एजेंसी, इस्लामाबाद। Iran US Peace Talks : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को शांत करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस वक्त अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद पहुँचकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ महत्वपूर्ण चर्चा की है। इस बीच, अमेरिका की ओर से नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी पाकिस्तान पहुँच रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में शांति वार्ता की उम्मीदें तेज हो गई हैं।
US negotiators are heading to Pakistan, but Iran said its officials did not plan to meet the Americans to discuss ending the war that has killed thousands of people and roiled global energy markets. Tehran said its concerns would be conveyed to a mediator https://t.co/Iw0IQ8GkF1 pic.twitter.com/iL2qehOMua
— Reuters (@Reuters) April 25, 2026
कूटनीति के केंद्र में ट्रंप के खास सलाहकार
विशेषज्ञों के अनुसार, इन वार्ताओं में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अनुपस्थिति और विटकॉफ व कुशनर की सक्रियता अमेरिकी विदेश नीति में बड़े बदलाव का संकेत है। अब पारंपरिक राजनयिकों के बजाय राष्ट्रपति के निजी और भरोसेमंद सलाहकार सीधी भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान यहाँ दोनों देशों के बीच एक सेतु का काम कर रहा है, क्योंकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ सीधे टेबल पर बैठने के बजाय पाकिस्तान के माध्यम से ‘परोक्ष बातचीत’ को प्राथमिकता देगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद की मुख्य वजह
मौजूदा संकट की सबसे बड़ी जड़ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग माना जाता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नौसेना ने उसके बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखी, तो वह कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को ‘समुद्री डकैती’ करार देते हुए आक्रामक जवाब देने की बात कही है।
तेल आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा पर संकट
तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने हॉर्मुज जलमार्ग को बंद करने की कोशिश की, जिसके जवाब में अमेरिका ने सख्त नाकेबंदी लागू कर दी। यह समुद्री रास्ता दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। पाकिस्तान की कोशिश है कि दोनों पक्षों को किसी ऐसे समझौते पर लाया जाए जिससे वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित न हो और युद्ध जैसी स्थिति को टाला जा सके। फिलहाल सबकी नजरें इस्लामाबाद में होने वाली इन पर्दे के पीछे की वार्ताओं पर टिकी हैं।
ये भी पढ़े : हुगली की लहरों पर प्रधानमंत्री मोदी का कैमरा और नाविकों से संवाद : बंगाल की आत्मा और विकास पर दिया बड़ा संदेश
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


