एजेंसी, चंडीगढ़। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता के पद से हटाए जाने के एक दिन बाद सांसद राघव चड्ढा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार समझने की भूल न की जाए। चड्ढा ने अपनी ही पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सदन के भीतर बोलने का मौका न देने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह संसद में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों को उठाते हैं, जिनमें वे विषय भी शामिल होते हैं जिनकी अक्सर अनदेखी की जाती है। चड्ढा ने सवाल किया कि क्या सामान्य नागरिकों की दिक्कतों पर बात करना कोई अपराध है और क्या उन्होंने ऐसा करके कोई गुनाह किया है।
VIDEO | Chandigarh: Punjab CM Bhagwant Mann (@BhagwantMann) slams AAP MP Raghav Chadha as ‘compromised’.
Mann said that if Chadha is unwilling to speak on issues like the “deletion” of votes in West Bengal, stage a walkout from Parliament on important issues or raise a voice… pic.twitter.com/zI7MCtUGW8
— Press Trust of India (@PTI_News) April 3, 2026
चड्ढा ने सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को बाकायदा पत्र लिखकर यह कहा है कि उनके संसद में बोलने पर पाबंदी लगा दी जाए। उन्होंने कहा कि आप ने सदन को सूचित किया है कि मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलना चाहिए। मैं उनसे साफ कह देना चाहता हूं कि मेरी इस चुप्पी को मेरी पराजय न माना जाए। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दे उठाए हैं जिससे आम जनता को लाभ हुआ है, तो भला इससे पार्टी को क्या नुकसान हो सकता है। आखिर क्यों कोई उन्हें सदन में बोलने से रोकना चाहता है।
उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने गुरुवार को ही राज्यसभा सचिवालय को चिट्ठी भेजकर राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने की मांग की थी और उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल के नाम का प्रस्ताव रखा था। सूत्रों की मानें तो इस पत्र में यह भी दर्ज है कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। किसी दौर में अरविंद केजरीवाल के सबसे खास सिपहसालारों में शुमार और देश के सबसे कम उम्र के सांसदों में गिने जाने वाले चड्ढा ने दिल्ली और पंजाब में पार्टी के कामकाज में बेहद अहम भूमिका निभाई थी।
इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राघव चड्ढा के बीच चल रही तल्खी पूरी तरह सार्वजनिक हो गई है। मुख्यमंत्री मान ने शुक्रवार को अपनी ही पार्टी के सांसद चड्ढा पर हमला बोलते हुए उन्हें समझौतावादी कह डाला। मान ने कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने पार्टी के हितों और मर्यादा के विरुद्ध जाकर कार्य किया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री उस सवाल का उत्तर दे रहे थे, जो चड्ढा द्वारा राज्यसभा सचिवालय को लेकर दिए गए बयान से संबंधित था। चड्ढा ने पार्टी के उस फैसले पर सवाल खड़े किए थे जिसमें सचिवालय से उन्हें बोलने का वक्त न देने की अपील की गई थी।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ किया कि किसी भी सदस्य के लिए पार्टी का अनुशासन ही सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सांसद उन जरूरी मुद्दों पर वॉकआउट नहीं करता जहां पार्टी ने अपना रुख साफ कर रखा है, तो उस पर कार्रवाई होना निश्चित है। मान ने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे पश्चिम बंगाल में वोटों को हटाने का मामला हो या गुजरात सरकार द्वारा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा, चड्ढा ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया और चुप्पी साधे रखी।
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मान ने आगे कहा कि सदन में नेतृत्व का बदलना कोई अनूठी बात नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 से 2019 के दौरान डॉ. धर्मवीर गांधी सदन में पार्टी के नेता हुआ करते थे और बाद में उनकी जगह स्वयं भगवंत मान ने यह जिम्मेदारी संभाली थी। मुख्यमंत्री ने राघव चड्ढा की संसद में सक्रियता पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब पार्टी चाहती थी कि गंभीर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मसलों पर चर्चा हो, तब सांसद महोदय अपना समय समोसे महंगे होने और पिज्जा की डिलीवरी में हो रही देरी जैसे हल्के विषयों पर बर्बाद कर रहे थे। मान के मुताबिक, एक जनप्रतिनिधि से यह अपेक्षा की जाती है कि वह सदन के कीमती वक्त का उपयोग जनता की भलाई के लिए करे, न कि ऐसे फिजूल के मुद्दों के लिए। इस विवाद ने आम आदमी पार्टी के अंदरूनी कलह को नई दिशा दे दी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आपसी टकराव और ज्यादा बढ़ सकता है।


