एजेंसी, इंदौर। इंदौर राजस्व फेरबदल : इंदौर जिले के प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिले की राजस्व व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और चुस्त बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर शिवम वर्मा ने कई तहसीलों के अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया है। इस फेरबदल के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अफसरों को नई जगह भेजा गया है, वहीं जिन अधिकारियों पर काम में कोताही बरतने के आरोप थे, उन्हें महत्वपूर्ण राजस्व अदालतों से हटाकर प्रोटोकॉल शाखा जैसी अन्य जिम्मेदारियों में लगा दिया गया है। जिले की आठ तहसीलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर यह बदलाव किए गए हैं, हालांकि महू और सांवेर तहसील की व्यवस्था में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।
प्रमुख प्रशासनिक नियुक्तियां और फेरबदल
कलेक्टर ने प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए एसडीएम दीपक चौहान को कनाड़िया और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर प्रियंका चौरसिया को खुड़ैल तहसील का जिम्मा सौंपा है। कनाड़िया में तैनात ओम नारायण बडकुल को अब भू-अर्जन और लोक परिसंपत्ति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नीरज खरे को खुड़ैल से हटाकर लोकसेवा गारंटी जैसी शाखाओं में भेजा गया है। जूनी इंदौर से हटाई गईं प्रीति भिसे को खुड़ैल का नया तहसीलदार नियुक्त किया गया है, जबकि राऊ से याचना दीक्षित को प्रोटोकॉल विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है। मल्हारगंज के तहसीलदार नारायण नांदेड़ा अब कनाड़िया की जिम्मेदारी संभालेंगे और लोकेश आहूजा को मल्हारगंज में नई तैनाती मिली है।
विभिन्न तहसीलों में नई तैनातियां
जिले की अन्य तहसीलों में भी बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं। जूनी इंदौर में राकेश सस्तिया और मल्हारगंज में शेखर चौधरी को तहसीलदार बनाया गया है। राऊ तहसील की कमान सत्येंद्र गुर्जर को सौंपी गई है, वहीं भिचौली हप्सी में अनिल पटेल और हातोद में गोविंद सिंह ठाकुर को तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गई है। देपालपुर तहसील में संगीता गोलिया को तहसीलदार बनाया गया है, जबकि बेटमा और गौतमपुरा जैसे क्षेत्रों में नायब तहसीलदारों की नई नियुक्तियां की गई हैं। इस पूरे बदलाव का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज की गति को बढ़ाना और जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण सुनिश्चित करना है।
नगर निगम आयुक्त की मुश्किलें बढ़ीं
राजस्व विभाग में हुए इस फेरबदल के बीच नगर निगम प्रशासन भी विवादों में घिरा नजर आ रहा है। कर्मचारियों के वेतन और बकाया भुगतान को लेकर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के खिलाफ अदालती अवमानना की तलवार लटक रही है। अदालती आदेशों के बावजूद मस्टरकर्मियों के 45 करोड़ रुपये का भुगतान न होने पर श्रम आयुक्त कार्यालय ने अंतिम नोटिस जारी किया है। निगमायुक्त को 21 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने और भुगतान सुनिश्चित करने का समय दिया गया है। यदि इस समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकलता है, तो निगम अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज हो सकता है।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


