एक बेहद सटीक और विस्तृत वर्चुअल वॉकथ्रू तैयार कर रही है, जिससे कि घटना के पहले और बाद के समय में मौजूद संदिग्ध समय के अंतराल, किसी भी प्रकार के गुप्त मूवमेंट और आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों में छिपे हुए सफेद झूठ और विरोधाभास की पोल पूरी तरह से खोली जा सके।

बीस लाख रुपए की बड़ी कीमत के शेयरों को जबरन हड़पने के लिए मां-बेटे मिलकर बनाते थे मानसिक दबाव

इस पूरे हाई प्रोफाइल मामले की गहराई से चल रही जांच-पड़ताल के दौरान दोनों आरोपियों के उत्पीड़न और प्रताड़ना का एक बेहद ही मुख्य और चौंकाने वाला आर्थिक कारण भी खुलकर सामने आया है। जांच में इस बात के बेहद पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि मृतका ट्विशा शर्मा ने अपने करियर की मेहनत की कमाई से देश की कई नामी और बड़ी कंपनियों के करीब बीस लाख रुपए की भारी-भरकम कीमत के शेयर खरीद रखे थे। इन्हीं बेशकीमती शेयरों को पूरी तरह से धोखे या दबाव में अपने नाम पर ट्रांसफर कराने के लिए उनका पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह लगातार ट्विशा के ऊपर कई महीनों से गंभीर मानसिक और शारीरिक दबाव बना रहे थे। ट्विशा शर्मा की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर पांडे के अनुसार, जब ट्विशा की शादी इस परिवार में हुई थी, तो उस समय बाजार में इन सभी शेयरों की कुल वास्तविक कीमत करीब बीस लाख रुपए के आस-पास आंकी गई थी।

इस विवाह के तुरंत बाद ट्विशा अपने पति के साथ विदेश यात्रा के तहत वियतनाम घूमने के लिए गई हुई थीं, लेकिन वहां से वापस भारत लौटने के ठीक बाद ही समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह को किसी तरह यह भनक लग गई कि ट्विशा के नाम पर बाजार में बहुत ही बड़ी मात्रा में कीमती शेयर मौजूद हैं। इस बात की जानकारी मिलते ही दोनों की नीयत पूरी तरह खराब हो गई। जांच में इस बेहद दर्दनाक सच्चाई का भी खुलासा हुआ है कि मौत से कुछ समय पहले ही ट्विशा ने अपनी सगी मां को फोन करके रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई थी। उन्होंने फोन पर साफ शब्दों में कहा था कि उनका पति समर्थ और सास गिरिबाला सिंह मायके से और ज्यादा सोने-चांदी और भारी दहेज लाने की नाजायज मांग को लेकर उनके साथ रोज बर्बरतापूर्वक मारपीट और हाथापाई करते हैं। इसके साथ ही वे दोनों उनके छोटे बच्चे को भी उनसे दूर करने और छीन लेने की लगातार धमकियां देकर उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह से प्रताड़ित और खोखला कर रहे थे, जिसके कारण वे अत्यंत गहरे तनाव में जी रही थीं।

जिस जिला अदालत की सर्वेसर्वा और प्रधान न्यायाधीश रहीं उसी के कटघरे में आरोपी बनकर बिताया समय

इस पूरी घटना का सबसे हैरान और विचलित कर देने वाला पहलू यह रहा कि जो महिला कभी खुद कानून की रक्षक थी, वह आज खुद कानून के शिकंजे में फंसी नजर आई। भोपाल जिले की सर्वोच्च प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के बेहद सम्मानित और रसूखदार पद पर लंबे समय तक तैनात रहीं गिरिबाला सिंह शुक्रवार को उसी भव्य अदालत परिसर के भीतर एक मामूली और लाचार आरोपी की तरह लोहे के कड़े कटघरे में सिर झुकाए खड़ी नजर आईं। वक्त के इस अजीब और खौफनाक चक्रव्यूह को अपनी आंखों के सामने सजीव घटित होते देखकर उस समय अदालत परिसर और कोर्ट रूम के भीतर मौजूद हर एक वकील, कर्मचारी और आम शख्स पूरी तरह से हैरान और खामोश रह गया था। अपने सगे बेटे समर्थ सिंह के साथ करीब डेढ़ घंटे से भी अधिक समय तक अदालत के एक ही संकरे कटघरे में बेबस खड़ी रहीं पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को आखिरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत ने पांच दिनों की सख्त रिमांड पर भेजने का हुक्म सुना दिया।

