पीएम आवास योजना कल्याणकारी, निर्माण एजेंसी में कसावट की जरूरत

Blog

आजाद भारत में किसी भी सरकार ने इतनी लोकप्रिय और जन कल्याणकारी योजना नहीं चलाई, जितनी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चला रही है। मध्य प्रदेश में उसे मूर्त रूप देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनके मंत्रिमंडल जी जान से लगा हुआ है। फल स्वरुप करोड़ों बेघर लोगों को घर मिल रहे हैं। जिन लोगों ने कभी सोचा तक नहीं था कि उन्हें अपने जीते जी अपनी खुद की एक छत मयस्सर हो पाएगी। लेकिन आज उनका भी सपना साकार हो रहा है जो लोग झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर थे। अब वह अपने स्वयं के प्लाटों में रहने जा रहे हैं। मध्यवर्गीय संघर्षशील वर्ग भी अब अफॉर्डेबल मकानों मैं पहुंच रहा है। कुल मिलाकर दुनिया में शायद किसी देश में ऐसी कोई सरकार हो जो अपने नागरिकों के लिए ऐसी आवास योजना चल रही हो, जिसका लक्ष्य प्रत्येक बेघर को घर उपलब्ध कराना हो। वह भी ऐसा देश जिसकी आबादी डेढ़ अरब के आंकड़े को स्पर्श करने जा रही है। इस लिहाज से देखा जाए तो प्रधानमंत्री आवास योजना सराहनीय हैं। मध्य प्रदेश में उसे जमीन पर साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव तथा उनका मंत्रिमंडल जो मशक्कत कर रहा है उसके लिए उसे साधुवाद देना बनता है। इस योजना में भले ही कोई कमी ना हो लेकिन जमीनी स्तर पर उतरते समय इसमें नौकरशाही और ठेकेदारों का गठजोड़ इसे तीव्र गति पर चलने से रोक रहा है। हालत यह हैं कि लोगों ने अपने फ्लैट बुक कर दिए हैं। किस्तें देना चालू कर दिया है। लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे हजारों लाखों हितग्राही हैं जो सालों से क्षेत्रीय निर्माण एजेंसियों और निकायों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारियों से अनुनय विनय कर रहे हैं कि हमें जल्दी से जल्दी हमारे फ्लैट उपलब्ध कराए जाएं। इनकी विडंबना यह है कि एक ओर इन्हें किस्तें भरनी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर जिस किराए के मकान में यह लोग रह रहे हैं वहां भी प्रतिमाह किराया भरना पड़ गया है। इस प्रकार कम आय वाला वर्ग आर्थिक संकट की चपेट में आ गया है और एक अच्छी भली योजना आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बनती चली जा रही है। नतीजा यह है कि राजधानी समेत अनेक नगरों में हितग्राही नगर पंचायतों, नगर परिषदों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों में प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होने लगे हैं। यह तस्वीर भाजपा के केंद्र और प्रदेश सरकार के लिए परेशानी पैदा करने वाली है। हालांकि केंद्र सरकार हो अथवा प्रदेश की भाजपा सरकार, दोनों ही अपनी ओर से फंड मुहैया कराने में किसी भी प्रकार की कंजूसी नहीं बरत रही हैं। इसके बावजूद भी यदि प्रधानमंत्री आवास योजना विलंबित हो रही है तो इसके कारण पता लगाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को सख्त रवैया अपनाए जाने की आवश्यकता है। सुनने में आ रहा है कि स्थानीय निकायों और ठेकेदारों के बीच निर्माण संबंधी बिल पास करने को लेकर जहां-जहां भी मतभेद या फिर खींचातानी उत्पन्न होती है, वहां इस तरह के अवांछनीय दृश्य सामने आने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि जितना निर्माण देरी से होता है उतनी ही तेजी से उसकी लागत बढ़ती चली जाती है। इससे सरकार और नागरिक दोनों को ही नुकसान होता है। क्योंकि सरकार तो खजाने से क्षतिपूर्ति कर देती है, लेकिन अंततः उसकी भरपाई विभिन्न करों के रूप में नागरिकों को ही करनी होती है। लिहाजा आवश्यकता इस बात की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण में हो रही देरी की गहरी जांच हो और इसके निर्माण में जो लोग रोड़ा अटका रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। जहां तक राजधानी भोपाल की बात है तो यहां पर भी विभिन्न निर्माण साइट्स पर आंदोलन होते रहते हैं‌। कई बार तो नगर निगम मुख्यालयों पर भी आक्रामक आंदोलन हो चुके हैं। इसके बावजूद भी निर्माण तय समय पर ना हो पाना अनेक सवालिया निशान खड़े करता है। यह एक प्रकार से जनता की नजरों में केंद्र और प्रदेश सरकार की छवि खराब करने का कृत्य भी कहा जा सकता है‌। क्योंकि इसमें कोई शक नहीं है कि कर्मचारियों अधिकारियों में भी विभिन्न विचारधाराओं के लोग होते हैं। इनका मत पार्टी विशेष के पक्ष में सदैव ही बना रहता है। अनेकों बार ऐसा अनुभव भी हुआ है, जब कुछ अधिकारियों कर्मचारियों ने ऐन चुनाव के वक्त पर कुछ ऐसे काम किए हैं, जिससे सरकारों को बैक फुट पर भी आना पड़ गया है। इसलिए आवश्यकता इसी बात की है कि किसी भी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण में गति लाई जाए। जांच इस बात की भी हो कि जब भी कोई आम आदमी नई साइट पर बुकिंग करने जाता है तो उसे परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ता है। हितग्राहियों के अनुभव हैं कि साइट पर मौजूद स्थानीय निकायों के कर्मचारी फ्लैट खाली न होने का दावा करते हैं। लेकिन जब लेनदेन की बात की जाती है तो फिर एक से अधिक अनगिनत फ्लैट उपलब्धता के रूप में सामने आ जाते हैं। जाहिर है हितग्राहियों को फ्लैट प्राप्त करने के लिए अवैध लेनदेन भी करना पड़ रहा है। सरकार की सबसे ज्यादा बदनामी इसी पक्ष से होती है। अतः ऐसे तत्वों की पहचान करना भी आवश्यक है। ताकि भविष्य में सत्ता पर काबिज भाजपा को जनता का यह उलाहना ना सुना पड़े की फ्लैट दिए हैं तो कोई एहसान किया है क्या? बदले में मुंह फाड़ के पैसे लिए हैं उनके कर्मचारियों ने। एक बार फिर लिखने में कोई गुरेज नहीं है कि प्रधानमंत्री आवास योजना बेहद जनकल्याणकारी योजना है। इसमें आने वाली सभी बाधाएं खत्म की जानी चाहिए और जिन लोगों ने प्लॉट बुक कर दिए हैं तथा महीनों, सालों से आवंटन का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें जल्दी से जल्दी फ्लैट उपलब्ध कराए जाना चाहिए। इससे सरकार की सराहना होगी वही आने वाले समय में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को केंद्र और राज्य में फायदा भी पहुंचेगा । वैसे भी अब मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों के निर्वाचन की बारी है। यदि प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैट समय पर हितग्राहियों को मिल जाते हैं, तो लिखने में कोई शंका नहीं कि इसका व्यापक लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलने जा रहा है।

Leave a Reply