
पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई का सपना था कि देश की सभी छोटी बड़ी नदियों को आवश्यकता अनुसार आपस में जोड़कर बाढ़ और सूखे जैसे हालातो से बचने के स्थाई प्रबंध किए जाने चाहिए। अपनी इसी सोच के तहत श्री वाजपेई ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान नदियों को आपस में जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य शुरू किया था। केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार और मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार समेत भाजपा शासित विभिन्न राज्यों की सरकारें इस महत्वपूर्ण योजना को मूर्त रूप देने में जुटी हुई हैं। यही वजह है कि युद्ध स्तर पर विभिन्न राज्यों की छोटी बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इसी योजना के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू होने जा रही है। जिसका आयोजन राजस्थान की राजधानी जयपुर में होगा। यहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव की उपस्थिति विशेष रूप से रहेगी। स्पष्ट कर दें कि यह योजना 75000 करोड़ की लागत से पूरी होने वाली है। इससे मध्य प्रदेश के गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर मालवा, इंदौर शाजापुर, मंदसौर और मुरैना के लगभग 2100 गांव को लाभ मिलेगा। पानी की समस्या मिटेगी तथा सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी। यही नहीं, अनेक जिलों में पीने के पानी की किल्लत भी खत्म होने जा रही है। इन जिलों में श्योपुर, मुरैना और भिंड मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान समेत अनेक उन राज्यों को इन नदियों को जोड़ने का लाभ मिलने जा रहा है, जिन राज्यों से होकर यह नदियां गुजरती हैं। फिलहाल जिस परियोजना का शुभारंभ 17 दिसंबर को होने जा रहा है उसमें पार्वती, काली सिंध और चंबल नदी को जोड़ने का अभियान हाथ में लिया गया है। भविष्य में ऐसी अनेक छोटी बड़ी नदियां आपस में जोड़े जाने को लेकर केंद्रीय और राज्य स्तरों पर अनुभवी लोगों की टीमें काम कर रही हैं। अध्ययन किया जा रहा है कि अनेक जिलों में अत्यधिक वर्षा हो जाने से स्थानीय लोगों को बाढ़, भूमि कटाव जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ता है। वहीं कुछ नदियां ऐसी भी हैं जो कम बारिश के अभाव में सूखी बनी रहती हैं। फल स्वरुप आसपास के इलाके सिंचाई, पेयजल जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं से वंचित बने रहते हैं। इन परेशानियों पर सबसे पहले देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई ने गौर किया था। उन्होंने देश के बड़े-बड़े नेशनल हाईवे और नदियों को जोड़ने का सपना ही नहीं देखा बल्कि उन्हें पूरा करने की ऐतिहासिक शुरुआत भी की थी। यह बात और है कि एक छोटे से मुद्दे को आधार बनाकर उनकी सरकार को चुनावी पराजय का सामना करना पड़ गया था। लेकिन तब तक देशभर की नदियों को आवश्यकता अनुसार आपस में जोड़ने की महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला श्री वाजपेई रख चुके थे और विषय विशेषज्ञों को उनकी यह योजना काफी पसंद आई थी। लिहाजा उनका यह सपना जन-जन का सपना बन गया और यह भावना अंतर मन में बनी रही कि जब कभी भी भाजपा नेतृत्व की सरकारें केंद्र और विभिन्न राज्यों में स्थापित होगी, तब इस जनहित की योजना को जोर-जोर से शुरू किया जा सकेगा। ताकि जहां बाढ़ से विनाश हो रहा है वहां का पानी सूखे इलाकों की ओर भेजा जा सके और इससे बाढ़ की विभीषिका कम की जा सके तथा सूखे का प्रभाव निस्तेज हो। ऐसा नहीं है कि पूर्व में इन योजनाओं पर काम नहीं हो रहा था। जब तक श्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहे तब तक गुजरात में, और जहां जहां राज्यों में भाजपा की सरकारें सत्ता में बनी रहीं वहां-वहां नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं पर कार्य चलता रहा। वर्तमान में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारें स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के सपने को पूरा करने में प्राण पन से लगी हुई हैं। विभिन्न नदियों को जोड़कर उनके इस जनहित के सपनों को पूरा किया जा रहा है। खासकर मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना में बढ़-चढ़कर कम कर रही है और उन्हें मूर्त रूप देने में लगी हुई है। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने नदियों को आपस में जोड़ने के प्रोजेक्ट पर काम जारी बनाए रखा है। यह अध्ययन जारी है कि कि किन-किन नदियों को तत्काल प्रभाव से जोड़े जाने की आवश्यकता है। ऐसी अनेक छोटी बड़ी नदियों को आपस में जोड़े जाने के प्रस्तावों से केंद्रीय सरकार को समय-समय पर अवगत कराया जा रहा है। सराहनीय बात यह है कि केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी मध्य प्रदेश को सकारात्मक सहयोग प्राप्त हो रहा है। उसी का परिणाम है कि मध्य प्रदेश में नदियों को आपस में जोड़ने के काम में गति आई है। इसी उत्साहवर्धक शुरुआतों का परिणाम है कि श्री नरेंद्र मोदी स्वयं ऐसी एक महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन करने 17 दिसंबर को राजस्थान की राजधानी जयपुर में पधार रहे हैं। जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति सुनिश्चित बनी हुई है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव की ओर से प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार अब इस परियोजना के तहत पार्वती, कूनो, काली सिंध, चंबल, क्षिप्रा एवं उनकी सहायक नदियों के जल का अधिक से अधिक उपयोग जनहित में किया जा सकेगा। यही नहीं, अनेक छोटी बड़ी नदियों पर विभिन्न स्तरों के बांध स्थापित किए जाएंगे। इसे जहां सिंचाई की समस्याएं समाप्त होंगी वहीं पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।


