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ईरान की नाकेबंदी पर ट्रंप को अपनों ने ही नकारा : ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका का साथ देने से किया इनकार

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एजेंसी, वाशिंगटन/लंदन/कैनबरा। ईरान समुद्री नाकेबंदी : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा विवाद अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी करने का एलान किया है, लेकिन इस फैसले में अमेरिका को अपने सबसे भरोसेमंद साथियों, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का साथ नहीं मिला है। दोनों देशों ने साफ कह दिया है कि वे इस टकराव का हिस्सा नहीं बनेंगे।

यह हमारी लड़ाई नहीं ब्रिटेन का दोटूक जवाब

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा की जाने वाली किसी भी नौसैनिक कार्रवाई में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने ट्रंप को स्पष्ट संदेश दिया कि ब्रिटेन को इस युद्ध में न घसीटा जाए। ब्रिटिश प्रधानमंत्री का कहना है कि वे होर्मुज की खाड़ी को व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रखना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह रास्ता बंद होता है, तो दुनिया भर में ईंधन का संकट पैदा होगा और आम लोगों के लिए बिजली व गैस के बिल काफी बढ़ जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला देकर ऑस्ट्रेलिया भी पीछे हटा

ब्रिटेन की तरह ही ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस सैन्य कार्रवाई से खुद को दूर कर लिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करने की बात कही और होर्मुज की खाड़ी की नाकेबंदी का विरोध किया। वहीं तुर्की ने भी इस तनाव को कम करने की सलाह दी है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सुझाव दिया है कि शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए मौजूदा संघर्ष विराम को 45 से 60 दिनों के लिए और बढ़ा दिया जाना चाहिए ताकि बातचीत का रास्ता खुला रहे।

अमेरिकी सेना शाम से शुरू करेगी घेराबंदी

भले ही मित्र राष्ट्रों ने पीछे हटने का फैसला किया हो, लेकिन अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, आज शाम 7.30 बजे से ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले सभी जहाजों को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा किसी अन्य देश के बंदरगाहों पर जा रहे हैं, उन्हें होर्मुज के रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस समुद्री क्षेत्र पर टिकी हैं, जहां तनाव चरम पर है।

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