तेहरान। तेहरान की दोटूक : मध्य पूर्व के अशांत वातावरण के बीच ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य सुलह की संभावनाओं को गहरा आघात लगा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। ईरानी संसद की सुरक्षा समिति के आधिकारिक प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने इस विषय पर अपना कड़ा दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए पाकिस्तान की तटस्थता पर उंगली उठाई है। रेजई का कथन है कि यद्यपि पाकिस्तान एक सहयोगी देश है, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में उस पर एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में विश्वास नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार पाकिस्तान का झुकाव पूर्णतः वाशिंगटन और डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन की ओर है, जो किसी भी न्यायपूर्ण समाधान की राह में बाधा बन सकता है। यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो बार पाकिस्तान की यात्रा की थी, जिसे कूटनीतिक हलकों में मध्यस्थता की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान को विनाशकारी परिणामों की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के विरुद्ध अपने तेवर और कड़े कर दिए हैं। उन्होंने युद्ध विराम के प्रस्ताव पर सहमति जताने के लिए ईरान को केवल बहत्तर घंटों की समय सीमा प्रदान की है। एक संवाद के दौरान ट्रम्प ने सीधे तौर पर सचेत किया कि यदि ईरान ने युद्ध समाप्ति की दिशा में कदम नहीं बढ़ाए, तो उसकी प्रमुख तेल वाहक नलिकाओं को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रम्प का तर्क है कि कड़े प्रतिबंधों के कारण जब तेल का निकास अवरुद्ध होगा, तो पाइपलाइनों के भीतर अत्यधिक दबाव उत्पन्न होगा। ऐसी स्थिति में तकनीकी विस्फोट के माध्यम से ईरान के ऊर्जा ढांचे को स्थायी क्षति पहुंचाई जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एक बार यह बुनियादी ढांचा ध्वस्त हो गया, तो ईरान के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना असंभव हो जाएगा।
हिजबुल्लाह की नई रणनीति और आत्मघाती आक्रमणों का संकट
लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह संगठन ने इजराइल के विरुद्ध अपने सैन्य अभियान के स्वरूप में आमूल-चूल परिवर्तन की घोषणा की है। संगठन के सैन्य नेतृत्व ने यह संकेत दिया है कि वे अब चालीस वर्ष पुरानी आत्मघाती हमलों की पद्धति को पुनः जीवित कर रहे हैं। इन आत्मघाती जत्थों का मुख्य उद्देश्य लेबनानी सीमाओं के भीतर मौजूद इजराइली सैनिकों और उनके उच्चाधिकारियों को लक्षित करना है। हिजबुल्लाह का दावा है कि उसने इस विशेष अभियान के लिए बड़ी संख्या में लड़ाकों को तैयार कर लिया है, जिनका एकमात्र लक्ष्य इजराइली सेना के बढ़ते कदमों को रोकना और उन्हें भारी क्षति पहुंचाना है।
व्हाइट हाउस की आपात बैठक और हवाई हमलों की पुनः संभावना
ईरान संकट की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट हाउस में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सभा का आयोजन किया गया है। सूचनाओं के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प अपनी रक्षा परिषद के साथ ईरान पर पुनः बमबारी करने की योजना पर विमर्श कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन वर्तमान में अत्यंत सावधानी बरत रहा है। वार्ता के अगले चरण को स्थगित करने का मुख्य कारण ईरान की ओर से किसी ठोस और संतोषजनक प्रस्ताव का अभाव बताया जा रहा है। अमेरिका इस बात को लेकर भी संशय में है कि ईरान के भीतर नीति निर्धारण की अंतिम शक्ति किसके पास है, जिसके कारण कूटनीतिक प्रयासों की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।
वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों का आर्थिक भय
अंतरराष्ट्रीय निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व का यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकटकारी सिद्ध हो सकता है। संस्था के विश्लेषण के अनुसार, यदि यह तनाव बना रहा तो कच्चे तेल की कीमतें सौ डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकती हैं। संघर्ष के आरंभ से अब तक तेल के मूल्यों में चालीस प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी कुछ महीनों में स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो रिफाइंड तेल उत्पादों की लागत बढ़ने से पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।
समुद्री सीमा पर संघर्ष और भारतीय दल की सुरक्षा का प्रश्न
ओमान के तटवर्ती क्षेत्रों से समुद्री असुरक्षा की एक चिंताजनक घटना प्रकाश में आई है। ईरानी तटीय रक्षकों ने टोगो के ध्वज वाले एक रासायनिक टैंकर ‘एमटी सिरोन’ पर चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। इस घटना ने भारत की चिंता इसलिए बढ़ा दी क्योंकि उस जलपोत पर बारह भारतीय नागरिक कार्यरत थे। भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की शारीरिक चोट नहीं पहुंची है। भारत सरकार वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर रही है ताकि अपने नागरिकों की सुरक्षा और उनकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित की जा सके।
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