एजेंसी, जबलपुर। विधायक संजय पाठक : मध्यप्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट के न्यायाधीश को फोन करने के मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान विधायक व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए थे। उन्होंने अदालत से अगली पेशी पर आने से छूट देने का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। अब उन्हें 14 मई को होने वाली अगली सुनवाई में दोबारा पेश होना होगा।
अगली पेशी पर छूट की मांग खारिज
मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के सामने इस मामले की सुनवाई हुई। संजय पाठक ने अदालत से भविष्य की सुनवाइयों में व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मांगी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को इस मामले में न्यायपालिका की सहायता करने की अनुमति प्रदान की है। सुनवाई के बाद जब मीडिया ने विधायक से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से मना कर दिया कि मामला अभी न्यायालय के अधीन है।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़े खनन व्यवसाय और उससे जुड़ी एक याचिका से संबंधित है। घटना 1 सितंबर 2025 की है, जब न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने खुली अदालत में यह खुलासा किया था कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की है। उस समय न्यायमूर्ति मिश्रा आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस घटना के बाद जज ने खुद को इस केस से अलग कर लिया था।
अनजाने में फोन लगने का दिया था तर्क
मामले के तूल पकड़ने के बाद आशुतोष दीक्षित ने इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमला और आपराधिक अवमानना बताते हुए नई याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने विधायक को नोटिस जारी किया था। संजय पाठक ने अपने हलफनामे में सफाई दी थी कि न्यायमूर्ति मिश्रा का नंबर उनसे गलती से लग गया था और एक घंटी जाने के बाद उन्होंने कॉल काट दिया था। हालांकि, कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि जब तक विधायक खुद पेश नहीं होते, उनके जवाब पर विचार नहीं किया जाएगा। अब 14 मई की तारीख इस मामले में अगली दिशा तय करेगी।
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