मध्य प्रदेश में सफलता की ओर बढ़ता जल गंगा संवर्धन अभियान

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धरती के भीतर लगातार कम हो रहा अपनी दुनिया भर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारत और उसका हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश भी इस समस्या से अछूता नहीं है। बदलते मौसम और प्राकृतिक नाराजगी के चलते पानी के पारंपरिक स्रोत लगातार सूख रहे हैं या फिर उनका स्वरूप परिवर्तित हो रहा है। जिसके चलते पीने योग्य पानी की किल्लत लगातार बढ़ रही है। कई इलाकों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध न होने से कृषि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और खेती किसानी लगातार संकट में पड़ती जा रही है। फल स्वरुप सरकारों को पेयजल के वैकल्पिक स्रोत तलाश में पड़ रहे हैं या फिर गहरी गहरी नलकूपों के रूप में उन्हें खोदना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि धरती पानी कम सोख पा रही है जबकि उसके भीतर का पानी विभिन्न माध्यमों से काफी तीव्र गति से बाहर खींचा जा रहा है। दरअसल हमारे यहां सामाजिक अपेक्षा और नौकरशाही उदासीनता के चलते धरती को रिचार्ज करने के बारे में जमीनी काम किए ही नहीं जाते । बारिश का पानी बेकार बहने की बजाय जमीन में अंदर तक पहुंचे, इसके लिए करोड़ों अरबों रूपए की योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन उन्हें इमानदारी से क्रियान्वित नहीं किया जाता। फल स्वरुप यह भारी भरकम बजट खत्म तो हो जाते हैं। लेकिन धरती की प्यास नहीं बुझ पाती। अब जल गंगा संवर्धन अभियान इस ओर आशा की किरण जगा रहा है। खासकर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव की व्यक्तिगत रुचि के चलते यह योजना मध्य प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में अनुकूल परिणाम देने लगी है। दरअसल जल गंगा संवर्धन अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसमें जल संरक्षण को विकास की धुरी मानते हुए जन-जन से जुड़ाव की भावना को आगे रखा गया है। मध्य प्रदेश में यह अभियान 30 मार्च से शुरू हुआ था और आगामी 30 जून तक यह जारी रहने वाला है। इसका मुख्य उद्देश्य नदियों जल स्रोतों वेट लैंड्स और भूजल संसाधनों का संरक्षण, पुनर्जीवन सुनिश्चित करना है। डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री के नाते मध्य प्रदेश में इस योजना को जोर-जोर से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सरकारी तंत्र और विभागों द्वारा बारिश की प्रत्येक बूंद को संजोने का संकल्प लिया गया है। क्षेत्रीय रह वासियों के साथ मिलकर प्रदेश इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। सफलता के तौर पर बेतवा के उद्गम स्थल झिरी में स्थित गौमुखी का मामला उल्लेखित किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि यहां पानी की धारा बीते समय में लगभग विलुप्त हो गई थी। पूर्व में यहां जमीन से पानी निकला करता था और गोमुखी से एक पतली धार के रूप में छोटे से कुंड में गिरता था। जो आगे चलकर एक बड़ी नदी के रूप में बहता था। रायसेन से होकर विदिशा होते हुए बेतवा नदी छतरपुर और फिर उत्तर प्रदेश तक जाती है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बेतवा सहित प्रदेश की अन्य नदियों को बावड़ियों सहित अन्य जल स्रोतों का जीर्णोद्धार करके पानी के पानी के सुगम प्रवाह के लिए रास्ते खोलने का आवाहन किया। इसका नतीजा यह हुआ कि बेतवा की झिरी में फिर से पानी की धार चल निकली है। इस तरह तमाम कोशिशों के बाद अब बेतवा नदी फिर पुनर्जीवन की ओर लगातार कदम बढ़ा रही है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले ने तो इस मामले में गजब ही कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से प्रेरणा पाकर खंडवा जिले में अनेक योजनाओं के वित्तीय स्रोत जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए खोल दिए गए। इससे हुआ यह की मनरेगा जैसी अनेक योजनाओं के तहत हजारों लोगों को मजदूरी मिली और जल संवर्धन एवं संरक्षण के कार्य भी आकर लेते चले गए। यही कारण है कि प्रदेश सरकार ने जन सहयोग के माध्यम से एक लाख से भी ज्यादा जल संरचनाएं पंजीकृत कीं तथा उनके निर्माण करने में सफलता पाई। इन प्रयासों की चलते हजारों कुए रिचार्ज किए जा सके। अनेक चेक डैम बनाए गए, बोर्डेरा की दीवारें बनाई गईं, नदियों पर बोरी बंधान किए गए, पत्थर और मिट्टी के फील्ड बंद जैसी रचनाएं बनाई गईं । रूप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को व्यवहार में लाया गया। उपेक्षित पड़े स्टॉप डैम तालाब पोखर आदि सफाई करके बारिश का पानी सोखने के लिए तैयार कर दिए गए। ढेर सारे हैंडपंपों और नलकूपों का पुनर्भरण कार्य किया गया है। नतीजतन यहां पहली बारिश में ही जल संरचनाएं तृप्त होती दिखाई देने लगी हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मानसून में खंडवा जिला जल गंगा संवर्धन अभियान के बेहतर परिणाम देने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने यहां के लोगों को संबोधित करते हुए प्रोत्साहित किया है और कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जल की प्रत्येक बूंद को संरक्षित करने, भूजल भंडारण को शुद्ध करने के लिए जन भागीदारी आधारित अभियान चलाने का आवाहन किया था। हमें संतोष है कि मध्य प्रदेश ने इस दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया है। पहले और वर्तमान में भी प्रदेश जल गंगा संवर्धन अभियान के बेहतर परिणाम दे रहा है। यहां उल्लेख कर दें कि मानसून से पहले मुख्यमंत्री और उनकी टीम नदियों तालाबों की सफाई पर जोर दे रही थी। स्वयं मुख्यमंत्री इस प्रकार के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे।उसी का नतीजा है कि उनका रुख देखते हुए नौकरशाही भी गंभीरता से इस कार्य को करती गई। नतीजा यह है कि रायसेन बालाघाट बुरहानपुर सहित अनेक जिले अब जल गंगा संवर्धन अभियान के क्रियान्वयन में नई कीर्तिमान स्थापित करने को लेकर प्रतिस्पर्धा में आ गए हैं।

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