अगर हम गिरिबाला सिंह के पुराने न्यायिक कार्यकाल के इतिहास पर नजर डालें, तो वह पूरे उन्नीस महीनों तक इस बड़े जिले की प्रधान जिला कोर्ट की मुख्य सर्वेसर्वा और न्यायाधीश के पद पर पूरी हनक के साथ काबिज रह चुकी हैं। पंद्रह जुलाई दो हजार इक्कीस से लेकर अट्ठाईस फरवरी दो हजार तेईस तक का उनका यह लंबा कार्यकाल बेहद प्रभावशाली रहा था, जिस दौरान उन्होंने अपनी इसी अदालत की ऊंची कुर्सी पर बैठकर न जाने कितने ही बड़े-बड़े अपराधियों और लोगों के जीवन व भाग्य का फैसला अपने हस्ताक्षरों से लिखा था, लेकिन आज समय का ऐसा क्रूर उलटफेर देखने को मिला कि वही सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह दोपहर के ठीक बारह बजकर चालीस मिनट से लेकर दोपहर के दो बजकर दस मिनट तक अपने ही सगे बेटे के साथ एक अदने से आरोपी के रूप में चुपचाप खड़ी रहीं। जो महिला कभी भव्य डायस पर बैठकर लोगों को सजा सुनाती थीं, आज वह खुद केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत के कटघरे में अपनी किस्मत और सजा का फैसला होते हुए देख रही थीं।

उच्च न्यायालय ने भी मामले को माना था अत्यंत गंभीर और अग्रिम जमानत याचिका को किया था खारिज

इस पूरे हाई प्रोफाइल मामले की कानूनी बारीकियों और आरोपियों की रिमांड प्रक्रिया को लेकर मृतका ट्विशा शर्मा के परिवार की तरफ से उच्च न्यायालय में पैरवी कर रहे वरिष्ठ और प्रख्यात अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मीडिया के सामने आकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष रखा। उन्होंने साफ तौर पर बताया कि शुक्रवार को विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की इस पांच दिनों की कस्टडी रिमांड का कोई विरोध इसलिए भी नहीं किया क्योंकि इससे पहले देश की उच्च अदालत ने भी इस पूरे मामले की प्रकृति को अत्यंत गंभीर, संवेदनशील और जघन्य अपराध की श्रेणी का माना था। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने आरोपी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत की याचिका को पूरी तरह से खारिज और निरस्त कर दिया था। उच्च अदालत के समक्ष पीड़ित परिवार की तरफ से बहुत ही विस्तार के साथ कई अकाट्य दलीलें और साक्ष्य पेश किए गए थे, जिनमें यह साफ तौर पर रेखांकित किया गया था कि इस पूरे मामले के पीछे छिपे बड़े सच को बाहर लाने और निष्पक्ष जांच को पूरा करने के लिए गिरिबाला सिंह को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद अनिवार्य है। इन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर बहुत ही गहराई से विचार करने के बाद ही उच्च न्यायालय ने आरोपियों को मिलने वाली किसी भी प्रकार की अग्रिम राहत के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया था, जिसके कारण आरोपियों के पास केंद्रीय जांच ब्यूरो की इस जरूरी कस्टडी को चुनौती देने का कोई कानूनी अधिकार शेष नहीं बचा था। पीड़ित परिवार के वकीलों ने साफ कहा कि उन्हें देश की शीर्ष जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है और जल्द ही ट्विशा को पूरा न्याय मिलेगा।

कई जिलों में जज रहने के बाद वर्तमान में भी संभाल रही थीं बड़ा न्यायिक पद, हटाने के लिए लिखा गया पत्र

आरोपी गिरिबाला सिंह के रसूख और समाज में उनकी मजबूत पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने सेवाकाल के दौरान न केवल भोपाल जिले की प्रधान जिला जज रही थीं, बल्कि इससे पहले भी वे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई अन्य बड़े और महत्वपूर्ण जिलों में मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुकी थीं। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके रसूख में कोई कमी नहीं आई थी और वर्तमान समय में भी वे जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग भोपाल-दो के मुख्य अध्यक्ष जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामय पद की कमान संभाल रही थीं। लेकिन बहु की संदिग्ध मौत के मामले में नाम सामने आने और उनकी गिरफ्तारी के बाद अब खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें इस गरिमामय पद से तुरंत हटाने और बर्खास्त करने के लिए शासन को एक बेहद कड़ा पत्र लिख दिया है। इसके साथ ही मृतका ट्विशा शर्मा के पीड़ित परिजनों ने भी राज्य के महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल को एक विशेष पत्र भेजकर यह गुहार लगाई थी कि चूंकि गिरिबाला सिंह अभी भी एक बेहद ऊंचे न्यायिक और प्रशासनिक पद पर आसीन हैं, इसलिए इस पूरे मामले की बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके पद से बर्खास्त किया जाना बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित न कर सकें।

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