
वर्ष 2024 की दीपावली का सबसे बड़ा शुभ लक्षण यह है कि इसकी गूंज वैश्विक स्तर पर अनेक छोटे- बड़े और मझोले देशों में व्यापक रूप से महसूस की गई। संभव है हमारे देश की इस महत्ता से जलने वाले तत्व इस गूंज की कुछ इस प्रकार व्याख्या करें कि वहां के नेताओं के अपने राजनीतिक स्वार्थ होंगे। जिनके चलते तात्कालिक स्तर पर वहां हिंदुओं और उनके त्यौहारों का गुणगान किया जा रहा है। हम भी इस तर्क को कतई खारिज नहीं करेंगे। लेकिन यह भी स्पष्ट तौर पर जानना होगा कि भारत से बाहर दीपावली वहीं मनाई गई, जहां हिंदू समाज एकजुट है और वह विश्व के जिस देश में भी निवासरत है, वहां के कानून को सर्वोपरि रखते हुए उस देश के विकास में प्रमुख रूप से भागीदार बना हुआ है। यानि इस उपलब्धि का मूल तत्व यह है कि हमारी एकता अखंडता, जहां निवासरत हैं उस देश का सम्मान करने के संस्कार ही हमें वैश्विक स्तर पर ऐसी पहचान प्रदान करते है, जिसे किसी के भी द्वारा अनदेखा नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि वह कनाडा जो खालिस्तानी आतंकवादियों की पनाहगाह बना हुआ है। वह भी दीपावली की खुशियों में शामिल है, ऐसा उसके द्वारा प्रदर्शित किया गया और यह संकल्प भी आम किया गया की उक्त देश द्वारा हिंदुओं की सुरक्षा का ध्यान प्रमुखता से रखा जाएगा। वह ब्रिटिश साम्राज्य जो दो सदी तक भारत पर राज करता रहा, वहां दीपावली पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। शासन पक्ष की ओर से हिंदुओं को बधाइयां एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गई तथा उन्हें आयोजित समारोहों में विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया। लिखने का आशय यह है कि दीपावली का त्यौहार विश्व के इतने देशों में मनाया गया कि यदि उनकी गणना की जाए तो हाथों की उंगलियों में पोरें कम पड़ जाएंगी। सबसे बड़ी घटना अमेरिका में देखने को मिली। वहां भारतीय मूल की हिंदू नेत्री कमला हैरिस ने भारतीय महत्वाकांक्षाओं को नया आकाश उपलब्ध करा दिया है। जाहिर है यदि वे चुनाव जीतती हैं तो भारत का डंका वैश्विक स्तर पर बजने वाला है। वहां के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस बात को समझ गए हैं सो उन्होंने भी हिंदू हित की भाषा बोलना शुरू कर दी है। बेहद आश्चर्यजनक घटनाक्रम के तहत उन्होंने यह कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा भर्त्सना योग्य है। यदि मैं राष्ट्रपति बना तो वहां के हिंदुओं की रक्षा करना मेरी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने अपने मित्र और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भी बढ़-चढ़कर प्रशंसा की तथा उनके प्रति अपना आत्मीय प्रेम प्रदर्शित किया। दावा किया जा सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह बयान राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने की दृष्टि से दिया गया है, इसे नकारा भी नहीं जा सकता। लेकिन इस सत्य को भी स्वीकार करना होगा कि कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप दोनों को हिंदुओं की एकता वहां स्पष्ट दिखाई दे रही है। दोनों की पर्टियां जानती है कि हिंदुओं का मत प्रतिशत चुनाव परिणामों को व्यापक स्तर पर प्रभावित करने जा रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रपति भवन से लेकर अनेक विशिष्ट स्थानों तक हिंदुओं का सम्मान हो रहा है। वहां की महान हस्तियां दीपावली में सम्मिलित होकर स्वयं को हिंदुओं का शुभचिंतक प्रमाणित करने की कवायद में जुट गई हैं। भारत के भीतर रह रहे सनातनियों और पारंपरिक हिंदुओं को भी इस सत्य को समझना होगा। यहां भी उन्हें सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर एकजुट रहने की अत्यावश्यकता है। क्योंकि सत्ता लोलुप राजनेताओं और दलों ने अभी भी भारत में अंग्रेजों द्वारा स्थापित “फूट डालो राज करो” की नीति अपना रखी है। यही वजह है कि केवल और केवल हिंदुओं से ही उनकी जात पूछी जाती है। जाति आधारित जनगणना के नाम पर उन्हें विभक्त करने का कुत्सित प्रयास किया जाता है। अफसोस की बात यह है कि अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों में बटे हुए हिंदू मतावलंबी नेता भी सनातनियों को बांटने के षडयंत्रों में जाने अनजाने शामिल बने हुए हैं। लेकिन “कटेंगे तो बाटेंगे, एक रहेंगे तो नेक बनेंगे” ऐसे नारों ने अपना असर दिखना शुरू कर दिया है। धीरे-धीरे ही सही हिंदू एकजुट हो रहा है। उसी का परिणाम है, कल तक जो नेता खुद को धर्मनिरपेक्ष बता कर हिंदू समाज को बांटने का दुस्साहस दिखा रहे थे, अब उन्हें भी अपने जनेऊ निकाल निकाल कर दिखाने पड़ रहे हैं। फल स्वरुप नर्मदा जी, गंगा जी, सरयू जी, मंदाकिनी जी के घाट अलौकिक आरती की प्रकाशमयी तरंगों से जगमगा रहे हैं। हम आश्वस्त रहें, एकता बनी रही तो पूरा देश इसी प्रकार हिंदुत्व के “जीव मात्र कल्याण” स्वरूपी लक्ष्य को लेकर विश्व शिखर पर जगतगुरु के रूप में स्थापित होगा। बस हमें जात-पात के नाम पर बंटना नहीं है। जिन्हें परिस्थिति वश भूल गए हैं, उन्हें पूरी संवेदनाओं के साथ अपने में समाहित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए – दीपावली के दिन ही भगवान महावीर का निर्माण दिवस भी होता है। कितना अच्छा हो! हम प्रत्येक दिवाली की रात को दीप प्रज्वलित करने से पहले सुबह-सुबह अपने क्षेत्र के जिनालयों तक जाएं और वहां भगवान महावीर के चरणों में सकल हिंदू समाज की ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करें। बहुत कम लोगों का ध्यान इस ओर गया होगा कि पांच दिवसीय दीपोत्सव महापर्व के दौरान ही शुक्रवार को दाता बंदी छोड़ दिवस भी था। सर्व विदित है कि मुगल शासको से लोहा लेने वाले सिख गुरु साहिब श्री हरगोविंद सिंह जी जब ग्वालियर के ऐतिहासिक किले पर स्थित कारागार से बाहर निकले, तब जितने भी हिंदू उनके दामन को थाम सके उन सभी को कारागार से रिहाई प्राप्त हुई। कितना अच्छा हो जब हिंदू समाज के लोग इस पावन स्मरण को भी भविष्य में सिख समाज के साथ मिलकर महसूस किया करें। यही क्यों? बौद्ध, पारसी, पसमांदा, बोहरा, ऐसे कई पंथ हैं, जिन्हें हिंदू समाज को जाति पंथ के भेद भुलाकर आत्मसात करने की आवश्यकता है। आश्वस्त रहें, यदि हम ऐसा कर पाए तो हिंदुओं की एकता के बल बूते पर इस देश को विश्व का नेतृत्व कर्ता बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।


