बैरकपुर। पूर्वी भारत का पुनरुत्थान : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए देश की प्रगति और क्षेत्रीय विकास को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया। प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में ऐतिहासिक ‘अंग-बंग-कलिंग’ के गौरव को रेखांकित करते हुए इसे भारत की समृद्धि का मूल आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राचीन काल में जब भारत विश्व पटल पर एक वैभवशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित था, तब ये पूर्वी क्षेत्र ही देश की आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति के मुख्य केंद्र हुआ करते थे। मोदी ने संकल्प दोहराया कि विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य तब तक अधूरा है, जब तक अंग, बंग और कलिंग के क्षेत्र पुनः सशक्त और आत्मनिर्भर नहीं हो जाते। बंगाल की जनता के साथ अपने आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने घोषणा की कि चार मई को चुनावी प्रक्रिया के संपन्न होने के पश्चात, नई सरकार के शपथ ग्रहण के पावन अवसर पर वे पुनः बंगाल की पावन धरा पर उपस्थित होंगे।
बैरकपुर, पश्चिम बंगाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं पिछले तीन-चार दशक से देश के कोने-कोने में जाता रहा हूं। राजनीति में आने के बाद, भाजपा में आने के बाद, मैं बीजेपी के कार्यकर्ता के रूप में पार्टी जो भी काम कहती है, वो मैं करता हूं। चुनाव की जिम्मेदारियां संभालना भी इसी… pic.twitter.com/8gnQm1oyXO
— IANS Hindi (@IANSKhabar) April 27, 2026
बैरकपुर की क्रांतिकारी विरासत और निस्वार्थ जनसेवा का संकल्प
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने बैरकपुर की भूमि को नमन करते हुए इसके क्रांतिकारी महत्व का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहाँ से मंगल पांडे ने अट्ठारह सौ सत्तावन के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का बिगुल फूंका था। आज एक बार फिर यह भूमि राज्य में कुशासन के विरुद्ध एक नई क्रांति और परिवर्तन का नेतृत्व कर रही है। अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद उन्होंने कभी भी अपनी सुख-सुविधाओं या मौसम की प्रतिकूलता की चिंता नहीं की। उनका संपूर्ण जीवन केवल और केवल जनसाधारण की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि बंगाल को वर्तमान समस्याओं के जाल से बाहर निकालना और इसे एक महान शक्ति के रूप में पुनर्जीवित करना उनका परम उत्तरदायित्व है।
सत्ताधारी दल पर प्रहार और मां-माटी-मानुष के अपमान का आरोप
प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य का शासन अब अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह विमुख हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस ‘मां-माटी-मानुष’ के नाम पर वोट मांगे गए थे, आज उन्हीं का सबसे अधिक दमन हो रहा है। मोदी के अनुसार, बंगाल की कानून व्यवस्था अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुँच चुकी है, जिसे उन्होंने “महा जंगलराज” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की योजनाओं के स्थान पर केवल भ्रष्टाचार और “सिंडिकेट” का वर्चस्व बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह चुनाव केवल एक प्रतिनिधि चुनने का माध्यम नहीं है, अपितु यह पश्चिम बंगाल और समूचे पूर्वी भारत के भाग्य का निर्धारण करने वाली लड़ाई है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पदचिह्नों पर चलने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने जनसमूह को संबोधित करते हुए भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के महान बलिदान और विचारधारा की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बंगाल डॉ. मुखर्जी की तपोभूमि है और भाजपा की विचारधारा की जड़ें इसी मिट्टी में समाहित हैं। प्रधानमंत्री ने कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर की समाप्ति का उल्लेख करते हुए इसे डॉ. मुखर्जी के “एक विधान, एक निशान और एक प्रधान” के सपने की पूर्णता बताया। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि बंगाल में सुशासन और न्याय की स्थापना के लिए परिवर्तन अपरिहार्य है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा डॉ. मुखर्जी के आदर्शों पर चलते हुए बंगाल के खोए हुए गौरव को वापस लाने और इसे देश के विकास का इंजन बनाने के लिए कृतसंकल्पित है।
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