भू माफियाओं की रीड़ पर मोहन सरकार का तीखा प्रहार

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प्रदेश भर में अवैध कॉलोनियों का जाल सरकार और जनता के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं। सभी जानते हैं कि पूरे प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का कारोबार तेजी से फल फूल रहा है। हालांकि ऐसे कृत्यों के खिलाफ सरकार द्वारा कड़े कानून बनाए गए हैं । लेकिन जमीनी अमले की मिली भगत और भ्रष्ट अधिकारियों की लापरवाही के चलते अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाती। नतीजा यह है कि हर जिले और तहसील में वैध कम अवैध कालोनियां ज्यादा हैं । उनके फलने फूलने में स्थानीय निकायों का भी सबसे बड़ा योगदान है । कारण सभी जानते हैं, अधिकांश भू माफिया, अवैध कालोनी काटने वाले कॉलोनाइजर, राजनीतिक संरक्षण में अपनी मंशाओं को मूर्त रूप देते रहते हैं। क्योंकि इन पर स्थानीय नेताओं, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों आदि का वरद हस्त रहता है, इसलिए अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का अभाव बना रहता है। हद तो यह है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अनेक जनप्रतिनिधि भी इस काले कारोबार में जुड़े हुए हैं‌। इनकी ओर कोई आंख उठाकर देखे तो यह सामने वाले की लानत मलानत करने पर उतारू हो जाते हैं। दावे के साथ लिखा जा सकता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के ढेर सारे नेता समान रूप से जमीनों के काले कारोबार से जुड़े हुए हैं। या फिर इनके द्वारा ऐसे काम करने वाले काले कारोबारियों को संरक्षण मिला हुआ है। लेकिन मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अवैध कॉलोनियों का कारोबार बेखौफ नहीं चल पाएगा। यदि विधिसम्मत कार्रवाई के दौरान अवैध कॉलोनाइजर्स द्वारा शासन पक्ष को संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत करके संतुष्ट नहीं किया गया तो निर्णयात्मक कार्रवाई होगी‌। यहां तक कि अवैध कालोनी विकसित किए जाने वाली जमीन पर कब्जा भी किया जा सकेगा। अब अवैध कालोनियां विकसित करने वालों को नोटिस स्थानीय निकाय दे सकेंगे‌। इसके बाद वास्तविकता का जमीनी निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद यदि कॉलोनी अवैध पाई जाती है तो 15 दिन के अंदर जमीन को मूल स्वरूप में लाने का नोटिस जारी होगा। यदि कॉलोनाइजर ने समय अवधि में यह काम पूरा नहीं किया तो स्थानीय निकाय अवैध कॉलोनी को नेस्तनाबूद करेगा और उस जमीन पर कब्जा कर लेगा। प्रदेश की भाजपा सरकार ने जनहित में यह भी निर्णय लिया है कि उक्त जमीन का विकास जनहित में किया जाएगा। जिसका फायदा आम आदमी को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की इस मामले में तारीफ करनी होगी कि उन्होंने कानून को और कड़ा करते हुए सजा और जुर्माना बढ़ाने का प्रावधान किया है। अभी अवैध कालोनियां बनाने वालों को न्यूनतम 3 साल की सजा और अधिकतम 10 साल का कारावास का प्रावधान है। नए नियम में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसी के साथ जुर्माने का प्रावधान भी व्यापक किया गया है । नए नियम के अनुसार अवैध कॉलोनी बनाने वालों पर 10 लाख रुपए का जुर्माना बढ़ाकर इसे 50 लाख तक किया जा रहा है । जैसा कि पूर्व में लिखा जा चुका है कि भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों की मिली भगत के चलते अवैध कॉलोनियों का जाल टूट नहीं पा रहा है। इस बात को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने यह प्रावधान भी किया है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जा रही है। यदि संबंधित कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो उनके खिलाफ भी शासन अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। ऐसा भी नहीं है कि केवल कॉलोनाइजर्स के प्रति कड़ा रूख अपनाया गया है। उनकी परेशानियों का भी इस सरकार ने ध्यान रखा है। जानकारी मिल रही है कि किसी भी कॉलोनी को वैध तरीके से डेवलप करने में कॉलोनाइजरों को लाखों रुपए की घूस भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों को देनी होती है। इससे कॉलोनी की लागत बढ़ती है और आम आदमी को मिलने वाले प्लाट अथवा आवास महंगे हो जाते हैं। इसका दुष्प्रभाव कॉलोनाइजरों के व्यवसाय पर पड़ता है । फल स्वरुप यह लोग अवैध कालोनी काटने में ही अपना भला देखते हैं। इस खराबी को ध्यान में रखकर डॉ मोहन यादव ने कॉलोनी को वैध रूप से काटने हेतु होने वाली दस्तावेजी कार्रवाई को सरल बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। ताकि कॉलोनाइजर अवैध की जगह वैध कालोनियां काटने में दिलचस्पी बढ़ाएं। उम्मीद की जा रही है कि इन नए नियमों के बाद प्रदेश में अवैध की जगह वैध कॉलोनी आकार लेने लगेंगी।

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