एजेंसी, दिल्ली। PM Modi Global Tour : भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच देशों की अपनी बेहद सफल और ऐतिहासिक राजनयिक यात्रा पूरी करने के बाद बृहस्पतिवार को देश की राजधानी दिल्ली वापस लौट आए हैं। इस पांच दिवसीय विदेश दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई मील के पत्थर साबित होने वाले ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री ने अपनी यह महत्वपूर्ण यात्रा पंद्रह मई को शुरू की थी, जिसके तहत उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे प्रभावशाली देशों का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को वैश्विक पटल पर मजबूत करना था, जिसमें उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली है।
STORY | PM Modi returns home after 5-nation tour
Prime Minister Narendra Modi on Thursday landed in the national capital, returning from a five-nation tour during which he signed pacts on energy, defence, and critical minerals.
The prime minister embarked on his tour on May 15,… pic.twitter.com/PHOfrLh9OD
— Press Trust of India (@PTI_News) May 21, 2026
संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड के साथ रणनीतिक व्यापार और भारी निवेश पर सहमति
इस विदेश यात्रा के शुरुआती चरण में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक और रणनीतिक समझौते हुए। पश्चिम एशिया में चल रहे गहरे संकट और तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ एक अत्यंत उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के परिणामस्वरूप भारत के पेट्रोलियम भंडार को बढ़ाने, दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने, रक्षा और समुद्री जहाजरानी के क्षेत्रों में आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमति बनी। इस दौरान अबू धाबी ने भारत के विभिन्न विकास क्षेत्रों में कुल पांच अरब अमेरिकी डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक वादा भी किया। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड पहुंचे, जहां रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए रिकॉर्ड सत्रह समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुई इस वार्ता के बाद दोनों देशों के आपसी संबंधों को एक नए और ऊंचे रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचा दिया गया है। दोनों ही नेताओं ने वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों और विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
स्वीडन और नॉर्डिक देशों के साथ अत्याधुनिक तकनीक तथा स्वच्छ ऊर्जा पर बड़ी चर्चा
अपनी यात्रा के अगले पड़ाव में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन का दौरा किया, जहां भारत और स्वीडन ने भी अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच व्यापार, आधुनिक तकनीक, रक्षा और संस्कृति को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन और व्यापारिक नवाचार को शामिल करते हुए एक बहुत ही महत्वाकांक्षी भविष्य की रूपरेखा दुनिया के सामने पेश की। इसके बाद ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रन फ्रॉस्टडॉटिर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ अलग से विशेष बैठकें कीं। इन बैठकों में मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास, व्यापारिक सुगमता और डिजिटल तकनीकों के आदान-प्रदान के माध्यम से आपसी संबंधों को और ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
नॉर्वे और इटली के साथ हरित साझेदारी और नीली अर्थव्यवस्था का महासंकल्प
इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान भारत और नॉर्वे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपनी ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ को एक नए मुकाम पर पहुँचाया। प्रधानमंत्री मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के बीच हुई वार्ता में न केवल यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्ध स्तर के तनावों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने पर बल दिया गया, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने, हरित परिवहन, अंतरिक्ष विज्ञान, आर्कटिक अनुसंधान और नीली अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई। यहाँ नीली अर्थव्यवस्था से सीधा तात्पर्य हमारे विशाल समुद्री और तटीय संसाधनों के ऐसे समझदारी भरे और सतत उपयोग से है, जिससे पर्यावरण और समुद्री जीवन को बिना कोई नुकसान पहुँचाए देश का आर्थिक विकास किया जा सके, नए रोजगार पैदा किए जा सकें और तटीय इलाकों के लोगों की आजीविका को बेहतर बनाया जा सके। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री इटली पहुंचे, जहाँ उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच के रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, प्रधानमंत्री मोदी को मिले तीन सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस पांच देशों की यात्रा ने न केवल भारत के व्यापारिक और रणनीतिक हितों को साधा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते हुए प्रभाव को भी साबित किया। प्रधानमंत्री मोदी को उनकी उत्कृष्ट वैश्विक सेवा और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के लिए स्वीडन के बेहद प्रतिष्ठित और सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ (डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस) से नवाजा गया। इसके साथ ही, उन्हें नॉर्वे के भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया। यात्रा के आखिरी पड़ाव इटली के रोम में, वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, टिकाऊ और सतत कृषि को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में प्रधानमंत्री मोदी के अनुकरणीय योगदान को सलाम करते हुए संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘एफएओ एग्रीकोला’ पदक से सम्मानित किया, जो पूरे भारतवर्ष के लिए एक अत्यंत गौरव का क्षण है।
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