India Bangladesh Border

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा भारी तनाव : पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज न होने से फंसे हजारों लोग

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एजेंसी, कोलकाता। India Bangladesh Border : भारत और बांग्लादेश की सीमा पर इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और असामान्य स्थिति पैदा हो गई है, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और प्रशासन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित हकीमपुर चेकपोस्ट पर इन दिनों हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। पिछले कई सालों से भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अब खुद सामने आ रहे हैं और अपनी पहचान दर्ज कराकर वापस अपने वतन लौटने की गुहार लगा रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के आला अधिकारियों के मुताबिक, हर दिन 200 से 300 लोग अपने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए चेकपोस्ट पर पहुंच रहे हैं, जिससे वहां लंबी कतारें लग गई हैं और सीमा पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

सीधे भेजने के बजाय किया जा रहा है बायोमीट्रिक सत्यापन

मीडिया रिपोर्टों से मिली जानकारी के अनुसार, खुद को बांग्लादेशी बताने वाले इन लोगों को सीधे सीमा पार भेजने की अनुमति नहीं दी जा रही है। बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें सबसे पहले इन सभी संदिग्धों का गहन बायोमीट्रिक सत्यापन कर रही हैं और उनके पास मौजूद कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है। इस कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही इन्हें राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए होल्डिंग सेंटरों में भेजा जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या उन लोगों के साथ आ रही है जो दशकों से भारत में रह रहे थे और उन्होंने पहचान पत्र जैसे भारतीय दस्तावेज तो बनवा लिए हैं, लेकिन अब उनके पास बांग्लादेश की नागरिकता साबित करने का कोई भी पुख्ता सबूत नहीं बचा है।

पहली बार खुद सामने आकर पहचान बता रहे हैं अवैध प्रवासी

सीमा पर उपजे इस नए संकट को लेकर बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब सुरक्षा बलों को अवैध प्रवासियों को ढूंढने के लिए कोई तलाशी अभियान नहीं चलाना पड़ रहा है, बल्कि वे खुद चलकर आ रहे हैं और अपनी पहचान उजागर कर रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में काम करने वाले एक स्थानीय सामाजिक संगठन ‘भूखा मानुसेर अधिकार अभियान’ के पदाधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के लिए कतारों में खड़े अधिकांश लोग बहुत साल पहले गरीबी और काम की तलाश में अवैध तरीके से सीमा पार कर भारत आए थे। इस समय उन परिवारों की चिंताएं और ज्यादा बढ़ गई हैं जिनके पास दोनों ही देशों के वैध नागरिक होने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्हें डर है कि यदि किसी भी देश ने उन्हें स्वीकार नहीं किया तो उनका पूरा भविष्य अधर में लटक जाएगा।

पश्चिम बंगाल में बनाए गए 11 अस्थायी होल्डिंग सेंटर

केंद्रीय गृह मंत्रालय से मिले सख्त निर्देशों का पालन करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल 11 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर 24 परगना जिले के तेतुलिया इलाके में एक पूरे होटल को ही अस्थायी होल्डिंग सेंटर का रूप दे दिया गया है, जहां इन नागरिकों को रखा जा रहा है। राज्य प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इन केंद्रों में फिलहाल 1000 से कम लोग शरण लिए हुए हैं। इन केंद्रों के भीतर प्रशासन की तरफ से शरणार्थियों के रहने, भोजन, जरूरी चिकित्सा और छोटे बच्चों की पढ़ाई व मनोरंजन के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि मानवीय अधिकारों का उल्लंघन न हो।

बांग्लादेश ने भारत पर लगाया जबरन सीमा पार धकेलने का आरोप

इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक तनाव देखने को मिल रहा है। दूसरी तरफ मौजूद बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड यानी बीजीबी ने भारतीय सुरक्षा बलों पर यह गंभीर आरोप लगाया है कि वे अवैध प्रवासियों को जबरन बांग्लादेश की सीमा के भीतर धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। इस विवाद के बाद बांग्लादेश ने अपनी सीमा पर सुरक्षा को बेहद कड़ा कर दिया है और अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबायद इस्लाम ने इस मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि बिना उचित प्रक्रिया और आपसी सहमति के किसी भी व्यक्ति को एकतरफा तरीके से सीमा पार भेजने की कोई भी कोशिश दोनों देशों के मधुर द्विपक्षीय संबंधों को बिगाड़ सकती है और सीमा पर सैन्य टकराव को जन्म दे सकती है।

मानवीय और प्रशासनिक अनिश्चितता के बीच फंसा भविष्य

दोनों देशों के बीच जारी इस कूटनीतिक खींचतान और आरोपों के दौर के बीच अंततः पिसना उन हजारों आम लोगों को पड़ रहा है जिनका भविष्य इस समय पूरी तरह से अनिश्चित हो चुका है। ये लोग अब न तो भारत के भीतर खुद को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं और न ही जरूरी कानूनी दस्तावेजों के अभाव में अपने पैतृक देश बांग्लादेश वापस लौट पा रहे हैं। दोनों देशों की सीमाओं पर फंसे इन बेसहारा लोगों की नागरिकता का यह मुद्दा अब एक बहुत बड़ी मानवीय और प्रशासनिक चुनौती का रूप ले चुका है, जिसका समाधान आपसी बातचीत के बिना संभव नजर नहीं आ रहा है।

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