भारतीय न्यायपालिका

पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय न्यायपालिका का ऐतिहासिक कदम, देश भर की अदालतों को ऑनलाइन सुनवाई के निर्देश

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली। Supreme Court Order : भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दुनिया भर में चल रहे भारी संकट को देखते हुए देश की न्याय प्रणाली को मजबूत और सुचारू बनाए रखने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने देश के सभी उच्च न्यायालयों को ऑनलाइन माध्यम से अदालती कार्यवाहियों का संचालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रधान न्यायाधीश ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उनके द्वारा दिए गए इन दिशा-निर्देशों को देश के ज्यादातर राज्यों के उच्च न्यायालयों ने पूरी गंभीरता से लेते हुए अपने यहाँ लागू भी कर दिया है। यह फैसला तब सामने आया जब दिल्ली की अदालतों में भी पूरी तरह से इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की मांग करने वाली एक जनहित याचिका सर्वोच्च अदालत के सामने पेश की गई थी। इस याचिका पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके बेहतर संचालन के लिए बार और पीठ दोनों की तरफ से स्वैच्छिक और सकारात्मक प्रयासों की बेहद जरूरत है।

अदालतों के आधुनिकीकरण और संकट काल में न्याय की निरंतरता

इस ऐतिहासिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य संकट की इस वैश्विक घड़ी में आम जनता के लिए न्याय के दरवाजे हमेशा खुले रखना है। जब कभी भी देश या दुनिया में किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, तो उसका सीधा असर परिवहन और आम जनजीवन पर पड़ता है। ऐसे में अदालतों को ऑनलाइन मोड पर स्थानांतरित करने से वकीलों और फरियादियों को शारीरिक रूप से अदालत परिसर में मौजूद रहने की बाध्यता से मुक्ति मिल जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय का मानना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाने वाली यह सुनवाई न केवल समय की बचत करेगी बल्कि न्याय व्यवस्था की रफ्तार को भी धीमा नहीं पड़ने देगी। देश भर के विभिन्न राज्यों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य न्यायाधीशों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शुरू कर दिया है।

जिला अदालतों के कामकाज और उच्च न्यायालयों के प्रशासनिक अधिकार

इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित का हवाला देते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु सर्वोच्च अदालत के सामने रखा। वकील ने अनुरोध किया कि देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित सभी जिला न्यायालयों को भी कम से कम आगामी तीन महीनों के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से काम करने का आदेश दिया जाए। इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका की प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए एक बेहद जरूरी बात कही। उन्होंने कहा कि देश की जितनी भी जिला अदालतें हैं, वे सीधे तौर पर अपने संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के प्रशासनिक दायरे और अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। इसलिए जिला अदालतों के संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय लेने का पहला अधिकार वहां के उच्च न्यायालय का है। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने यह भी साफ किया कि वह पहले ही सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से यह अपील कर चुके हैं कि वे अपने अधीन आने वाली निचली अदालतों में भी ऑनलाइन सुनवाई को बढ़ावा दें।

ईंधन की बचत और अनावश्यक खर्चों को कम करने का महासंकल्प

हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक संकट से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए देशवासियों और सभी सरकारी विभागों से ईंधन की बचत करने तथा अनावश्यक खर्चों में भारी कटौती करने की एक विशेष अपील की थी। प्रधानमंत्री की इसी राष्ट्रव्यापी अपील का सम्मान करते हुए और देशहित में कदम उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह क्रांतिकारी रास्ता चुना है। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ने पंद्रह मई को एक आंतरिक बैठक के बाद यह सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था कि सप्ताह के कुछ विशेष दिनों, जैसे सोमवार और शुक्रवार को केवल और केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही मुकदमों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा, माननीय न्यायाधीशों ने पर्यावरण की सुरक्षा और पेट्रोलियम पदार्थों की बचत के लिए व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर सामूहिक रूप से ‘कार पूलिंग’ की बेहतरीन व्यवस्था को अपनाने का एक बहुत ही सराहनीय संकल्प लिया है, जो पूरे देश के प्रशासनिक महकमे के लिए एक बड़ा उदाहरण है।

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